विधानसभा में पाबंदी के खिलाफ पत्रकारों ने उठाई आवाज, राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया

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न्यूज चक्र @ बून्दी
पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे की बून्दी इकाई ने राजस्थान विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश को लेकर लागू की गई नई व्यवस्था के खिलाफ बुधवार को एडीएम राजेश जोशी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। इसमें तुरंत पुरानी व्यवस्था बहाल किए जाने की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि 1 जुलाई को राज्य विधानसभा के बजट सत्र 2019 के लिए विधानसभा अध्यक्ष ने पत्रकारों के प्रवेश पत्रों में कटौती करने के साथ कुछ पाबंदियां भी लगा दी थीं। इसमें पत्रकारों के लिए पत्रकार दीर्घा के अलावा विधानसभा में अन्य किसी स्थान पर, जिसमें कैंटीन भी शामिल है, जाने पर रोक लगा दी गई । इस बदलाव से पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हुआ है। इससे इनमें खासा रोष है। इसी के खिलाफ राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि राजस्थान प्रेस प्रतिनिधि अधिनियम 1994 की विभिन्न धाराओं व खंडों में प्रावधान है कि सदन की कार्यवाही का ब्योरा जनसाधारण तक पहुंचाना पत्रकार का कर्तव्य है। उसमें कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि साप्ताहिक या छोटे अखबारों के प्रतिनिधि यह काम नहीं कर सकते। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने पत्रकारों की बढ़ती संख्या का हवाला देते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात जैसा है, जबकि संविधान में यह देश के प्रत्येक नागरिक को दी गई है। इस प्रकार यह संवैधानिक प्रावधानों की भी अवहेलना है।
राजस्थान विधानसभा के गठन के समय से ही प्रथम विधानसभा अध्यक्ष नरोत्तम जोशी व द्वितीय विधानसभा अध्यक्ष निरंजन आचार्य से लेकर इस नए आदेश के पूर्व तक ऐसा नहीं था। पुरानी व्यवस्था में पत्रकारों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया था, कानूनन भी ऐसा नहीं किया जा सकता। ज्ञापन में आगे लिखा है कि अखबारों की तीन श्रेणियां मानी गई हैं-बड़े, मझोले व लघु। भारतीय प्रेस परिषद ने तीनों के लिए एक समान अधिकार, दायित्व और आचार संहिता उल्लेखित की है। ऐसे में राजस्थान विधानसभा के लिए यह अलग नियम क्यों बनाया गया। ज्ञापन में तुरंत पुरानी व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में संगठन के जिला अध्यक्ष कमलेश शर्मा, जिला उपाध्यक्ष भवानी सिंह, सचिव सलीम अली, सह सचिव अनन्त दाधीच, सदस्य पवन शृंगी व मुकेश शृंगी शामिल थे।