राहुल ने आखिर कर दिया खेल खत्म, अब 90 वर्षीय नेता संभालेंगे कमान!

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
लम्बे समय से कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की जिद पर अड़े हुए राहुल गांधी ने आखिरकार बुधवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी। ट्विटर पर शेयर किए अपने चार पेज के इस्तीफे के बाद 90 वर्षीय कांग्रेसी मोतीलाल वोरा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर देने की जानकारी भी आई। सूत्रों के अनुसार जब तक नए अध्यक्ष के नाम पर सहमति नहीं बनती, तब तक वोरा कांग्रेस की कमान संभालेंगे। राहुल गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर दी गई खुद की जानकारी से भी कांग्रेस प्रेजिडेंट हटा दिया है।
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के इस्तीफे की चर्चा लम्बे समय से थी। उन्होंने इसकी पेशकश लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों के तुरंत बाद कर दी थी। अब राहुल गांधी ने जो इस्तीफा दिया है, उसमें उन्होंने अपने इस्तीफे के ये कारण बताए हैं-
आम चुनावों में हार की जिम्मेदारी लेकर दिया इस्तीफा
राहुल गांधी ने खुद को 2019 के आम चुनावों में हार के लिए जिम्मेदार बताया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि आगे पार्टी की ग्रोथ के लिए जिम्मेदारी लेना जरूरी है। यह भी एक वजह है कि मैं कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
पार्टी के हित में कड़े फैसले लेने की जरूरत
राहुल गांधी ने दूसरी वजह बताते हुए लिखा है कि पार्टी को दोबारा से खड़े किए जाने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है। 2019 के आम चुनावों में हार के लिए कई लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ऐसे में दूसरों को जिम्मेदार ठहराना और पार्टी अध्यक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना न्यायपूर्ण नहीं होगा।
अब कांग्रेस अध्यक्ष नहीं, इसलिए अगला अध्यक्ष नहीं चुन सकता
राहुल गांधी ने अपने फैसले के बाद नए कांग्रेस अध्यक्ष को खुद न चुनने की वजह के बारे में भी कहा है। उन्होंने लिखा है कि उनके कुछ सहयोगियों का कहना है कि वे पार्टी के किसी ठीक नेता को आगे के नेतृत्व के लिए नामित करें, लेकिन मेरे लिए इस हालत में अगले नेतृत्व का चयन करना सही नहीं होगा। हमारी पार्टी एक गौरवशाली इतिहास और विरासत को रखती है। इसने ऐसा संघर्ष और गौरव हासिल किया है, जिसका मैं सम्मान करता हूं। यह भारतीयता के धागों से बुनी हुई है। ऐसे में मैं विश्वास करता हूं कि पार्टी हमारे लिए साहस, प्रेम और सत्यनिष्ठा से नेतृत्व चलाने वाले नेता को चुनने के लिए अपना सबसे बेहतरीन निर्णय लेगी।
केवल सत्ता हासिल करना नहीं था लक्ष्य, जारी रखूंगा लड़ाई
राहुल गांधी ने यह भी लिखा है कि उनकी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए नहीं थी। उनका बीजेपी से कोई द्वेष नहीं है , लेकिन उनकी हर कोशिका में आइडिया ऑफ इंडिया बसता है। इसके अलावा उन्होंने उन हजारों भारतीयों का शुक्रिया भी अदा किया, जिन्होंने देश के अंदर से और विदेशों से उन्हें समर्थन के लिए पत्र लिखा है और कहा कि वे कांग्रेस पार्टी के मूल्यों के लिए अपनी पूरी ताकत से लड़ते रहेंगे।
अपने चार पेज के इस इस्तीफे में दूसरे पेज के आधे हिस्से से अधिक भाग तक में ऐसी ही सामान्य बातें कही गई हैं। इसके बाद बीजेपी और आरएसएस को कोसने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो अंत तक जारी रहता है। राहुल ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी जताने की कोशिश की है कि चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने लेकर अन्य सभी संवैधानिक संस्थाएं मोदी के दबाव में काम कर रही थीं, राहुल ने इनमें न्याय व्यवस्था तक को शामिल कर लिया। बीजेपी पर मजबूत वित्तीय स्थिति के चलते भी सभी संस्थाओं व विपक्ष पर हावी रहने का गम्भीर आरोप लगाया है।

राहुल गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा के साथ (फाइल फोटो)