हिंसा के बाद चुनाव आयोग की सख्ती, ममता ने आपा खोया

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के कोलकाता में मंगलवार को आयोजित रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। इसे देखते हुए बंगाल के 9 संसदीय क्षेत्रों में तय समय से 19 घंटे पहले गुरुवार रात 10 बजे बाद से ही चुनाव प्रचार पर बैन लग जाएगा है। इसके अलावा राज्य के एडीजी (सीआईडी) और प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भी हटा दिया है। चुनाव आयोग के फैसले से बंगाल के दमदम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, जादवपुर, डायमंड हार्बर, दक्षिण और उत्तरी कोलकाता में 19 मई को सीधे वोटिंग ही होगी। चुनाव आयोग ने पहले से ही विवादित एडीजी (सीआईडी) राजीव कुमार को हटाकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय से अटैच कर दिया है। वहीं प्रिंसिपल सेक्रेटरी गृह और स्वास्‍थ्य मंत्रालय को भी हटा दिया है। इन पर चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप है। आयोग ने कहा है कि अब गृह विभाग के मामलों को चीफ सेक्रेटरी देखेंगे। एडीजी (सीआईडी) राजीव कुमार को गुरुवार सुबह 10 बजे गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करना है।
पहली बार हुआ ऐसा फैसला
चुनाव आयोग ने कहा कि सम्भवतया धारा 324 को चुनाव आयोग ने इस तरह से पहली बार लागू किया है, लेकिन यह आखिरी बार भी नहीं होगा। यदि ऐसे ही हिंसा होती रही तो आयोग ऐसा बार-बार कर सकता है। साथ ही विद्यासागर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के मामले में आयोग ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि हम आशा करते हैं कि ऐसा करने वालों को राज्य प्रशासन जल्द ही पकड़ लेगा।
बढ़ती जा रही है हिंसा
इस दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि राज्य (बंगाल) में चुनाव प्रचार और रैलियों के दौरान हिंसा की वारदातें बढ़ती ही जा रही हैं। ऐसे में हमारे सामने इस कदम को उठाने के अलावा कोई चारा नहीं था। गौरतलब है कि मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की कोलकाता में आयोजित रैली पर हुई पत्थरबाजी के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के सदस्य आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान भारी पत्‍थरबाजी, लाठियों से प्रहार और आगजनी भी हुई।
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बुरी तरह बिफरी
चुनाव आयोग द्वारा प्रचार पर 19 घंटे पहले ही बैन प्रस्तावित कर देने व अपने प्रिय माने जाने वाले अधिकारियों को हटा दिए जाने से सीएम ममता बनर्जी पूरी तरह आपा खो बैठीं। कुछ ही देर बाद उन्होंने पत्रकार वार्ता आयोजित कर पीएम मोदी व चुनाव आयोग ही नहीं सुप्रीम कोर्ट तक पर अपनी भड़ास निकाली। साथ ही मतदाताओं से अपील की कि मोदी को एक भी वोट मत दो, इसे देश से निकाल दो। ममता ने चुनाव आयोग पर मोदी और शाह (अमित शाह) की धमकी के बाद फैसला लेने का आरोप तक लगाया। अमित शाह की रैली के दौरान हुई हिंसा व ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा टूटने के पीछे बीजेपी का ही हाथ होने का दावा किया।
दूसरी ओर अमित शाह ने इस सब के लिए ममता की पार्टी टीएमसी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि अगर सीआरपीएफ के जवान उन्हें नहीं बचाते तो टीएमसी की हिंसा से उनका बचना मुश्किल था।