-राजीव सक्सेना
Editor in Chief
मौसम विभाग, राजस्थान ने हाड़ौती सम्भाग सहित राज्य के 20 जिलों में 10 से 13 अप्रैल तक मौसम बिगड़ने की चेतावनी जारी की थी। मगर उस अवधि में तो मौसम पूरी तरह सामान्य रहा। दो दिन की देरी 15 अप्रैल से मौसम बिगड़ा। मौसम विभाग ने इसकी आशंका तक जाहिर नहीं की थी। इससे आमजन को तो परेशानियों का सामना करना पड़ ही रहा है, चेतावनी की अवधि के सामान्य रूप से गुजर जाने के बाद अभी तक कटने से बची फसलों की वापस कटाई शुरू कर चुके किसानों को भारी नुक़सान की जानकारियां मिल रही हैं। खड़ी फसलों पर भी मौसम की बुरी मार पड़ी है। अपनी मेहनत का यह हश्र देख कर काश्तकारों की आंखों में आंसू हैं। इनका कहना है कि इस बार तो गर्मी की शुरुआत के साथ ही मौसम रह रहकर कहर बरपा रहा है। पहले से ही कर्ज के बोझ तले बुरी तरह दबे हुए किसानों को इस बार अच्छी फसलें देख, यह बोझ कुछ कम कर लेने की उम्मीद बंधी थी, मगर अब यह टूट चुकी है। मंडियों में बिकने के लिए आई जिंसें भी पानी में तरबतर हो चुकी हैं। इससे इनकी कीमत गिरना तय है।
इधर, मौसम की यह बदमिजाजी किसानों के लिए तो बड़ा सदमा है ही, मगर राज्य की अशोक गहलोत नीत कांग्रेस सरकार के लिए भी भारी मुसीबत का सबब बनने वाला है। इसका कारण यह है कि चुनाव पूर्व किसानों की कर्जमाफी के किए वायदे को निभाने में ही कर्ज के बोझ तले दबी इस सरकार को पसीने छूट रहे हैं। वहीं, अब मौसम के कहर से बर्बाद हो रही फसलों की भी गिरदावरी करवा कर मुआवजा दिए जाने की मांग उठने लगी है। कर्जमाफी की क्रियान्विति से पहले ही अधिसंख्य किसान संतुष्ट नहीं हैं। ऐसे में राज्य में आम चुनाव के लिए होने वाले पहले मतदान की तारीख 29 अप्रैल के बीच दो सप्ताह का समय भी नहीं बचना, कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द साबित होना तय है।
यहां एक और बात है, मौसम विभाग अगर सटीक भविष्यवाणी करता तो सम्भावतया किसानों का नुक़सान अपेक्षाकृत कम होता।