जेएनयू मामला: सरकार की मंजूरी बिना पेश कर दी चार्जशीट, दिल्ली पुलिस को कोर्ट की फटकार

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
करीब तीन साल पुराने जेएनयू (जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय) में हुए देश विरोधी आयोजन व लगे नारों के मामले में तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित दो अन्य के खिलाफ दिल्ली सरकार की मंजूरी के बिना ही कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी गई थी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक दिल्ली सरकार इसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक हम इस पर संज्ञान नहीं लेंगे। इस पर पुलिस ने दस दिन के भीतर यह मंजूरी ले लिए जाने की बात कही।
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 9 फरवरी 2016 को आतंकी अफजल गुरु और मकबूल भट्ट की फांसी के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उसमें बेहद आपत्तिजनक देश विरोधी नारे भी लगाए गए। इस मामले में कुछ दिन पूर्व दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। कन्हैया कुमार, उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ दायर इस चार्जशीट के लिए दिल्ली सरकार ने अब तक दिल्ली पुलिस को अनुमति नहीं दी है, जो बेहद जरूरी है।
दिल्ली कोर्ट ने कहा कि आपके पास लीगल डिपार्टमेंट की मंजूरी नहीं है, तो फिर बिना मंजूरी के आपने चार्जशीट फाइल क्यों की? इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि हम दस दिन के भीतर इसकी मंजूरी ले लेंगे। दरअसल देशद्रोह के मामले में सीआरपीसी के सेक्शन 196 के तहत जब तक सरकार मंजूरी नहीं दे देती, तब तक कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान नहीं ले सकता है।
दरअसल, देशद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अनुमति लेनी होती है और यह दिल्ली सरकार का लॉ डिपार्टमेंट देता है। इतना ही नहीं, अनुमति लेने के लिए फाइल एलजी के पास भी जाती है। अगर परमिशन नहीं मिली तो चार्जशीट पर कोर्ट संज्ञान नहीं लेगा। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जिस दिन चार्जशीट पेश की उसी दिन परमिशन के लिए अप्लाई किया था।
दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट सेक्शन-124 A,323, 465,471,143,149,147,120B के तहत पेश की गई है। चार्जशीट में कुल 10 मुख्य आरोपी बनाए हैं। इनमें कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य शामिल हैं। इनके अलावा 7 कश्मीर छात्र और 36 अन्य आरोपी भी इसमें शामिल हैं। चार्जशीट के मुताबिक कन्हैया कुमार ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे। गवाहों के हवाले से चार्जशीट में बताया गया है कि कन्हैया कुमार ने भी देश विरोधी नारे लगाए थे। पुलिस को कन्हैया का भाषण देते हुए एक वीडियो भी मिला है। इसके साथ ही कहा गया है कि कन्हैया को पूरे कार्यक्रम की पहले से जानकारी थी। चार्जशीट में जिन सात कश्मीरी छात्रों के नाम हैं, उनसे पूछताछ हो चुकी है।
कन्हैया कुमार,उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्रों के नाम कॉलम नम्बर 11 में रखे गए हैं। कॉलम नम्बर 11 का मतलब ये होता है कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं और इन पर केस चलाया जा सकता है। बाकी 36 लोगों के नाम कॉलम नम्बर 12 में रखे गए हैं, इन में डी राजा की बेटी अपराजिता और शहला राशिद भी शामिल हैं। कॉलम नम्बर 12 का मतलब ये है कि ये आरोपी तो हैं, लेकिन जांच में पुलिस को इनके खिलाफ सबूत नहीं मिले। कोर्ट चाहे तो इन्हें समन कर सकता है। देशद्रोह, दंगा भड़काना, अवैध तरीके से इकठ्ठा होना और साज़िश के आरोप में ये चार्जशीट पेश हुई है। इस प्रकार इसमें कुल 46 आरोपी हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस मामले में सबूत के तौर पर घटना के वक़्त के कई वीडियो फुटेज, जो सीबीआई की सीएफएसएल (CFSL) में जांच के लिए भेजे गए थे और जिसके नमूने पॉजिटिव पाए गए थे, इसके अलावा मौके पर मौजूद कई लोगों के बयान, मोबाइल फुटेज, फेसबुक पोस्ट, बैनर पोस्टर शामिल हैं। वहीं जेएनयू प्रशासन, एबीवीपी के छात्र, सिक्योरिटी गार्ड, औऱ कुछ अन्य छात्रों को भी इसमें गवाह बनाया गया है। इस मामले में करीब 30 और लोग संदिग्ध पाए गए थे, लेकिन उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले थे।
तय आरोपों के अनुसार कन्हैया को पूरे कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी। सात कश्मीरी छात्रों जिनके नाम चार्जशीट में हैं, उनसे भी पूछताछ की जा चुकी हैं, पर इन्हें बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट किया गया है। कुल 1200 पेज की चार्जशीट है। इस ममाले में 90 गवाह बनाए गए हैं।
आरोपी सभी कश्मीरी छात्र जामिया अलीगढ़ और जेएनयू के छात्र हैं। सबूत के तौर पर करीब 10 वीडियो क्लिप अहम सबूत हैं, जिनकी जांच सीबीआई की सीएफएसएल में हुई थी। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में गवाहों के बयानों के आधार पर यह बताया है कि कन्हैया ने देश विरोधी नारे लगाए लगाए थे। जो वीडियो मिले हैं, उनसे ये पता चलता है कि कन्हैया वहां था। जो वीडियो भाषण वाला है उसमें क्या है? ये साफ नहीं किया है।
यह था मामला
गौरतलब है कि 9 फरवरी 2016 में जेएनयू कैम्पस में अफजल गुरु और मकबूल भट्ट के फांसी के विरोध में एक प्रोग्राम आयोजित किया गया था, जिसमें देश विरोधी नारे लगाने के आरोप हैं। पुलिस ने उस वक़्त दिल्ली के बसंत कुंज नार्थ थाने में कन्हैया कुमार, उमर खालिद, और अनिबर्न भट्टाचार्य के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया था। इसके बाद सभी आरोपियों को दिल्ली हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी।