सवर्ण आरक्षण बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिका में कहा-आर्थिक आधार पर नहीं दे सकते आरक्षण

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का विधेयक राज्य सभा से पास होने के अगले ही दिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। इस सम्बन्ध में हुए 124 वें संविधान संशोधन को यूथ फॉर इक्विलिटी नामक एनजीओ ने कोर्ट में चुनौती दी है। इसकी याचिका में कहा गया है कि ये संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार की ओर से गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लाया गया ऐतिहासिक विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पारित होने के बाद बुधवार को राज्य सभा में भी पास हो गया। अब इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाना था।‌ इसके बाद यह कानून बन जाता। मगर सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने से अब इस प्रक्रिया के लम्बे समय तक लटक जाने की आशंका पैदा हो गई है।
लोकसभा और राज्यसभा से इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे सामाजिक न्याय की जीत बताया और कहा था कि यह देश की युवा शुक्ति को अपना कौशल दिखाने के लिए व्यापक मौका सुनिश्चित करेगा। साथ ही देश में एक बड़ा बदलाव लाने में सहायक होगा। पीएम मोदी ने कई ट्वीट में लिखा, ‘‘खुशी है कि संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक पारित हो गया है जो सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने के लिए संविधान में संशोधन करता है। मुझे देखकर प्रसन्नता हुई कि इसे इतना व्यापक समर्थन मिला।”
उन्होंने कहा, ‘‘संविधान (124वां संशोधन) विधेयक, 2019 के संसद के दोनों सदनों में पारित होना सामाजिक न्याय की जीत है। यह युवा शक्ति को अपना कौशल दिखाने का व्यापक मौका प्रदान करता है और देश में एक बड़ा बदलाव लाने में सहायक होगा।” उन्होंने कहा कि विधेयक का पारित होना संविधान निर्माताओं और महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने एक ऐसे भारत की परिकल्पना की जो मजबूत एवं समावेशी हो।