मोदी का विनिंग स्ट्रोक: गरीब सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा से भी पास

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। इसी के चलते गरीब सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा में 7 के मुकाबले 165 मतों के भारी अंतर से पास हो गया। अब इसके कानून बनने की राह में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की औपचारिकता ही बाकी रह गई है। इसके बाद देश में सरकारी नौकरियों व शिक्षा में गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण मिलने लग जाएगा। इसी के साथ 124 वें संविधान संशोधन के बाद आरक्षण की सीमा 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 59.5 प्रतिशत हो जाएगी।
इससे पहले सुबह जब सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा में पेश किया गया तो विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर देने पड़ी। कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस की तरफ से सांसद आनंद शर्मा ने इस बिल का समर्थन किया। इसके बाद अलग-अलग दलों के सांसदों ने भी बिल पर अपनी राय रखी, लेकिन कई दलों की तरफ से हंगामे के बीच राज्यसभा को फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद 2 बजे चर्चा फिर शुरू हुई। घंटों चली बहस के बाद सामने आए विपक्ष के संशोधन प्रस्तावों व बिल पर वोटिंग की प्रक्रिया रात करीब पौने दस बजे शुरू हुई। तकरीबन 10. 25 बजे वोटिंग पूरी हुई।
राज्यसभा में इस तरह चली कार्यवाही
विपक्ष के सारे संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गए। इनमें
प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का प्रस्ताव व बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव भी शामिल रहा।
राज्यसभा में किस दल ने क्या कहा
-आप नेता संजय सिंह ने कहा कि यदि आज यह बिल पास होता है तो आनेवाले दिनों में आरएसएस दलितों और पिछड़ों का आरक्षण खत्म कर देगा।
-शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल का समर्थन किया।
-बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का पूरी तरह से समर्थन करती है। साथ ही आरक्षण में अल्पसंख्यक समुदाय को भी शामिल करने की दरकार बताई।
– डीएमके ने सवर्ण आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल का विरोध किया।
– जनता दल यूनाइटेड ने आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल का समर्थन किया। पार्टी के राम चंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि वह इस बिल का समर्थन करते हैं और सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का इस बिल के लिए धन्यवाद किया।
-बीजू जनता दल ने भी बिल का समर्थन किया। पार्टी के प्रसन्ना आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का पूरी तरह से समर्थन करती है, विरोध करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने सरकार का धन्यवाद किया कि बिल देरी से लेकर आए लेकिन लाए जरूर। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि यह बिल आज के सत्र में ही पास हो।
-तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान सदन में बिल का समर्थन किया
– तमिलनाडू की एआईडीएमके पार्टी के नवनीत कृष्णन ने कहा है कि वे इस बिल का कठोरता के साथ विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडू में पहले से ही 69 प्रतिशत आरक्षण लागू है।
-समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने कहा कि वे बिल का समर्थन करते हैं। उन्होंने देश के अन्य पिछड़ा वर्ग को आबादी के हिसाब से 54 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग भी की।
-राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रकाश झा ने कहा कि जिस तरह से लोकसभा में यह बिल पास हुआ उसी तरह राज्यसभा में भी पास होने की उम्मीद की जा रही है।
-मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय जनता दल ने इस बिल का विरोध किया था। बुधवार को भी राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने एक बार फिर राज्य सभा में इस बिल का विरोध किया।
-लेफ्ट सांसद डी राजा ने कहा कि बिल को संसदीय समिति में भेजा जाना चाहिए था।
-कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल के पक्ष में है!
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को लोकसभा में गरीब सवर्णों को आरक्षण देने वाला यह बिल 3 के मुकाबले 323 वोटों के बड़े अंतर से पास हो गया था। 124 वां संविधान संशोधन बिल भी इसमें शामिल था।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित कुछ दलों ने बिल को जल्दबाजी में की गई कवायद बताया। हालांकि आम चुनाव सामने देखते हुए वे इसका विरोध करने से बचे। कांग्रेस ने बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजे जाने की मांग की। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बिल को लेकर उठाई जा रही आशंकाओं का जवाब देते हुए भरोसा जताया कि यह सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर भी खरा उतरेगा।
बता दें कि प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़ा वर्गों (OBC) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा। इसका अर्थ यह है कि सामान्य वर्ग के ‘आर्थिक रूप से कमजोर’ लोगों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगा।
संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का अभी तक कोई प्रावधान नहीं था। इसी के लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में संशोधन किया जाएगा। ये संशोधन भी पास हो गए हैं।
अब तक संविधान में एससी-एसटी के अलावा सामाजिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का कोई जिक्र नहीं है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जुटाना जरूरी था। इसमें वह सफल रही। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं था, मगर स्वर्ण समाज की नाराज़गी से बचने के लिए विपक्षी पार्टियों को उसका साथ देना पड़ा।