सवर्णों को आरक्षण न मिलता तो खत्म हो जाता रिजर्वेशन: रामविलास पासवान

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क (courtesy:Amar ujala)
लोक जनशक्ति पार्टी नेता रामविलास पासवान ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अगर गरीब सवर्णों को आरक्षण न दिया जाता तो इससे उनमें रोष पैदा होता रहता जो किसी दिन आरक्षण के खात्मे का कारण भी बन सकता था।
रामविलास पासवान ने कहा कि समाज के दलितों-शोषितों के हितों के लिए सिर्फ दलित समाज के लोगों ने ही अपनी आवाज नहीं उठाई थी। इसके लिए बुद्ध, दयानंद सरस्वती, स्वामी विवेकानंद और वीपी सिंह जैसे अनेक लोगों ने अपनी भूमिका निभाई जो दलित या निचली जातियों से नहीं थे। पासवान ने कहा कि आरक्षण पाने वाले वर्ग और आरक्षण न पाने वाले वर्ग में इसकी वजह से द्वेष बढ़ रहा था। लेकिन इस कानून के आ जाने से सभी एक कसौटी पर आ जाएंगे। इससे सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा।
बिहार में महादलित जातियों के प्रभावी नेता रामविलास पासवान ने कहा कि आर्टिकल 16(4) में केवल सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़े होने का आधार ही बनाया गया था, लेकिन आर्थिक आधार जोड़ दिए जाने के बाद अब इसका लाभ अन्य जातियों को भी मिल सकेगा। इसके पहले इस तरह के प्रयास कोर्ट में जाकर खत्म हो जाया करते थे।
केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग मंत्री रामविलास पासवान ने लोकसभा में गरीब सवर्णों को आरक्षण दिये जाने का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी के गठन के समय से ही वे गरीब सवर्णों को 15 फीसदी आरक्षण दिए जाने की वकालत करते रहे हैं, लेकिन दस फीसदी आरक्षण भी ठीक है। केवल अनुसूचित जातियों को ही उनकी संख्या के अनुपात में आरक्षण मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ लोगों के पारम्परिक कामकाज में भी परिवर्तन हो रहा है, इसलिए बदलते समय में उनकी आजीविका के लिए नए अवसरों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मोदी जीतेंगे तो बदलेगी ये तस्वीर
रामविलास पासवान ने कहा कि देश की न्यायिक सेवा में केवल धनी परिवारों के लोग ही आ पा रहे हैं। इस व्यवस्था में परिवर्तन कर समाज के सभी वर्गों की इसमें भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार दोबारा चुनकर आती है तो प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण देने और न्यायिक सेवा में भी सभी वर्गों को रिजर्वेशन देने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने इस कानून को संविधान की नौंवी सूची में डालने की बात भी कही, जिससे इसकी न्यायिक समीक्षा न की जा सके।