सीएम बनते ही कमलनाथ का फैसला-किसानों के बीते 31 मार्च तक के 2-2 लाख रुपए के कर्ज माफ किए

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न्यूज चक्र @ भोपाल
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कमलनाथ ने सबसे पहले किसानों के 2-2 लाख रुपए तक के कर्ज माफ करने का फैसला लेते हुए इस आदेश से सम्बन्धित फाइलों पर हस्ताक्षर कर दिए। इस अवसर पर सभी अधिकारी मौजूद थे। मगर इस कर्ज माफी के आदेश में शामिल प्रमुख शर्त से इसके औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि बहुत ही कम किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही कमलनाथ ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए जारी कांग्रेस के ‘वचन पत्र’ (घोषणा पत्र) में किसानों के कर्ज माफ करने के किए गए वादे पर अमल किया। मध्यप्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजोरा ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर करने के बाद इस सम्बंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, सोमवार शाम जारी आदेश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा निर्णय लिया जाता है कि मध्यप्रदेश राज्य में स्थित राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में शासन द्वारा पात्र पाए गए किसानों के दो लाख रुपए की सीमा तक का 31 मार्च 2018 की स्थिति में बकाया फसल ऋण माफ किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस साल 7 जून को मंदसौर जिले की पिपल्या मंडी में एक रैली में घोषणा की थी कि अगर मध्यप्रदेश में उनकी सरकार सत्ता में आई तो वह 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ कर देगी। 11वां दिन नहीं लगेगा। इसके बाद, कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी को अपने ‘वचन पत्र’ में शामिल किया था। अपनी हर रैली में राहुल और कमलनाथ ने इस वादे को दोहराया था। आज शपथ लेने के बाद कमलनाथ ने पहला फैसला भी इसी पर लिया।
चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी की पूरी ब्रिगेड केन्द्र की मोदी सरकार को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाली सरकार बताती रही। इसके साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष ने लगातार किसानों की बदहाली, कर्ज के बोझ में दबे किसानों और यूपीए सरकार के समय में किसानों का 70 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ करने की नीति बढ़-चढ़कर बताई थी।
एक इंटरव्यू में कमलनाथ ने कहा था कि मैं वाणिज्य और उद्योग मंत्री रह चुका हूं। मुझे मालूम है कि अर्थव्यवस्था कैसे चलती है। इस राज्य के 70 प्रतिशत लोगों की जिंदगी खेती पर निर्भर करती है। केवल किसान ही नहीं, ऐसे भी बहुत से लोग हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी की दुकान चलाते हैं और दूसरे खेतों में ट्रैक्टर चलाते हैं। ऐसे भी गरीब लोग हैं जो कृषि क्षेत्र में मजदूरी का काम करते हैं।
इस आदेश पर उठ रहा बड़ा सवाल
किसानों की कर्ज माफी में बड़ी शर्त यह है कि यह बीते 31 मार्च तक की स्थिति के लिए ही है। इसे नौ माह बीत चुके हैं। विरोधियों का आरोप है कि इस प्रकार अधिकतर किसान इस अवधि तक का कर्ज तो चुका ही चुके होंगे। इस प्रकार यह तो कांग्रेस ने आते ही किसानों से उनकी कर्ज माफी के नाम पर बड़ा छल किया है।