राहुल गांधी ने खो दिया बहुत बड़ा मौका

0
160

-राजीव सक्सेना
बीजेपी शासित देश के तीन प्रमुख राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली ऐतिहासिक जीत को 50 घंटे पूरे होने जा रहे हैं। मगर अभी तक इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री चयन के नाम पर भारी बवाल मचा हुआ है।‌ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में टीएस सिंहदेव का नाम तय होने की जानकारी बाहर आई तो भूपेश बघेल के समर्थकों ने इसका तगड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। यही हाल राजस्थान में अशोक गहलोत के विरोध में सचिन पायलट व मध्यप्रदेश में कमलनाथ के विरोध में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का है। बात केवल समर्थकों तक ही सीमित होती तो अलग बात थी, मगर यहां तो भूपेश बघेल, सचिन पायलट व ज्योतिरादित्य सिंधिया तक खुल कर उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
चुनाव परिणाम के तीसरे दिन भी मुख्यमंत्रियों के चयन का विवाद नहीं सुलझा पाने से देशभर में कांग्रेस की भारी किरकिरी हो रही है। यही नहीं आम कार्यकर्ता से लेकर विधायक तक इसे लेकर हाईकमान (सीधे तौर पर राहुल गांधी) की क्षमता पर सवाल उठाने लगे हैं। इधर, भाजपा व इसके समर्थकों को भी स्वाभाविक रूप से राहुल पर चुटकी लेने का एक और बड़ा कारण मिल गया। इस पूरे घटनाक्रम पर अगर नजर डाली जाए तो निश्चित रूप से इसमें राहुल गांधी की अपरिपक्वता साफ जाहिर हो रही है। इन तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए जो नाम उन्होंने विभिन्न चरणों की मशक्कत के बाद तय किए, उसमें वो इतना समय लगाए बिना घोषित कर देते तो बदलती नजर आई उनकी छवि स्थायित्व की ओर बढ़ जाती।
इन तीनों राज्यों के मतदाताओं ने तो अपनी पसंद के विधायकों को चुन कर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी। इसके बाद पहले तो विधायकों व कार्यकर्ताओं की राय से मुख्यमंत्री चुनने की बात कहना, पूरा दिन खराब करने के बाद फिर फरमान जारी करना कि ‘ मुख्यमंत्री के नाम का फैसला पार्टी हाई कमान (राहुल गांधी) करेंगे, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के नाम पर किया गया यह उलट-फेर पूरी तरह अलोकतांत्रिक साबित हुआ। इस बीच विधायकों व कार्यकर्ताओं को अपने-अपने पसंदीदा नेता के पक्ष में खेमेबाजी व विरोध करने के लिए एकजुट होने का समय मिल गया। इसके विपरीत विधायकों की राय से ही अगर नाम तय करना था तो, इस प्रक्रिया के पूरा होने के तुरंत बाद ही नाम की घोषणा कर देनी चाहिए थी।
वैसे तो ऐसे मसलों पर किसी तरह के ओपिनियन पोल या सर्वे की जरूरत नहीं होती है। फिर भी यदि राहुल गांधी को ऐसा करना ही था तो कमल नाथ को मध्यप्रदेश, सचिन पायलट को राजस्थान और भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का प्रदेश अध्यक्षता बनाने से पहले ही करना चाहिए था। नव निर्वाचित विधायक दबी जुबान में इस बात पर तगड़ा ऐतराज जता रहे हैं कि सीएम चुनने का फैसला ‘पार्टी हाई कमान’ करे।