बून्दी उत्सव: लोक संस्कृति के रंगों से सजी शोभा यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम

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न्यूज चक्र @ बून्दी
लोक संस्कृति के पर्व बून्दी उत्सव का सोमवार को शानदार आगाज हुआ। इसकी शुरुआत सुबह साढ़े आठ बजे गढ़ गणेश जी मंदिर पर पूजा-अर्चना से हुई। यहां मंगल वाद्य, ढोल-नगाड़ों की ध्वनियों व मंत्रोच्चार के साथ जिला कलक्टर महेश चन्द्र शर्मा ने पूजा की। इस अवसर पर केन्द्रीय पर्यवेक्षक डॉ. विजय नामदेवराव झाडे व नरेन्द्र शंकर पांडेय, एसपी ओम प्रकाश, एडीएम राजेश जोशी आदि भी मौजूद थे।
करीब आधा किलोमीटर लम्बी यह शोभा यात्रा गढ़ की पड़स से रवाना होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुलिस परेड ग्राउंड पहुंची। इसमें लोक गीतों की धुन बजाते हुए बैंड वादक, थिरकती हुई घोड़ियां, सजे हुए ऊंट, मंगल कलश लिए हुए बालिकाएं, परम्परागत वेशभूषा में सजी-धजी महिलाएं, विदेशी सैलानी व विभिन्न आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई थी। झाकियों में महाकवि सूर्यमल मिश्रण की झांकी भी शामिल थी। मार्ग के दोनों ओर खड़े लोगों के अलावा घरों और दुकानों पर भी शोभा यात्रा देखने के लिए लोग जमा थे। शोभा यात्रा में सीईओ मुरलीधर प्रतिहार, एसडीएम दिवांशु शर्मा, जयपुर से आए सहायक पर्यटन निदेशक देवेन्द्र मीणा, सहायक पर्यटन अधिकारी प्रेमशंकर सैनी, इंटेक संयोजक विजयराज सिंह, एडवोकेट राजकुमार दाधीच, पुरुषोत्तम लाल पारीक, केसी वर्मा आदि गणमान्य शहरवासी भी शामिल थे।
पुलिस परेड ग्राउंड पर हुई प्रतियोगिताएं
यह शोभा या़त्रा पुलिस परेड ग्राउंड पर पहुंच कर सम्पन्न हुई। यहां उंट दौड़, घोड़ा दौड़, पणिहारी दौड़, मूंछ प्रतियोगिता, साफा बांधो प्रतियोगिता व रस्साकसी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। विदेशी सैलानियों ने इन प्रतियोगिताओं का खासा लुत्फ उठाया। साथ ही इन नजारों को अपने कैमरों में कैद करने के साथ वे यहां सेल्फी लेने को भी बेताब रहे। इसके बाद कार्यक्रमों की शृंखला में सायंकाल बाणगंगा में दीपदान समारोह हुआ।
राजस्थान व गुजरात की लोक संस्कृति का छाया जादू
बून्दी उत्सव के रंगारंग कार्यक्रमों की शृंखला में रात को ऐतिहासिक चौरासी खम्भों की छतरी पर सास्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राजस्थान व गुजरात की लोक संस्कृतियों का अनूठा संगम देखने को मिला। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में दोनों राज्यों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब मोहा। शानदार आतिशबाजी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।