सिख दंगा मामले में ऐतिहासिक फैसला: एक को मौत, दूसरे को उम्र कैद

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में देश की राजधानी में हुए जबरदस्त सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट ने दो आरोपियों में से एक यशपाल सिंह को मौत और दूसरे नरेश सेहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 35-35 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। बड़ी बात यह है कि 1984 के सिख दंगों में मौत की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। एडिशनल सेशंस जज अजय पांडे ने यह फैसला दिया।
यह सजा दंगों के दौरान दो सिखों, अवतार सिंह और हरदेव सिंह के घर जलाने और उनकी हत्या के मामले में सुनाई गई है। 14 नवम्बर को पटियाला हाउस कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया था। सुरक्षा कारणों की वजह से फैसला तिहाड़ जेल में सुनाया गया। हरदेव सिंह के भाई संतोख सिंह ने यह मामला दर्ज कराया था।
यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जज पांडे ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक हत्‍या के आरोप को साबित किया है। उन्‍होंने कहा, ‘गैरकानूनी रूप से इकट्ठे होने का मकसद सिख समुदाय के लोगों को मारना था। यह उस दौरान लगाए गए नारों से साफ पता चलता है।’
फैसले के बाद अकाली दल नेता हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट किया, “उन्होंने हत्या की, घर जलाए, रेप किया। आज उन्हें फांसी होगी। दो दोषियों के खिलाफ आज के फैसले ने सिखों के भरोसे को बढ़ा दिया है। हम टाइटलर, सज्जन और अन्य आरोपियों को कड़ी सजा मिलने की दुआ करते हैं। ”

यह है मामला
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली सहित देशभर में सिखों के खिलाफ दंगे भड़क उठे। अगले दिन 1 नवम्बर को हरदेव सिंह, कुलदीप सिंह और संगत सिंह महिपालपुर में अपनी किराने की दुकानों पर थे। उसी समय तकरीबन हजार लोगों की हिंसक भीड़ उस और आती दिखाई दी। भीड़ में शामिल लोगों के हाथों में सरिये लाठियां, हॉकी स्टिक, पत्‍थर, केरोसीन तेल था।यह नजारा देख हरदेव, कुलदीप और संगत सिंह अपनी दुकानें बंद कर एक अन्य शख्स सुरजीत सिंह के किराए के घर की तरफ भागे। कुछ समय बाद अवतार सिंह भी किसी तरह वहां पहुंच गया। इन्होंने अंदर से कमरा बंद कर लिया।
दूसरी ओर हिंसक भीड़ इनकी दुकानों को जलाते हुए इस कमरे पर जा पहुंची। दरवाजा तोड़ कर सभी को बुरी तरह मारा। इसमें हरदेव और संगत को चाकू से गोद दिया और सभी लोगों को बालकनी से नीचे फेंक दिया।इसके बाद आरोपियों ने कमरे को केरोसीन छिड़क कर आग लगा दी। घायलों को बाद में सफदरजंग अस्‍पताल में भर्ती कराया गया , जहां अवतार सिंह और हरदेव सिंह की मौत हो गई।
दिल्ली‍ पुलिस ने इस मामले में 1994 में सबूतों की कमी बताते हुए केस ही बंद कर दिया था। ऐसा तब की कांग्रेस सरकार के दबाव में करने के आरोप लगे थे।
मोदी सरकार के अहम फैसले ने बदल दी तस्वीर
न्याय के लिए भटक रहे सैकड़ों पीड़ित सिख परिवारों की व्यथा को समझते हुए 2014 में आई मोदी सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। इसके तीन सदस्यों में चेयरमैन अनुराग कुमार, रिटायर्ड जिला जज राकेश कपूर और दिल्ली पुलिस के डीसीपी कुमार ज्ञानेश शामिल किए गए। एसआईटी की मियाद जनवरी 2019 तक है। इस एसआईटी ने कई मुकदमों की दुबारा जांच की। ये पहला ऐसा मामला है जिसकी एसआईटी ने जांच की और कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दिया।
दोनों दोषियों पर एसआईटी ने आरोप लगाया कि उन्होंने दिल्ली के महिपालपुर में एक नवम्बर 1984 को दो लोगों की हत्या की थी और तीन लोगों को जख्मी हालत में तब छोड़ा था, जब उन्हें लगा था कि उनकी मौत हो गई है। कई लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया था। एसआईटी ने तीन गवाह कोर्ट के सामने पेश किए। इसके बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया।
सिख समाज में खुशी की लहर
यह फैसला आने के बाद देशभर के सिख समाज के लोगों में खासी खुशी की लहर दौड़ गई। अदालतों में लटके हुए अन्य मामलों में भी जल्द ही इस प्रकार से न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है। ये मान रहे हैं कि मोदी सरकार के द्वारा गठित एसआईटी के कारण ही न्याय मिलना सम्भव हो पाया है। पीड़ित सिख परिवारों की इस मामले में सबसे अहम ख्वाहिश सिखों के खिलाफ दंगे भड़काने के मुख्य सूत्रधार माने जाने वाले तब के दिग्गज कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को सजा दिलवाना है। वहीं चुनावी मौसम में भाजपा को कांग्रेस पर वार करने के लिए एक और हथियार मिल गया है।