कांग्रेस ने फिर चौंकाया-कल्ला को साधा, रंजू रामावत को उतारा, प्रेमी को हटा बोयत को बिठाया

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न्यूज चक्र @ जयपुर
विधान सभा चुनाव 2018 को लेकर कांग्रेस ने रविवार को अपनी 18 नामों वाली तीसरी सूची भी जारी कर दी। इसमें पूर्व के कुछ बड़े फैसलोंं में बदलाव किए गए, जो चौंकाने वाले हैं। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बीडी कल्ला को भारी विरोध के बाद उनकी मनमाफिक सीट बीकानेर वेस्ट से उम्मीदवार घोषित कर दिया गया है। वहीं पहले इस सीट पर उतारे गए यशपाल गहलोत को बीकानेर ईस्ट पर शिफ्ट कर दिया। इस प्रकार इस सीट पर पहले घोषित किए गए पेराशूट उम्मीदवार केएल झवर अब बीच में लटक गए। बड़े बदलाव में बून्दी की केशवराय पाटन (एससी सीट) से पहले प्रत्याशी बनाए गए पार्टी जिलाध्यक्ष सीएल प्रेमी को हटाकर उनकी जगह पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश बोयत को उम्मीदवार बनाना भी शामिल है। इस अहम बदलाव को बून्दी की पूर्व विधायक एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष ममता शर्मा की नाराजगी दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह अलग बात है कि राकेश बोयत की क्षमताओं व उनकी सक्रियता पर किसी को संदेह नहीं है।
एक बड़ा निर्णय पाली जिले की सुमेरपुर सीट से दिग्गज बीना काक का पत्ता साफ कर एनएसयूआई की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रंजू रामावत को प्रत्याशी बनाया जाना है। बीना काक कांग्रेस सरकार में दमदार मंत्री रह चुकी हैं, हालांकि वे कई मसलों को लेकर विवादित रही हैं। रंजू रामावत तेज तर्रार युवा नेत्री हैं। सिरोही जिला परिषद सदस्य के रूप में भी वे जनता के बीच में काफी सक्रिय रहीं, अहम मुद्दे उठाए। गौरतलब है कि बीडी कल्ला का टिकट कटने से उनके समर्थक बुरी तरह नाराज थे। वे जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ब्राह्मण समाज ने कांग्रेस को राजस्थान भर में अंजाम भुगतने तक की चेतावनी दे दी थी। इससे दबाव में आई कांग्रेस को दो बार के हारे हुए नेता को टिकट नहीं देने की अपनी नीति को त्यागते हुए यहां अपना निर्णय बदलना पड़ा। वहीं बून्दी सीट से पूर्व विधायक ममता शर्मा या उनके पुत्र समृद्घ शर्मा को भी पूर्व वित्त राज्य मंत्री हरिमोहन शर्मा के साथ प्रबल दावेदार माना जा रहा था। मगर यहां से हरिमोहन शर्मा को टिकट दे देना ममता शर्मा के लिए बड़ा झटका रहा। संगठन में अच्छी पकड़ रखने वाली ममता की इसी नाराजगी को दूर करने के लिए हरिमोहन गुट के माने जाने वाले पार्टी जिलाध्यक्ष सीएल प्रेमी को हटाकर केशवराय पाटन से राकेश बोयत को टिकट दिया गया है। यहां उल्लेखनीय है कि बोयत ममता शर्मा के प्रयासों से ही पहले बहुमत नहीं होने के बावजूद भाजपा सदस्यों के समर्थन से जिला प्रमुख बन चुके हैं। इसलिए वे ममता शर्मा खेमे के माने जाते हैं। इस सूची में शामिल की गईं पांच सीटों पर अन्य पार्टियों से गठबंधन किया गया है।
कांग्रेस हाई कमान की निर्णय क्षमता पर उठ रहे सवाल
ढेरों रायशुमारियों-सर्वे, रात-दिन की दर्जनों धुंआधार बैठकों के बाद लिए गए निर्णयों को बिलकुल ठोस माना गया था। इसके बावजूद भी विरोध हुए तो कांग्रेस हाई कमान को भारी मशक्कत कर लिए गए अपने ही निर्णय गलत लगने लगे। उनमें से कई बड़े फैसलों में फेरबदल किया गया। जिनमें फेर बदल नहीं हुआ, उन पर भी पार्टी में चिंतन-मनन चल रहा है। यह सब पार्टी के हाई कमान व उसके कोर कमेटी के सदस्यों की निर्णय क्षमता पर बड़ा सवाल उठाता है। आम जनता के दिल में यह सोच पैदा हो रही है कि सरकार बनने पर भी क्या ऐसे ही निर्णय लिए जाएंगे और फिर उनका ऐसा ही हश्र होगा। इस तरह लम्बी माथापच्ची कर फैसले लिए जाएं, फिर उन्हें भी बदलने की नौबत आ पड़े तो विकास कार्य किस प्रकार हो पाएंगे।
यह है कांग्रेस की तीसरी सूची-