कांग्रेस की सूची पर बवाल: कोटा में पंकज मेहता समर्थकों ने जमकर दिखाया अपना गुस्सा

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न्यूज चक्र @ कोटा
राजस्थान विधानसभा के लिए कांग्रेस के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के साथ ही कोटा में भाजपा की तर्ज पर अब कांग्रेस में भी बगावत के सुर मुखर हो गए। प्रत्याशियों के चयन में अदूरदर्शिता और भेदभाव का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को शहर कांग्रेस कार्यालय में टायर जलाए गए। सूरजपोल पुलिस चौकी के पास प्रदेश कांग्रेस महासचिव पंकज मेहता समर्थकों ने प्रदर्शन किया।
सबसे ज्यादा नाराजगी कोटा (दक्षिण) और लाड़पुरा विधानसभा सीट को लेकर है। हालांकि लाड़पुरा में अल्पसंख्यक समुदाय के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नाराजगी को इसलिए गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, क्योंकि जिस नईमुद्दीन गुड्डू के लिए वे टिकट की मांग कर रहे हैं, वे पहले दो बार लगातार चुनाव हार चुके हैं।
कार्यकर्ताओं में गुस्सा सबसे ज्यादा कोटा (दक्षिण) सीट को लेकर है, जहां पार्टी ने सबसे प्रबल दावेदार प्रदेश महासचिव पंकज मेहता को दरकिनार कर एक अनाम चेहरे राखी गौतम को अपना प्रत्याशी बना डाला। राखी नए शहर के एक वार्ड से पार्षद तो हैं, लेकिन पार्टी के ज्यादातर नेता-कार्यकर्ता उन्हें जानते तक नहीं हैं।
गुरुवार देर रात प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद से ही सैकड़ों समर्थक पंकज मेहता के गुमानपुरा स्थित कार्यालय पर जमा हो गए। प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए पार्टी नेतृव से मेहता को टिकट देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दे डाली कि मेहता को प्रत्याशी नहीं बनाया तो कार्यकर्ता उन पर दबाव बनाकर कोटा (दक्षिण), कोटा (उत्तर) और लाड़पुरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़वाएंगे।
इस बारे में मेहता का कहना है कि वे पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस है कि जब 5 साल पहले पार्टी विधानसभा से लोकसभा तक चुनाव हार रही थी और पार्टी विपक्ष में रही, तब उन्होंने जनता की समस्याओं के लिए लगातार संघर्ष किया। ऐसे में प्रदेश नेतृत्व ने उनकी अवहेलना क्यों की? यह सवाल प्रदेश नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए।
पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रदेश और स्थानीय नेताओं के खिलाफ खुलेआम नाराजगी प्रकट करने पर पंकज मेहता ने कहा कि यह मेरी नाराजगी नहीं है। मैं तो पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता हूं। नाराज तो पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वैसे भी मेरे लिए कांग्रेस के नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ता ही महत्वपूर्ण रहे हैं। भविष्य में मैं क्या करूंगा, इसके बारे में फैसला मेरे समर्थक-पार्टी कार्यकर्ता ही करेंगे।
मेहता ने कहा कि पार्टी ने जिस तरह से टिकट की घोषणा की है, उससे वे ही नहीं बल्कि कोटा (दक्षिण) से टिकट के प्रबल दावेदार शहर कांग्रेस अध्यक्ष रवीन्द्र त्यागी भी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। क्या मैंने अपना दायित्व उस समय ईमानदारी के निर्वहन नहीं किया, जब पार्टी बैकफुट पर विपक्ष में थी? क्या पार्टी को मेरी ईमानदारी पर शंका है? ऐसा कभी नहीं था। ऐसे में यह समझ के परे है कि मुझे टिकट के लिए योग्य क्यों नहीं समझा गया?