राफेल डील: केंद्र सरकार ने दी याचिकाकर्ताओं को सौदे की डिटेल

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए सोमवार को राफेल डील की डिटेल से जुड़े दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंप दिए। इन याचिकाकर्ताओं ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के सौदे की सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया है।
सरकार की तरफ से 36 राफेल फायटर जेट के ऑर्डर के लिए डिसिजन मेकिंग प्रोसेस में उठाए गए कदमों का डिटेल टाइटल के इस दस्तावेज में कहा है कि राफेल विमान खरीदने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 में निर्धारित मानकों का पालन किया गया है।
सरकार ने इसके साथ ही बताया है कि राफेल डील के तहत ऑफसेट पार्टनर तय करने में भारत सरकार का कोई रोल नहीं है। इसके अलावा राफेल की निर्माता दसॉ कम्पनी भारत सरकार को अक्‍तूबर 2019 तक कोई भी जानकारी जैसे – उसका ऑफसेट पार्टनर कौन है या प्रोडक्ट क्या है? देने के लिए बाध्य नहीं है।
केंद्र सरकार की तरफ से दिए गए इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि जब भारतीय वार्ताकारों ने 4 अगस्त 2016 को 36 राफेल जेट से जुड़ी रिपोर्ट पेश की तो इसका वित्त और कानून मंत्रालय ने भी आकलन किया और सीसीएस ने 24 अगस्त 2016 को इसे मंजूरी दी। इसके बाद भारत-फ्रांस के बीच समझौते को 23 सितम्बर 2016 को फाइनल किया गया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के 31 अक्टूबर के आदेश के अनुसार ही ये दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को सौंपे गए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इन विमानों की खरीद के लिए डिसिजन मेकिंग प्रोसेस में उठाए गए कदमों सहित सारा विवरण, जिसे वैध तरीके से सार्वजनिक दायरे में लाया जा सकता है, इस मामले में याचिका दायर करने वाले पक्षों को उपलब्ध कराया जाए।
कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा था कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों को फ्रांस से खरीदने की कीमतों का डीटेल भी दस दिन के अंदर सीलबंद लिफाफे में उसके समक्ष पेश किया जाए। कोर्ट ने केंद्र से तब कहा था कि अगर कीमतों का डिटेल ‘विशेष’ है और इसे अदालत से साझा नहीं किया जा सकता तो केंद्र को यह जानकारी देते हुए, इस बारे में हलफनामा दाखिल करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 14 नवम्बर को सुनवाई करेगा।
ये हैं याचिकाकर्ता
राफेल डील की जांच के लिए अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और फिर अधिवक्ता विनीत ढांडा ने याचिकाएं दायर कीं। इसके बाद आप पार्टी नेता एवं सांसद संजय सिंह ने अलग याचिका दायर की। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में एक संयुक्त याचिका दायर की है।