यौन शोषण के आरोपी एमजे अकबर को आखिर देना पड़ा इस्तीफा

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क
#MeToo मुहिम के तहत 20 महिलाओं से यौन शोषण के आरोपों में बुरी तरह घिरे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने बुधवार को आखिर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दबाव के कारण दस दिन बाद अकबर को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा। अकबर के इस्तीफे की खबर सामने आते ही उन पर #Me Too के तहत यौन दुर्व्यवहार का पहला आरोप लगाने वाली वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी ने खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनके आरोप सही साबित हुए हैं। प्रिया का आरोप है कि अकबर ने पत्रकार रहते हुए एक होटल के कमरे में इंटरव्यू के दौरान उनसे यह हरकत की थी।
रमानी के आरोपों के बाद अकबर के खिलाफ आरोपों की बाढ़ सी आ गई थी। एक के बाद एक कई अन्य महिला पत्रकारों ने उन पर संगीन आरोप लगाए। अकबर पर ताजा आरोप एक विदेशी महिला पत्रकार ने लगाया। इसके अनुसार वर्ष 2007 में जब वो इंटर्नशिप के लिए आईं तो वो सिर्फ 18 साल की थीं। उस समय उनके साथ एमजे अकबर ने गलत हरकत करने की कोशिश की।
यह पहली बार है, जब मोदी सरकार के किसी मंत्री ने किसी विवाद में घिरने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया है। इस्तीफे से पहले अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को इसकी रिपोर्ट दी थी। उल्लेखनीय है कि अकबर पर जब ये गम्भीर आरोप लगने शुरू हुए, उस समय वे विदेश दौरे पर गए हुए थे। 14 अक्टूबर को वहां से लौटे अकबर ने पहले तो मीडिया से बाद में जवाब देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने अपना बयान जारी कर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों के सिलसिलेवार जवाब देते हुए उन्होंने इन्हें पूरी तरह गलत बताया था। साथ ही सवाल भी उठाया था कि चुनाव नजदीक आने के समय ही उन पर ऐसे आरोपों की बौछार क्यों हो रही है। उन्होंने आरोप लगाने वाली महिलाओं के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की बात भी कही थी। इसके बाद अकबर ने उन पर पहला आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का केस किया।
यह है पूरा मामला
एमजे अकबर कई अखबारों के सम्पादक रह चुके हैं। उनके ऊपर अब तक कई महिला पत्रकारों ने #MeToo कैम्पेन के तहत आरोप लगाए हैं। अकबर पर पहला आरोप प्रिया रमानी नाम की वरिष्ठ पत्रकार ने लगाया था। इसमें उन्होंने एक होटल के कमरे में इंटरव्यू के दौरान उनके साथ हुई हरकत की दास्तां बयां की थी।
रमानी के आरोपों के बाद अकबर के खिलाफ आरोपों की बाढ़ सी आ गई, एक के बाद एक कई अन्य महिला पत्रकारों ने उन पर संगीन आरोप लगाए। इसके चलते विपक्ष तो लगातार उनके इस्तीफे की मांग उठा ही रहा था, सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर मुहिम छिड़ी हुई थी। इसके अलावा पार्टी प्रवक्ताओं व एनडीए के सहयोगी दलों को भी विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे पर जवाब देना भारी पड़ रहा था। हर तरफ से यह बात उठ रही थी कि हर मोर्चे पर नारी सम्मान की बात करने वाले पीएम मोदी इस पर चुप क्यों हैं।