राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस हिम्मत दिखाएंगी ?

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-राजीव सक्सेना
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले आए दो ओपिनियन पोल्स के आंकड़ों में कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से बेदखल करती नजर आ रही है। राजस्थान की जनता पिछले 20 साल से हर बार सत्ताधारी पार्टी को हराती आ रही है। एबीपी न्यूज-सी वोटर और सी-फोर के सर्वे में 200 विधानसभा सीटों वाले राजस्थान में कांग्रेस को क्रमशः 142 और 124-138 सीटें मिलती बताई गई हैं। दोनों ही सर्वे में कांग्रेस को करीब 50 प्रतिशत वोट मिलते दिख रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की रेटिंग भाजपा की ओर से इस पद के लिए प्रोजेक्ट की गईं वर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से काफी अधिक है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस रेटिंग में तीसरे नम्बर पर हैं।
यहां खास बात यह है कि राजस्थान की जनता में मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं का नारा भी बुलंद है। इस प्रकार यहां के मतदाताओं की आम राय है कि वे राज्य में बीजेपी को तो पसंद करते हैं, मगर वसुंधरा को नहीं। इधर, कांग्रेस ने पायलट और गहलोत के बीच वर्चस्व के लिए चल रही प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अभी तक इनमें से किसी को भी भावी मुख्यमंत्री के रूप में घोषित नहीं किया है। उसे अंदेशा है कि इनमें से किसी एक को इस रूप में सामने लाने का मतलब है, दूसरे पक्ष के समर्थकों को बुरी तरह नाराज करना। वहीं वसुंधरा राजे के खिलाफ जनता की भारी नाराजगी के बावजूद बीजेपी उनकी बगावत की आशंका से कोई और नाम सोचने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। आम धारणा है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा कार्यकर्ताओं व मंत्रियों तक से उनकी छवि के मुताबिक महारानी के समान ही व्यवहार करती आईं हैं। उनके कथित अशालीन व्यवहार से इन सबके असंतुष्ट होने की बात कही जाती रही है। वसुंधरा जनता में उनकी सरकार व उनके प्रति उपज रहे असंतोष को समझ अपने कार्यकाल के अंतिम डेढ़-दो साल में ही सक्रिय र्हुइं। इसके बाद ही विभिन्न योजनाएं सामने लाईं। बड़ी संख्या में मतदाताओं का मानना है कि इन योजनाओं को शुरुआत में ही लागू किया जाता तो उन्हें अब तक इनका लाभ मिलना शुरू हो जाता। किसान भी अच्छी योजनाओं के बावजूद पेचीदगियों के कारण इनका लाभ नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। इसके अलावा भी अज्ञात कारणों से वसुंधरा जनता की पहली पसंद नहीं बन पा रही हैं। कुछ दिन पूर्व बून्दी में हुई रैली में वसुंधरा राजे ने मंच पर विधायक अशोक डोगरा को लगातार जिस लहजे में सम्बोधित किया, उसे जनता ने डोगरा का अपमान माना। सोशल मीडिया से लेकर लोगों की आम बातचीत में भी कई दिन तक यह मसला छाया रहा था। इससे लोगों की यह धारणा और बलवती हुई कि वसुंधरा बहुत घमंडी हैं। वे अपने सामने किसी और को कुछ नहीं समझती हैं, चाहे वो पार्टी का कितना भी बड़ा नेता हो। हाल में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर ही उनका पार्टी हाईकमान तक से कथित रूप से लम्बे समय तक चला टकराव मीडिया की सुर्खियां बना रहा था। अशोक परनामी प्रदेश अध्यक्ष थे, मगर उपचुनावों में मिली करारी शिकस्त के काफी देर से ही सही मगर उनसे इस्तीफा ले लिया गया था। खास बात यह है कि परनामी भी वसुंधरा की जिद के कारण ही बने प्रदेश अध्यक्ष माने जाते रहे हैं। अब मदन लाल सैनी भी इसी रूप में मौजूद हैं। आम धारणा है कि वसुंधरा उनकी कठपुतली के रूप में काम कर सकेने वाला ही प्रदेश अध्यक्ष पसंद करती हैं। ऐसा प्रदेश अध्यक्ष जो उनके निर्णयों पर जरा भी सवाल उठाए बिना उन्हें मानता रहे, लागू करता रहे। वसुंधरा के कुछ फैसलों ने भी जनता को उनके खिलाफ कर दिया था। इनमें नेताओं व अफसरों को बचाने के लिए लाया गया विधेयक प्रमुख रहा, हालांकि भारी विरोध के कारण उन्हें इसे वापस लेना पड़ा था।
इन सब हालातों तथा बड़े न्यूज चैलन व सर्वे एजेन्सी के ओपिनियन पोल के परिणामों को देखते हुए बीजेपी व कांग्रेस क्या अपने फैसलों पर पुनर्विचार करने की हिम्मत करेंगी। बीजेपी हाई कमान से पार्टी के समर्थक यह आस लगाए हुए हैं कि वह वसुंधरा की जगह अन्य नेता को प्रोजेक्ट करे। इसमें केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं का तो यहां तक कहना है कि हाई कमान अगर यह फैसला कर ले तो वापस स्पष्ट बहुमत से राज्य में सत्ता हासिल करना तय है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट राज्य की जनता की पहली पसंद के रूप में सामने आ चुके हैं। ऐसे में क्या कांग्रेस असमंजस को दूर करते हुए पायलट को ही इस पद के लिए भावी उम्मीदवार घोषित कर सकेगी।
उल्लेखनीय है कि एबीपी न्यूज-सी वोटर ने सर्वे में राजस्थान में कांग्रेस को 49.9 प्रतिशत और बीजेपी को 34.3 प्रतिशत वोट मिलने की सम्भावना जताई गई है। सी-फोर के सर्वे में राजस्थान में कांग्रेस को 50 और बीजेपी को 43 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया है। सर्वे के अनुसार राजस्थान में 36 प्रतिशत मतदाता सचिन पायलट को, वहीं 27 प्रतिशत लोग वसुंधरा को सीएम देखना चाहते हैं। इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत 24 प्रतिशत मतदाताओं की ही पसंद पाए गए। वहीं सी-फोर के सर्वे में पायलट, गहलोत और राजे को क्रमशः 32, 27 व 23 प्रतिशत वोट मिले।