शादीशुदा महिला से सम्बन्ध अब अपराध नहीं, मगर तलाक का आधार

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 150 साल पुराने कानून को बदलते हुए एडल्टरी यानी शादीशुदा महिला से फिजिकल रिलेशन बनाने को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। इससे पहले अगर कोई मर्द किसी शादीशुदा महिला से उसके पति की इजाज़त के बिना सम्बन्ध बनाता था तो उसे 5 साल तक की सजा हो सकती थी। अब इस मामले में किसी को कोई सजा नहीं मिलेगी। मगर बड़ी बात यह है कि एडल्टरी तलाक लेने का एक आधार होगा।
सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने आईपीसी की धारा 497 और सीआरपीसी की धारा 198 (2) को असंवैधानिक करार दे दिया। पांचों जजों ने चार अलग-अलग फैसले लिखे और सभी ने एक ही राय दी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1860 के इस कानून में एक शादीशुदा महिला को उसके पति की जायदाद के तौर पर देखा गया था। कानून में कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति किसी की पत्नी के साथ बिना उसके पति की इजाजत सम्बन्ध बनाता है तो ये एक जुर्म माना जाएगा। साथ ही इसमें शिकायत करने का अधिकार सिर्फ उस महिला के पति को दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने आज इस कानून को रद्द करते हुए कहा कि किसी भी औरत को उसके पति की प्रॉपर्टी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। पत्नी कोई chatal यानी बंदी नहीं है। ये कानून महिला की गरिमा के खिलाफ है।
खराब शादी की वजह से होती है एडल्टरी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि एडल्टरी की वजह से शादी खराब नहीं होती, बल्कि खराब शादी की वजह से एडल्टरी होती है। इसके लिए किसी पर केस करने या सजा देने का मतलब है कि आप दुखी को और दुख दे रहे हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी को एक दूसरे से समर्पित रहना एक आइडियल सिचुएशन हो सकता है, लेकिन समाज की अपेक्षाओं को किसी पर थोपा नहीं जा सकता।
एडल्टरी पर अब तक यह था कानून
आईपीसी की धारा 497 केवल उस पुरुष को अपराधी मानती है, जिसके किसी और की पत्नी के साथ सम्बन्ध हैं। उसे पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। वहीं पत्नी को इसमें अपराधी नहीं माना गया है । इस कानून को ऐसे और अधिक स्पष्ट किया जा सकता है कि पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसकी सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाता है, लेकिन उसके पति की सहमति नहीं लेता है तो उसे पांच साल तक जेल की सज़ा होगी। वहीं जब पति किसी दूसरी महिला से सम्बन्ध बनाए तो उसे अपनी पत्नी की सहमति की कोई जरूरत नहीं।
उल्लेखनीय है कि 8 अगस्त को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने कहा था कि एडल्टरी अपराध है और इससे परिवार और विवाह तबाह होता है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली संवैधानिक बेंच ने सुनवाई के बाद कहा था कि मामले में फैसला बाद में सुनाया जाएगा।