राजस्थान: बंद के दौरान कहां क्या हुआ, जानें

0
233
बाड़मेर। अर्थण्डी गांव में बैनर लगाकर विरोध प्रदर्शन करते ग्रामीण

न्यूज चक्र @ जयपुर/ सेन्ट्रल डेस्क
एससी-एसटी एक्ट में केन्द्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के विरोध में गुरुवार को सवर्ण व ओबीसी संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद का राजस्थान में भी व्यापक असर रहा। राजधानी जयपुर में ही परोकटे, पांचबत्ती और एमआई रोड सहित प्रमुख बाजार तक पूरी तरह बंद रहे। यहां समता आंदोलन के अध्यक्ष पराशर नारायण शर्मा को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उन्हें पहले ही पाबंद कर दिया था। बारां जिले के गजनपुरा गांव में इस दौरान हुई झड़प और पथराव में दो लोग घायल हो गए।
बंद के मद्देनजर एहतियात बरतते हुए पुलिस ने जयपुर के बड़ी चौपड़ पर प्रदर्शन कर रहे कुछ लोगों को भी हिरासत में लिया। यहां पंकज थोई और पवन गौड़ को पकड़ा गया है। वहीं माणक चौक इलाके में करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया।
गजनपुरा गांव में पथराव, दो घायल
बारां जिले के गजनपुरा गांव में बंद कराने गए सवर्ण समाज के लोगों व गांव के व्यापारियों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान माहोल गर्मा गया और पथराव और झड़प में दो लोगों को चोट आई। गांव के व्यापारियों ने सवर्ण समाज के लोगों पर पथराव किया था। झड़प की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस जाप्ता गजनपुरा पहुंच गया। ऐसे में सवर्ण समाज के लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रताप चौक पर प्रदर्शन भी किया।
हाड़ौती के कोटा शहर में भी कुछ स्थानों पर मामूली घटनाओं को छोड़ बंद पूरी तरह असरदार रहा। बून्दी व झालावाड़ में लगभग शांतिपूर्ण बंद रहा। बारां के गजनपुरा गांव की घटना को छोड़ तकरीबन बंद सामान्य रहा।

कोटा। सवर्ण व ओबीसी समाज की विशाल रैली।

10 जिलों में तैनात एसटीएफ और आरएसी
राज्य के 10 जिलों में एसटीएफ और आरएसी की बटालियन को तैनात किया गया। इन जिलों में करौली, जोधपुर, बारां, उदयपुर, भरतपुर, धौलपुर और दौसा  शामिल हैं।
बंद का कहां, क्या असर
– भरतपुर में शहर के साथ ही जुरहरा के बाजार बंद रहे। यहां पुलिस के जवान लगातार गस्त कर रहे हैं। आवश्यक सुविधाओं को छोड़कर बाजार पूरी तरह बंद हैं।
– उदयपुर में बंद समर्थकों ने सूरजपोल चौराहे के पास पुलिस की गाड़ी रोक ली। इस बीच पुलिस और बंद समर्थकों के बीच झड़प हुई। समझाइश के बाद माहौल शांत हुआ।
– झुंझुनूं के नवलगढ़ में भी बंद का असर है। यहां मुख्य बाजार, नानसा गेट सहित सभी बाजार बंद रहे। यहां मेडिकल स्टोर भी बंद रहे।
– कोटपुतली के बाजार भी बंद रहे। यहां व्यापार मंडल ने शांतिपूर्ण तरीके से बंद का समर्थन किया। आपातकालीन व आवश्यक चीजों की दुकानें खुली हैं। जगह-जगह पुलिस तैनात है।
– प्रतापगढ़ पूरी तरह बंद रहा। यहां करणी सेना ने जिला मुख्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान शहर में पुलिस-प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
– सर्व समाज के आह्वान पर पुष्कर बंद भी सफल रहा। बन्द समर्थकों ने बाजार में रैली निकाल कर दुकानदारों से बाजार बंद करने की अपील की। अधिकांश दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बन्द कर भारत बन्द का समर्थन किया। बन्द के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम किये गए थे। इससे किसी कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई।
बाड़मेर: गांवों में राजनैतिक पार्टियों के घुसने पर रोक
एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ देशभर में आंदोलन पर उतरे सवर्ण व अन्य पिछड़ा वर्ग की ओर से गुरुवार को किए गए भारत बंद के दौरान बाड़मेर के कुछ गांवों में अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां ग्रामीणों ने गांवों में प्रवेश करने वाले रास्तों पर एक बड़ा बैनर लगाकर राजनीतिक पार्टियों के गांव में घुसने पर रोक लगा दी। बैनर पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है कि यह गांव सवर्ण व अन्य पिछड़ा वर्ग का का है। यहां सभी राजनीतिक पाटिर्यों का प्रवेश निषेध है।
मामला जिले के समदड़ी पंचायत समिति के अर्थण्डी गांव व रातड़ी ग्राम पंचायत मुख्यालय से जुड़ा हुआ है। यहां सभी ग्रामीण एक राय होकर एससी-एसटी एक्ट के विरोध में उतर आए। बैनरों पर लिखा है कि गांव में कोई भी राजनीतिक पार्टी प्रवेश नहीं करे। हमें केन्द्र सरकार द्वारा एक्ट में किया गया संशोधन मंजूर नहीं है। ऐसे में इस एक्ट के विरोध में सभी गांव वाले चुनाव में नोटा का प्रयोग करेंगे। जब तक इस एक्ट में संशोधन नहीं होगा तब तक ऐसा विरोध जारी रहेगा।
एक्ट में संशोधन ही है मांग
रातड़ी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर भी ऐसे ही बैनर लगे हैं। यह गांव भी सवर्ण जाति बाहुल्य है। ग्रामीणों का कहना है कि एक्ट में संशोधन ही उनकी मांग है। सरकार इस पर विचार कर जनहित में कोई निर्णय ले। उल्लेखनीय है कि एससी-एसटी एक्ट के विरोध में भारत बंद का पूरे राजस्थान में व्यापक असर देखा गया।
देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसा रहा असर
बिहार में बंद के दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक श्याम रजक पर भी हमला किया गया। बिहार के इस पूर्व मंत्री का आरोप है कि बेगूसराय में एक कार्यक्रम से लौटने के दौरान उनके क़ाफिले पर भारत बंद समर्थकों ने हमला किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये अनुसूचित जाति/अनुसूचित बजनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून में संशोधन को लेकर सवर्ण संगठनों द्वारा गुरुवार को भारत बंद बुलाया गया था। कुछ घटनाओं को छोड़कर बंद लगभग पूरे देश में शांतिपूर्ण रहा. अभी तक देश के किसी हिस्से से किसी अप्रिय घटना की रिपोर्ट नहीं मिली है.
मध्य प्रदेश की रिपोर्ट
बंद के मद्देनजर मध्यप्रदेश सरकार ने अधिकांश जिलों में धारा 144 लागू कर दी थी। इसके अलावा पूरे प्रदेश में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे। भिण्ड, शिवपुरी व ग्वालियर सहित कुछ अन्य जिलों में स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों की छुट्टी रखी। मध्यप्रदेश के सभी पेट्रोल पम्प मालिकों ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
बंद के कारण प्रमुख मंडियों और बाजारों में आधे दिन तक कारोबार ठप्प रहा। इस दौरान शहर में किराना जिंसों, अनाजों, दाल-दलहनों, जेवरात, बर्तनों, लोहा उत्पादों, कपड़ों आदि के प्रमुख कारोबारी केन्द्रों में सन्नाटा पसरा रहा। इससे करोड़ों रुपए के नुकसान का अनुमान है।
नोएडा में  शांतिपूर्ण प्रदर्शन
भारत बंद के तहत नोएडा में कई संगठनों ने एक साथ मिलकर एससी/एसटी एक्ट का विरोध किया। सैकड़ो लोगों ने इस एक्ट में संशोधन किए जाने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला। सुबह करीब 10 बजे दो दर्जन संगठनों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग नोएडा स्टेडियम में एकत्रित हुए। स्टेडियम के गेट नंबर-4 से सभी ने एक साथ पैदल विरोध मार्च निकाला, जो विभिन्न सेक्टरों में होते हुए सेक्टर-27 स्थित जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय पहुंचा। वहां प्रदर्शन करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट शैलेश मिश्रा को सौंपा।
योगी ने कहा भारत बंद का कोई मतलब नहीं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में एससी/एसटी कानून के विरोध में बंद पर कहा कि भारत बंद का कोई मतलब नहीं है, लोगों की अपनी भावनाएं हैं, लोकतन्त्र में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस देश के प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा, खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। हमने जाति एवं धर्म के आधार पर कभी राजनीति नहीं की। समाज के दबे कुचले लोगों को संरक्षण देने के लिए यह कानून बनाया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इसका किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो।
उत्तराखण्ड में मिला-जुला असर
‘भारत बंद’ का उत्तराखंड में मिला-जुला असर देखने को मिला। बंद के आह्वान पर राजधानी देहरादून में कोई खास असर दिखाई नहीं दिया। स्कूल, कॉलेज, पेट्रोल पम्प, बाजार आदि अन्य दिनों की तरह खुले रहे, हालांकि, शहर के कुछ स्थानों पर दूध तथा अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति सामान्य दिनों की तरह नहीं हुई। अल्मोड़ा, पौड़ी जैसे प्रदेश के कुछ स्थानों पर बंद का प्रभाव दिखाई दिया, इससे बाजार आदि बंद रहे।