कांग्रेस को सताई ब्राह्मण समाज की चिंता, आरक्षण तक का वायदा

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क
लोकसभा चुनाव 2019 के ठीक पहले एक ओर एससी/एसटी एक्ट को लेकर देश का बुरी तरह गर्म माहौल मोदी सरकार की मुसीबत बढ़ा रहा है, वहीं कांग्रेस ने सरकार बनने पर ब्राह्मण जाति को आरक्षण देने का ऐलान कर एक बड़ा सियासी दाव चल दिया है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर तट पर आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो ब्राह्मणों को 10 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।
कांग्रेस के डीएनए में ब्राह्मण समाज का खून
सुरजेवाला ने यही नहीं रुके, उन्होंने ब्राह्मणों को लुभाने वाला एक बेहद दिलचस्प बयान भी दे डाला। कहा, ‘मेरे एक साथी ने कहा कि आप कांग्रेस के झंडे के नीचे ब्राह्मण समाज का सम्मेलन क्यों कर रहे हैं ? तो मैं जवाब देना चाहता हूं कि ब्राह्मण समाज का खून कांग्रेस के डीएनए में है। अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो देश के अंदर एक ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड का चेयरमैन भी ब्राह्मण समाज के व्यक्ति को ही बनाया जाएगा। स्वाभाविक ज्ञान हमेशा ब्राह्मणों के पास रहा है, क्योंकि पैसा कभी ब्राह्मण का ज्ञान नहीं खरीद सका।’
ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का करेंगे गठन
रणदीप सिंह सुरेजवाला ने यह भी कहा कि, ‘कांग्रेस अगर सत्ता में आई तो ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन कर, उसके लिए 300 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया जाएगा। ब्राह्मण समाज के अंदर ऐसे काफी परिवार हैं, जो मौजूदा दौर में आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, लेकिन केन्द्र की सरकार को उनकी बिल्कुल भी फिक्र नहीं है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड के 300 करोड़ रुपए के बजट से कांग्रेस उन परिवारों की मदद करेगी। बोर्ड के बजट से गरीब ब्राह्मण परिवार के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। अगर कांग्रेस को सत्ता में आने का मौका मिलता है तो मौजूदा आरक्षण नीति को छेड़े बगैर, पार्टी ब्राह्मण समाज के लिए 10 फीसदी तक के आरक्षण की व्यवस्था करेगी।’
सुरजेवाला के इस बयान पर बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा आरक्षण नीति को छेड़े बगैर किसी भी जाति को आरक्षण देना संवैधानिक रूप से सम्भव ही नहीं है। इसी के साथ आरक्षण की अधिकतम सीमा भी कांग्रेस के वायदे को कैसे पूरा होने देगी?
6 सितम्बर को सवर्णों का भारत बंद
गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए इस तरह के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के विरोध में दलित संगठनों ने देशभर में आंदोलन किया, जिसके बाद केन्द्र सरकार ने संसद में कानून बनाकर इस एक्ट को इसके मूल स्वरूप में लौटा दिया। अब सवर्ण समाज के लोग सरकार के इस कदम के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सवर्ण समाज के लोगों ने 6 सितम्बर को भारत बंद का भी ऐलान किया है।