राजस्थान के पत्रकारों में रोष, बिहार के मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

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न्यूज चक्र @ बाड़मेर/जयपुर/पटना
बाड़मेर से गिरफ़्तार कर बिहार ले जाए गए पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित के मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद संज्ञान लेते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का जिम्मा पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन खान को दिया गया है। इससे पहले बिहार के डीजीपी भी इस मामले में जांच के आदेश दे चुके थे।
दरअसल पटना के स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट में गत 31 मई को नालंदा जिले के टेटुआ के रहने वाले राकेश पासवान नामक शख़्स की ओर से आवेदन दिया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि उसके साथ बाड़मेर के रहने वाले दुर्ग सिंह ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज व मारपीट की। आवेदन में यह भी कहा गया था कि दुर्ग सिंह का बाड़मेर में गिट्टी का व्यवसाय है। जहां काम करने के लिए वो पटना से मज़दूरों ले जाते थे।
राकेश पासवान ने आवेदन में दावा किया था कि दुर्ग सिंह उसे भी छह महीने पहले बाड़मेर ले गए थे, जहां वो पत्थर तोड़ने का काम करता था। आवेदन में आगे कहा गया है कि दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने उसकी मजदूरी के 72 हजार रुपए हड़प लिए, उसे मज़दूरी का एक रुपया भी नहीं दिया। जब राकेश अपने पिता की तबीयत ख़राब होने पर पटना वापस आया तो 15 अप्रैल को दुर्ग सिंह भी पटना आ गया। यहां उसे (राकेश पासवान) वापस बाड़मेर चलने को कहा। राकेश के इससे मना करने पर दुर्ग सिंह ने उसे धमकाया। आवेदनकर्ता का ये भी दावा है कि उसकी वजह से ही दुर्ग सिंह के बहुत से मज़दूर काम छोड़कर बिहार वापस आ गए थे। इससे दुर्ग सिंह काफी नाराज था।
राकेश पासवान ने अपने आवेदन में दावा किया है कि 7 मई को दुर्ग सिंह राजपुरोहित चार अन्य लोगों के साथ पटना के दीघा आए। यहां राकेश पासवान को बीच सड़क पर जूते से मारा-पीटा और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की। इतना ही नहीं आवेदन में राकेश पासवान की तरफ़ से ये भी दावा भी किया गया है कि उसे गाड़ी में बैठाकर ज़बरदस्ती ले जाने की भी कोशिश की गई, लेकिन स्थानीय लोगों के बीच-बचाव की वजह से उसकी जान बच पाई। राकेश पासवान के इस आवेदन में सुरेश प्रसाद और संजय सिंह नाम के दो युवकों को इस घटना का चश्मदीद बताया गया है।
इसी आवेदन के आधार पर पटना के स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट ने दुर्ग सिंह की गिरफ़्तारी का आदेश जारी कर दिया। अब दुर्ग सिंह पटना के बेऊर जेल में बंद हैं। दूसरी ओर दुर्ग सिंह की गिरफ़्तारी के बाद से ही एससी/एसटी कानून के दुरुपयोग का दावा करते हुए लोग बुरी तरह आक्रोश जता रहे हैं। दुर्ग सिंह व उनके पिता का भी कहना है कि उन्हें फंसाया गया है। दुर्ग सिंह इससे पहले कभी पटना आया ही नहीं। वे पिछले 18 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं। इसके अलावा उनका दूसरा कोई व्यवसाय नहीं है। दावा तो ये भी किया जा रहा है कि दुर्ग सिंह को उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता की सज़ा मिल रही है।
दुर्ग सिंह की यह है सच्चाई
दुर्ग सिंह अपने फेसबुक एकाउंट पर काफ़ी एक्टिव रहते हैं। वे एक दिन में 5-10 पोस्ट करते रहे हैं। उनकी फेसबुक प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि वे एक निजी चैनल के लिए रिपोर्टिंग करने के अलावा खुद की न्यूज़ वेबसाइट भी चलाते हैं। दुर्ग सिंह की पिछले सात महीने की फेसबुक पोस्टों से पता चलता है कि वे बाड़मेर में हुए एक कथित लव जिहाद की स्टोरी को लगातार फॉलो कर रहे थे। इस मामले में कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले एक मुस्लिम शख़्स ने बाड़मेर की एक हिन्दू लड़की के शादी कर ली थी। लगातार कवर कर रहे इस स्टोरी में वे बार-बार इस बात का ज़िक्र जरूर कर रहे थे कि वो मुस्लिम युवक बाड़मेर में ही एक बीजेपी पार्षद के कैफ़े में काम करता था। इस दौरान ही वो हिन्दू युवती के सम्पर्क में आया। बाद में दोनों ने कश्मीर जाकर शादी कर ली। दुर्ग सिंह इस मामले में बीजेपी पार्षद के साथ ही एक ‘मैडम’ का भी ज़िक्र करते थे, जो दरअसल बीजेपी नेता और विधायक उम्मीदवार रहीं प्रियंका चौधरी हैं। प्रियंका वर्तमान में यूआईटी चेयर पर्सन हैं। दावा किया जा रहा है कि इसी रिपोर्टिंग को लेकर दुर्ग सिंह को फंसाया जा रहा है।
अब बात 7 मई की,जिस दिन राकेश पासवान के दावे के मुताबिक दुर्ग सिंह ने अपने चार साथियों के साथ पटना जाकर राकेश से मारपीट कर जान से मारने की कोशिश की। दुर्ग सिंह की फेसबुक टाइम लाइन पर 7 मई की कई पोस्ट नजर आईं। उन पोस्ट्स से पता चला कि 7 मई को ही बाड़मेर में कथित लव जिहाद के मामले के खिलाफ हिन्दू संगठनों की ओर से बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया था। दुर्ग सिंह ने खुद मौके पर मौजूद रह कर उसे कवर किया था। इसकी पुष्टि उस दिन के वीडियो में दुर्ग सिंह की मौजूदगी से होती है। यह हिन्दू आक्रोश रैली दिन में 11 बज करीब हुई थी। इतना ही नहीं उसी शाम दुर्ग सिंह ने बाड़मेर में ही एक ‘open mike event’ में भी हिस्सा लिया था। इसे ख़ुद अपने फ़ेसबुक से लाइव भी किया था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 7 मई को दुर्ग सिंह सुबह से लेकर रात तक बाड़मेर में ही थे, तो वो उसी दिन पटना में कैसे मौजूद हो सकते हैं।
बाड़मेर से पटना की दूरी क़रीब 1700 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से ये सफ़र तय करने में तकरीबन 28 घंटे लगेंगे। हवाई सफर करें तो भी कम से कम 8 घंटे लगना तय है। ये भी असम्भव है कि दुर्ग सिंह सुबह 11 बजे बाड़मेर में किसी स्टोरी को कवर करके बिहार जाएं। वहां मारपीट कर वापस बाड़मेर लौट सायं 7 बजे अन्य कार्यक्रम में मौजूद रहें।
सिर्फ़ 7 मई ही नहीं बल्कि आवेदन में 28 अप्रैल का भी ज़िक्र किया गया है। जबकि उस दिन भी दुर्ग सिंह ने बाड़मेर एसपी ऑफिस की छत गिरने की स्टोरी कवर की थी। ऐसे में उस दिन भी दुर्ग सिंह का पटना में होने का दावा गलत साबित हो रहा है। दुर्ग सिंह की फ़ेसबुक टाइमलाइन पर एक भी पोस्ट ऐसी नहीं दिखी, जिससे ये लगे कि वो गिट्टी या फिर किसी भी दूसरे तरह का व्यवसाय करते हैं।
पत्रकारों में रोष, एक्ट में बदलाव पर सवाल
दुर्ग सिंह के इस मामले की सच्चाई जैसे-जैसे सामने आती जा रही है बाड़मेर के पत्रकारों की तरह राज्यभर के पत्रकारों में रोष गहराता जा रहा है। एससी/एसटी एक्ट के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट के लागू किए प्रावधान को बदलने के बाद उसके दुरुपयोग का पहला बड़ा मामला सामने आने की बात भी कही जा रही है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों में बिना जांच किए आरोपियों की गिरफ्तारी पर पाबंदी लगा दी थी। मगर सम्बन्धित वर्गों व राजनैतिक दलों के विरोध के चलते केन्द्र सरकार ने इसे बदल दिया।
बिहार के पूर्व राज्यपाल का नाम भी जुड़ा
हाल ही में बिहार से हटाकर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल बनाए गए सतपाल मलिक का नाम भी पत्रकार दुर्ग सिंह के इस मामले में बहुत सामने आया। दरअसल मलिक बिहार के राज्यपाल रहने के दौरान लगातार बाड़मेर आते रहे। वे यहां प्रियंका चौधरी के घर के अलावा कई सामान्य लोगों के घर भी जाते थे। साथ ही यहां छोटे-छोटे कार्यक्रमों में भी शिरकत करते थे। राज्यपाल के इस आचरण को भी दुर्ग सिंह प्रोटोकॉल के खिलाफ बताते हुए अपनी फेसबुक पोस्ट्स में लगातार सवाल उठाते रहे थे। माना जा रहा है कि इससे भी प्रियंका बुरी तरह नाराज थीं। उन्होंने दुर्ग सिंह को इसके चलते बिहार तक खींच लेने की धमकी भी दी बताई। हालांकि इस गिरफ्तारी पर प्रियंका ने अपनी सफाई सफाई देते हुए इसमें उनका कोई हाथ नहीं होने की बात कही है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि राजपुरोहित समाज के लोग चाहें तो वे इस मामले में उनकी मदद तक करने को तैयार हैं।