झड़प, तोड़फोड़ और तनाव, केईडीएल के खिलाफ एकजुट कोटा का बंद सफल

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न्यूज चक्र @ कोटा
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की फ्रेंचाइजी कम्पनी केईडीएल के खिलाफ शुक्रवार को घोषित बंद पूरी तरह सफल रहा। इस दौरान शहर में कई जगह पर तोड़फोड़ की वारदातें भी हुईं। हालात सम्भालने में जुटी पुलिस से बंद समर्थकों की कुछ जगह तनातनी हुई। केईडीएल कम्पनी के कार्यालय के बाहर तक कांग्रेसी कारंयकर्ताओं व पुलिस के बीच झड़प तक हो गई। काफी मुश्किल से हालात सम्भले।
बंद के दौरान महावीर नगर क्षेत्र में एक कचोरी की दुकान पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दुकानदार की पिटाई तक कर डाली। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रविन्द्र त्यागी ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करवाया। केईडीएल कम्पनी के कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। कोटड़ी रोड स्थित इस कॉर्पोरेट ऑफिस पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता प्रदर्शन करने पहुंचे तो मामला बिगड़ गया। इन्होंने सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन करना शुरू किया तो पुलिस ने इन्हें कंट्रोल करने की कोशिश की। इस पर दोनों पक्षों में गर्मा गरमी हो गई। थोड़ी देर में ही यह झड़प में बदल गई। सूचना मिलने पर एएसपी समीर दुबे और आसपास के थानाधिकारी मौके पर पहुंचे। बहुत देर तक चली समझाइश के बाद मामला शांत हो पाया।
कईडीएल के ऑफिस पर प्रदर्शनकारी पहुंचते रहे*
केईडीएल के कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा होते रहे, रह-रहकर विभिन्न संगठनों के लोग विरोध प्रदर्शन करने पहुंचते रहे। शहर के बाजारों में बंद समर्थकों की टोलियां घूम रही। इन्होंने खुली हुई दुकानों को जबरन बंद करवाया। वाहनों पर लाउडस्पीकर लगाकर बंद समर्थक सहयोग की मांग कर रहे थे। एहतियात के तौर पर कोटडी चौराहा गुमानपुरा और शहर के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिस बल, आरएसी व रिजर्व आर्म्ड फोर्स के जवान तैनात किए गए थे।
कुछ अपवादों को छोड़ इस बंद को शहर के हर वर्ग का समर्थन मिला। ऑटो तक बंद रहे। सभी ने एक सुर में बंद का समर्थन किया। हालांकि यह कहना गलत होगा कि इस बंद के आह्वान के पीछे कोई राजनैतिक मकसद नहीं था। विद्युत निगम की फ्रेंचाइजी कम्पनी केईडीएल की मनमानी को सभी भुनाना चाहते थे, अलग-अलग तरीके से, मगर दबे रूप से। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की फ्रेंचाइजी कम्पनी कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (केईडीएल) पर शहरवासियों का आरोप है कि इसके द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटरों से बिजली के बिल काफी अधिक आ रहे हैं।
यह रहा बंद का असर
शहर के 600 से ज्यादा निजी स्कूल बंद रहे। 150 व्यापार संघों से जुड़ी 40 हजार दुकानें नहीं खुलीं।भामाशाह कृषि उपज मंडी भी आधे दिन तक बंद रही। अभिभाषक परिषद ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। ऑटो यूनियन भी समर्थन में रहा। मतलब यह कि कुछ अपवादों को छोड़ दें तो शहर स्वस्फूर्त बंद रहा। बंद के इस आह्वान को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सामंजस्य से चाकचौबंद इंतजाम कर लिए थे।
इस बात से गुस्से में है कोटा
केईडीएल ने शहर में 2 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का निर्णय लिया। इसमें से करीब 60 हजार मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन घरों में ये स्मार्ट मीटर लगाए गए, उनका बिल इसके बाद से बेशुमार बढ़ गया। कम्पनी पर और भी कई मनमानियों के आरोप हैं। बंद समर्थकों की एक अन्य मांग को हालांकि राज्य सरकार ने एक दिन पहले 9 अगस्त को ही मान लिया था। वो मांग थी आवासीय भूखमडों पर बने हुए पांच कमरों या इससे अधिक बड़े हॉस्टलों से भी घरेलू दर पर बिजली बिल वसूलने की।
आवश्यक सेवाओं को रखा गया था बंद से मुक्त
कोटा बंद से आवश्यक सेवाओं को मुक्त रखा गया था, फिर भी सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक पेट्रोल पम्प भी बंद रहे। बंद का आह्वान केईडीएल भगाओ कोटा बचाओ जन आंदोलन, कोटा व्यापार महासंघ व शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने किया था।