35 A पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 27 अगस्त को होगी, जम्मू-कश्मीर में विस्फोटक हालात

वर्ष 1954 में राष्ट्रपति के आदेश से संविधान में जोड़ा गया अनुच्छेद 35 A जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को देता है विशेष अधिकार

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 35 A पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार से शुरू होना प्रस्तावित सुनवाई अब 27 अगस्त को होगी। वहीं इसके विरोध में राज्यभर में भारी विस्फोटक‌ हालात बने हुए हैं। इस मामले में एक और विवाद तब पैदा हो गया जब यूपीएससी टॉपर रहे कश्मीरी शाह फैसल ने ट्वीट कर इस अनुच्छेद का समर्थन जताया।
इस विवादित अनुच्छेद के समर्थन में अलगाववादी संगठनों के घोषित दो दिवसीय बंद का आज दूसरा दिन है। रविवार और सोमवार को यहां बंद का ऐलान किया गया था। इस कारण प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को भी इन दो दिनों के लिए रोक दिया था।
गौरतलब है कि अलगाववादियों के अलावा विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दल भी अनुच्छेद 35A की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की मांग पर अड़े हुए हैं। इन दलों में नेशनल कांफ्रेंस,पीडीपी, माकपा व कांग्रेस शामिल है। वर्ष 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के जरिये संविधान में जोड़ा गया अनुच्छेद 35A जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को विशेष अधिकार देता है। इसके विवादित प्रावधानों के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर की कोई युवती राज्य से बाहर के किसी व्यक्ति से शादी कर ले तो राज्य में उसका 7सम्पत्ति का अधिकार छिन जाता है। यह अनुच्छेद राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने से भी रोकता है।
व्यापारिक संगठनों ने अनुच्छेद 35 A जारी रखने के समर्थन में लाल चौक में घंटाघर (क्लॉक टॉवर) पर प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने बताया कि शहर में जदीबाल, करफाली मोहल्ला, रैनावारी, अंचार, डलगेट, रामबाग, खन्यार और परिमपोरा में भी इसी तरह की रैलियों का आयोजन किया गया था।
बार एसोसिएशन, ट्रांसपोर्टर और व्यापारियों के संगठनों सहित कई अन्य ने सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक सहित जेआरएल के शटडाउन कॉल को समर्थन दिया है। हड़ताल के चलते अमरनाथ यात्रा को भी दो दिन के लिए रोक दिया था।
इस बीच घाटी के कुछ हिस्सों से पत्थरबाजी व गोलीबारी की मामूली घटनाएं भी हुई हैं। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस में सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाने की मांग करते हुए आवेदन किया है। सरकार ने कहा कि वह राज्य में आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए चल रही तैयारियों के मद्देनजर सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाना चाहती है।
इस बीच आरएसएस से जुड़े गैर सरकारी संगठन अनुच्छेद 35 A को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। संगठन की मांग है कि संवैधानिक पीठ द्वारा 35 A से जुड़ी याचिका की सुनवाई हो। सिविल सोसाइटी के जम्मू-कश्मीर चैप्टर के संयोजक चेतन शर्मा ने कहा, ‘सुनवाई फिर से स्थगित करने की कोई जरूरत नहीं है। हम सोमवार को हमारे वकील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट को बताने जा रहे हैं कि अनुच्छेद 35 A पर हमारी याचिका की सुनवाई संवैधानिक पीठ द्वारा की जाए।
यूपीएससी टॉपर रहे कश्मीरी आईएएस का भी अलगाववादियों जैसा रुख
आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने 35 A पर कहा कि इस अनुच्छेद को रद्द करने से देश के बाकी हिस्से से जम्मू-कश्मीर का सम्बंध खत्म हो जाएगा। एक ट्वीट में फैसल ने कहा, ‘मैं अनुच्छेद 35 A की तुलना निकाहनामा से करूंगा। आप इसे खत्म करते हैं तो रिश्ता खत्म हो जाएगा। उसके बाद चर्चा के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।’ उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विलय भारत के संविधान के लागू होने से पहले हुआ था।