रेशमा सुपुर्द-ए-खाक, पाकिस्तान ने खोले गेट, तब सड़क मार्ग से बाड़मेर पहुंचा शव

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बाड़मेर। इस तरफ काली सड़क वाला हिस्सा भारत का, दूसरी ओर सफेद सड़क पाकिस्तान की। उस ओर से लाया गया रेशमा का शव हमारी एम्बुलेंस से भारत पहुंचा।
बाड़मेर। पाकिस्तान से ताबूत में आया‌ रेशमा का शव, साथ में आया पुत्र सायब।
न्यूज चक्र @ बाड़मेर
एक सप्ताह की भारी कशमकश के बाद आखिर मंगलवार को रेशमा का शव पाकिस्तान से बाड़मेर पहुंच गया। इसमें खास बात यह रही कि शव को सड़क मार्ग से भारत लाया गया। इसके लिए पाकिस्तान की सरहद खोखरापार व भारत की सरहद मुनाबाव पर लगे हुए लोहे के विशाल गेट को खोला गया। शाम को शव गांव में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
खोखरापार से शव मुनाबाव पहुंचाया गया। वहां से उसे एम्बुलेंस के जरिये गडरारोड के गांव असागड़ी गांव ले जाया गया। जहां शाम को उसे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गौरतलब है कि गडरारोड तहसील के अगासड़ी गांव की निवासी रेशमा (65) अपने पुत्र सायब के साथ 30 जून को पाकिस्तान के सिंध सूबे के मथुन चनिया गांव में रहने वाली बेटी और बहन से मिलने गई थी। वहां बुखार आ जाने से 25 जुलाई को उसका देहांत हो गया। बाड़मेर में रह रहे परिजनों की इच्छा थी कि किसी भी तरह रेशमा का शव बाड़मेर पहुंच जाए, ताकि उसे यहीं दफनाया जा सके। प्रशासनिक व राजनैतिक स्तर पर इसके लिए प्रयास शुरू हुए।
पहले रेशमा का शव भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस से लाने का प्रयास किया गया। इसके लिए थार एक्सप्रेस को डेढ़ घंटे तक पाकिस्तान में रोक कर रखा गया, लेकिन वीज़ा समाप्ति व अन्य औपचारिक कार्यवाही पूरी नहीं हो पाने की वजह से शव ट्रेन से भारत नहीं लाया जा सका। हताश हो उसके परिजनों ने जिला कलक्टर के माध्यम से शव भारत लाने के प्रयास शुरू किए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक‌ यह जानकारी पहुंची तो उनके हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग हरकत में आया। इससे पहली बार सड़क मार्ग से शव भारत ले जाने की विशेष अनुमति दी गई। 28 जुलाई को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने रेशमा का शव सड़क मार्ग से भारत भेजने का आदेश जारी किया। पाकिस्तानी रेंजर्स के नाम जारी आदेश में रेशमा के शव के साथ उसके पुत्र सायब खान को भी भारत भेजे जाने अनुमति प्रदान की गई।
इसके बाद जिले की मुनाबाव सीमा पर पाकिस्तान रेंजर्स ने रेशमा के शव सहित उसके बेटे सायब को भी बीएसएफ को सौंपा। वहां से एम्बुलेंस में उन्हें अपने गांव रवाना किया गया।
दूसरी बार खोले गए सड़क मार्ग के द्वार
देश के बटवारे के बाद मुनाबाव सीमा पर सड़क मार्ग से दूसरी बार रेशमा के शव व उसके पुत्र की वतन वापसी के लिए आवागमन हुआ। इससे पहले तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता मंदिर दर्शन के लिए गए थे।
प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
रेशमा के पार्थिव देह को विशेष अनुमति के जरिये सड़क मार्ग से अपने वतन भारत लाए जाने के समय मुनाबाव में एसडीएम चन्द्रभान सिंह भाटी, गडरारोड तहसीलदार पुरखाराम, रामसर एसएचओ विक्रम सांदू, जीआरपी व आरपीएफ अधिकारी मेडिकल टीम के साथ मौजूद रहे।