असम में रह रहे 40 लाख लोग भारतीय नागरिक नहीं, बीजेपी विधायक, पूर्व सैन्य व पुलिस अधिकारी भी शामिल

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क
असम में एनआरसी ने सोमवार सुबह 10 बजे अपनी फाइनल लिस्ट जारी कर दी। इसमें 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता नहीं माना गया है। इस प्रकार बाकी 2 करोड़ 89 लाख लोगों राज्य में भारतीय नगरिक माने गए हैं। एनआरसी के स्टेट को-आर्डिनेटर प्रतीत हजेला ने यह जानकारी दी। इसके सामने आते ही राजनीति बुरी तरह गर्मा गई। ममता बनर्जी, लेफ्ट सहित अन्य विपक्षी पार्टियां सरकार पर आग बबूला हो गईं। हालात बिगड़ने की आशंका के मद्दनजर एक ओर जहां राज्य सरकार अलर्ट मोड पर है तो केन्द्र सरकार ने भी असम व अासपास के राज्यों में तैनात करने कए लिए अर्ध सैनिक बलों की 220 कम्पनियां रवाना कर दी हैं।
असम में वैध नागरिकों की पहचान के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) ने यह दूसरा ड्राफ्ट जारी किया है। इसे लेकर राज्य में पहले से ही अल्पसंख्यकों में भय और असमंजस का माहौल था। वहीं, असम की सीमा से लगे चार राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मणिपुर) ने घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। तीन साल से एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी थी। पहले इसका प्रकाशन 30 जून को होना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए इसकी समय सीमा एक महीने बढ़ा दी थी। एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हलेजा ने बताया कि मसौदा राज्य के सभी एनआरसी सेवा केन्द्रों पर प्रकाशित कर दिया गया है। आवेदक सूची में अपना नाम, पता और फोटो देख सकते हैं। साथ ही एक टोल फ्री नम्बर भी जारी किया है। इस पर फोन करके भी पता लगाया जा सकता है कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिली है या नहीं।
वहीं केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भरोसा दिया है कि वैध रूप से भारत में आने वाले लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्हें विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी नागरिकता साबित करने का मौका मिलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री ने साफ किया कि 30 जुलाई को महज मसौदा प्रकाशित हुआ है। दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम एनआरसी का प्रकाशन होगा। इस आश्वासन के बावजूद अल्पसंख्यकों का भय खत्म नहीं हो रहा है।
यह भी है खास
एनआरसी के इस फाइनल ड्राफ्ट में बीजेपी विधायक रमाकांत देउरी और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी गायब हैं। रमाकांत का कहना है कि इस लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने के लिए वह आगे भी कोई आवेदन नहीं करेंगे। एनआरसी के इस ड्राफ्ट में सेना के पूर्व अधिकारी अजमल हक, मुख्यमंत्री के सुरक्षा दस्ते में रह चुके सहायक पुलिस निरिक्षक (ASI) शाह आलम का नाम भी नदारद है।
हालात नियंत्रण में रखने के लिए तगड़े बंदोबस्त
असम में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। केन्द्र सरकार ने भी असम और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की 220 कम्पनियां भेजी हैं। घुसपैठ रोकने के लिए सीमाओं पर केन्द्रीय बलों के अलावा इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) की अतिरिक्त टुकड़ियां भी तैनात की जा रही हैं।
क्या है एनआरसी ?
नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में जिनके नाम नहीं होंगे उन्हें अवैध नागरिक माना जाएगा। इसमें उन भारतीय नागरिकों के नामों को शामिल किया जा रहे हैं, जो 25 मार्च 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं। उसके बाद राज्य में पहुंचने वालों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा।
मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध
कई राजनीतिक दल और मुस्लिम संगठन एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार अल्पसंख्यकों को बाहर निकालने के लिए इसका सहारा ले रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसकी निगरानी में एनआरसी को अपडेट किया जा रहा है। इससे पहले 31 दिसम्बर 2017 को जारी पहली सूची में 3.29 करोड़ आवेदकों में से मात्र 1.9 करोड़ लोगों के ही नाम शामिल थे, अर्थात 2.20 करोड़ लोगों को भारतीय नागरिक नहीं माना था।‌ वहीं इस बार 3 करोड़ 29 लाख 91 हजार 384 आवेदकों में से 40 हजार 7 हजार 707 लोगों को ही अवैध माना गया है।
नगालैंड भी एनआरसी अपडेट करने का कर रहा विचार
असम के बाद अब एक अन्य पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड भी एनआरसी को अपडेट करने पर विचार कर रहा है। इसके पहले वह असम में चल रही पूरी प्रक्रिया का अवलोकन कर लेना चाहता है। दूसरी ओर, नगा छात्र संघ (एनएसएफ) ने भी 31 जुलाई से बाहरी लोगों के कागजात की जांच का ऐलान किया है।
मेघालय ने बढ़ाई निगरानी
मेघालय ने भी असम से लगी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। खासी छात्र संघ (केएसयू) ने राज्य की साझा सरकार को प्रभावी घुसपैठ रोधी कदम उठाने को कहा है। केएसयू का कहना है कि वर्ष 1971 के बाद असम में बांग्लादेशियों की घुसपैठ के कारण असमिया, बोड़ो और राभा जैसी जनजातियां अपने घर में ही बेगानी हो गई हैं।
मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा की अगुवाई वाली सरकारों ने असम से अवैध नागरिक करार दिए जाने वालों की घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। मणिपुर ने असम की बराक घाटी से लगे जिरीबाम इलाके में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की हैं। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी सीमा पर आवाजाही करने वालों की कड़ी जांच करने के निर्देश दिए हैं।