इंतजार कीजिए, कल संसद में भूकम्प आने वाला है: राजनाथ सिंह

0
220

न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/ सेन्ट्रल डेस्क
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कल संसद में 15 मिनट बोलेंगे। दरअसल, शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी के भाषण देने की सम्भावना है। इस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा- डर लग रहा है कि कल भूकम्प आएगा। राहुल बोल रहे थे कि 15 मिनट बोलूंगा तो देश में भूकम्प आ जाएगा। प्रतीक्षा कीजिए भूकम्प की।
दूसरी ओर, राहुल कल संसद में क्या बोलेंगे, इसका संकेत कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दे दिया। सुरजेवाला ने कहा कि कल राहुल गांधी संसद में जनता की पीड़ा बताएंगे। सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी कि वो राहुल का बयान शांति से सुनें, और फिर जवाब दें।
क्या था राहुल के भूकम्प वाला बयान
दरअसल, ये वाकया 9 दिसम्बर 2016 का है। लोकसभा में नोटबंदी पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण काम नहीं हो पा रहा था। उस दिन भी सदन में ऐसे ही हालात रहने से कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद संसद परिसर में ही पत्रकारों से बात करते हुए वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष व तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बरसते हुए कहा था कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। फिर वे आगे बोले थे कि ‘मैं नोटबंदी पर सदन में बोलना चाहता हूं, लेकिन मुझे रोका जा रहा है। बहस से ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री लोकसभा में आने से डर रहे हैं। वे चर्चा से घबरा रहे हैं। मैं बोलूंगा तो भूकम्प आ जाएगा और प्रधानमंत्री सदन में बैठ तक नहीं पाएंगे।’ उनका यह बयान उस समय तो सुर्खियों में रहा‌ ही था,‌ आज तक भी जब-तब उस‌‌ पर भाजपाई चुटकी लेते नजर‌ आ जाते हैं।
राहुल की उस चुनौती के जवाब में पीएम मोदी ने कहा था कि राहुल बिना कागज के 15 मिनट बोलकर दिखाएं। पीएम ने कर्नाटक के चामराजनगर क्षेत्र की रैली में यह बात कही थी। अपने भाषण में मोदी ने कहा था, “कांग्रेस अध्यक्ष जी ने हाल ही में मुझे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर मैं संसद में 15 मिनट बोलूंगा तो मोदी जी बैठ भी नहीं पाएंगे। वे 15 मिनट बोलेंगे, ये भी बहुत बड़ी बात है,लऔर मैं बैठ भी नहीं पाऊंगा। ये सुनकर मुझे याद आता है कि वाह क्या सीन है। कांग्रेस के श्रीमान अध्यक्ष जी आप ने सही फरमाया है। हम आपके सामने नहीं बैठ सकते, आप तो नामदार हैं और हम कामदारों की क्या हैसियत कि हम आपके सामने बैठ पाएं। हम तो अच्छे कपड़े भी नहीं पहन सकते, आपके सामने बैठने का हक़ हमें कहां से हो सकता है।”