बहुचर्चित दारा सिंह एनकाउंटर केस में सुप्रीम फैसला, मंत्री राठौड़ बरी

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न्यूज चक्र @ जयपुर/सेन्ट्रल डेस्क
राजस्थान के बहुचर्चित दारा सिंह उर्फ दारिया फर्जी एनकाउंटर केस में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ को बरी कर दिया। प्रदेश की राजनीति और पुलिस में भूचाल ला देने वाले इस प्रकरण में दो माह पूर्व 13 मार्च को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जयपुर रमेश जोशी ने अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
घटनाक्रम के अनुसार एसओजी ने करीब साढ़े ग्यारह साल पूर्व 23 अक्टूबर, 2006 को जयपुर के मानसरोवर इलाके के कमला नेहरू नगर में दारा सिंह का एनकाउंटर किया था। मगर उसकी पत्नी सुशीला देवी ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए हत्या करार दिया था। उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस पर 23 अप्रैल 2010 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मामले में मंत्री राजेन्द्र राठौड़ व तत्कालीन एडीजी एके जैन सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की। इसके आधार पर वर्ष 2011 में आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन और ए.पोनूच्चामी सहित 14 पुलिसवालों को गिरफ्तार किया गया। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने 194 गवाह व 705 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया।
एडीजे-14 कोर्ट ने इन्हे किया था बरी
ए.पोनूच्चामी, अरशद अली, नरेश शर्मा, सुभाष गोदारा, राजेश चौधरी, सत्यनारायण गोदारा, जुल्फिकार, अरविंद भारद्वाज, सुरेन्द्र सिंह, निसार खान, सरदार सिंह, बद्रीप्रसाद, जगराम व मुंशीलाल।
राठौड़ 51 दिन रहे थे जेल में
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ के इशारे पर ही दारासिंह को फर्जी मुठभेड़ में मरवाने का आरोप लगाया था। इस पर अप्रैल 2012 में सीबीआई ने राठौड़ को भी गिरफ्तार कर लिया। मगर वे 51 दिन जेल में रहने के बाद अदालत से आरोप मुक्त हो कर रिहा हो गए थे। फरवरी 2015 में एडीजी एके जैन को भी हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया। वहीं फरारी के दौरान ही एक आरोपी विजय चौधरी की मौत हो गई थी।
हाईकोर्ट ने फिर राठौड़ को सरेंडर करने के आदेश दिए
जिला कोर्ट की ओर से राजेन्द्र राठौड़ को आरोप मुक्त करने के बाद सीबीआई और सुशीला देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ याचिका लगाई‌। इस याचिका के बाद हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द कर कोर्ट को उनके खिलाफ ट्रायल करने को कहा। साथ ही हाईकोर्ट ने राठौड़ को सरेंडर करने के निर्देश भी दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सरेंडर करने के बाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जो अभी तक जारी थी। साथ ही उनकी अपील भी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित चल रही थी। इस पर‌ आज फैसला आया।