गैंगरेप का आरोपी बीजेपी विधायक सेंगर ब्रह्म मुहूर्त में गिरफ्तार

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क/लखनऊ
बहुचर्चित उन्नाव गैंगरेप मामले में सीबीआई की टीम ने आरोपी बीजेपी विधायक  कुलदीप सिंह सेंगर को आज तड़के करीब साढ़े चार बजे गिरफ्तार कर लिया। बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद सेंगर की गिरफ्तारी उनके इंदिरा नगर स्थित घर से हुई। गिरफ्तारी के बाद भी सेंगर अपनी अकड़ दिखाने से बाज नहीं आए। मीडिया के सामने कहा कि वो खुद सीबीआई के अधिकारियों से मिलने आया है।
उल्लेखनीय है कि सेंगर के खिलाफ गुरुवार रात 12 बजे एफआईआर दर्ज की थी। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट में भी मामला दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया था। गिरफ्तारी के बाद सेंगर को फिलहाल सीबीआई के लखनऊ मुख्यालय में रखा गया है।
आज इलाहबाद हाईकोर्ट सुनाएगी फैसला
बुधवार को पीड़ित लड़की की शिकायत पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। गुरुवार को इस पूरे मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार को एक घंटे में यह जवाब देने के निर्देश दिए कि वह विधायक को गिरफ्तार करेंगे या नहीं? इस पर यूपी सरकार ने जवाब में कहा कि हमारे पास विधायक के खिलाफ सबूत नहीं हैं‌। साथ ही मामला सीबीआई को सौंपा जा रहा है, इसलिए आगे की कार्रवाई वही करेगी‌। पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने शुक्रवार यानी आज दोपहर दो बजे फैसला सुनाने की बात कही थी। इसलिए यह भी माना जा सकता है कि कोर्ट के सम्भावित फैसले से होने वाली किरकिरी से बचने के लिए भी आनन-फानन में सेंगर की गिरफ्तारी की गई। हालांकि इस मामले में योगी सरकार की ढिलाई से उस पर बड़ा दाग लग गया है।
विधायक पर इन संगीन धाराओं में है केस दर्ज
पीड़िता की मां की तहरीर पर उन्नाव के माखी थाने में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। विधायक के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366, 376 ,506 और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया गया है। गुरुवार को यूपी के डीजीपी ने भी कहा था कि मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है, इसलिए गिरफ्तारी पर फैसला सीबीआई ही लेगी‌।
यह है पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की एक नाबालिग लड़की ने बांगरमऊ विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया है। घटना पिछले साल 4 जून की बताई है। आरोप लगाने वाली लड़की ने सीएम योगी के घर के बाहर आत्मदाह की कोशिश की थी। इसी महीने की तीन तारीख को पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थियों में मौत भी हो गई। पीड़िता ने विधायक कुलदीर सेंगर पर जेल में हत्या कराने का आरोप लगाया है।
कौन हैं कुलदीप सिंह सेंगर?
अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में सेंगर कांग्रेसी थे। 2002 के चुनावों से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और कांग्रेस के प्रत्याशी को बड़े अंतर से हरा दिया। 2007 आते-आते उनकी छवि बाहुबली की बन गई थी। पार्टी की इमेज की खातिर माया ने उन्हें साइड लाइन कर दिया तो उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।
2007 में एक बार फिर वह विधायक बन गए। 2012 में भी सपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता और 2017 में बीजेपी के टिकट पर वह विधायक बन गए। यानी 2002 से वो लगातार विधायक हैं और अपने राजनीतिक करियर में यूपी की सभी अहम पार्टियों में रहे हैं। 2002 से 2017 के बीच वो बीएसपी, एसपी से विधायक रहे और अब बीजेपी से विधायक हैं।
चुनावों का हिसाब किताब रखने वाली वेबसाइट myneta.info के मुताबिक 2007 के हलफनामे में उनकी संपत्ति 36,23,144 थी जो 2012 में बढ़ कर 1,27,26,000 हो गई। 2017 में यह आंकडा 2,90,44,307 हो गया। 12वीं पास सेंगर पर एक आपराधिक मामला पहले से दर्ज भी है।
यह है केस का पूरा घटनाक्रम
11 जून 2017: पीड़िता गांव के युवक शुभम के साथ गायब हुई, परिवारवालों ने आरोपी शुभम, अवधेश पर केस किया।
21 जून 2017: पीड़िता पुलिस को मिली।
22 जून 2017: पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया, तीन लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। विधायक समर्थक बताए जा रहे तीनों युवकों की गिरफ्तारी हुई।
1 जुलाई 2017: मामले में चार्जशीट दायर हुई।
22 जुलाई 2017: पीड़िता ने पीएम-सीएम को चिट्ठी लिखी, विधायक कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया।
30 अक्टूबर 2017: विधायक समर्थकों ने पीड़िता के परिवार पर मानहानि का केस किया, पीड़िता के घरवालों पर विधायक को रावण बताने वाला पोस्टर लगाने का आरोप।
11 नवम्बर 2017: पीड़िता के चाचा पर भी मानहानि का केस।
22 फरवरी 2018: उन्नाव जिला अदालत में अर्जी दी, इसमें विधायक पर रेप का आरोप लगाया। आरोपी शुभम की मां पर नौकरी के बहाने विधायक के घर ले जाने का आरोप लगाया।
3 अप्रैल 2018: कोर्ट से लौटते वक्त पीड़िता के परिवार पर हमले का आरोप। विधायक के भाई पर बदमाशों के साथ मिलकर पीटने का आरोप लगा। पुलिस ने आरोपियों की जगह पीड़िता के पिता पर आर्म्स एक्ट में केस दर्ज किया।
4 अप्रैल 2018: डीएम से शिकायत हुई, विधायक समर्थकों पर केस दर्ज हुआ। पुलिस ने विधायक के भाई पर कोई केस नहीं किया।
4 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता को जेल भेज दिया गया।
9 अप्रैल 2018: सुबह पीड़िता के पिता की मौत हो गई। पुलिस ने तब चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया। विधायक के भाई का नाम आने पर उसकी भी गिरफ्तारी हुई।
10 अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता के पोस्टमार्टम के बाद हत्या की धारा जोड़ी गई। लापरवाही बरतने के आरोप में थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसवाले निलम्बित किए गए। जांच के लिए एसआईटी का गठित की गई।
11 अप्रैल 2018: एसआईटी मामले की जांच करने पीड़िता के परिवार को लेकर उसके गांव पहुंची और पूछताछ की। हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया।
12 अप्रैल 2018: हाईकोर्ट ने पूरे मामले को सुना, सरकार ने कहा कि विधायक के खिलाफ सबूत नहीं, इसलिए गिरफ्तार नहीं कर सकते। केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है, इसलिए गिरफ्तारी पर फैसला सीबीआई लेगी। हाईकोर्ट ने अगले दिन के लिए फैसला सुरक्षित रखा।
13 अप्रैल 2018: सुबह 4.30 बजे विधायक को पुश्तैनी घर से सीबीआई ने गिरफ्तार किया।