फिल्म रिपोर्टः ‘बाहुुबली’ गाथा है पहाड़ों को काट जलधारा बहा देने वाले राजस्थानी भगीरथी की

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न्यूज चक्र @ जयपुर
राजस्थान में भी ‘बाहुबली’ नाम से फिल्म बन रही है। यह उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल भोमट क्षेत्र के ओंगना झाड़ोल गांव के एक संत के जीवट और जिद को अंजाम तक पहुंचाने की गाथा पर आधारित है। ये संत अपनी पत्नी की परेशानी से इतने व्यथित हुए कि उनके मार्ग में आने वाले पहाड़ को काट जलधारा को अपनी ओर मोड़ दिया। अब बारहों महीने बहती यह जलधारा क्षेत्रवासियों की प्यास बुझाने का मुख्य माध्यम बनी हुई है।
बताया जाता है कि ओंगना झाड़ोल में एक संत रहते थे। उनकी पत्नी सहित अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी पानी लाने के लिए ऊंचा पहाड़ चढ़ कर दूसरी ओर जाना पड़ता था। जब संत की पत्नी गर्भवती हुईं तो उन्हें पहाड़ पार कर पानी लाने में भारी परेशानी होने लगी। एक दिन यह देख वे बुरी तरह व्यथित हो गए। संत ने उसी समय पानी के बीच में आ रही बड़ी बाधा उस पहाड़ के हिस्से को ही काटने का निर्णय ले लिया। उस समय तक पहाड़ की स्थिति इस प्रकार थी कि वहां का पानी गुजरात की ओर बह जाता था। संत ने गुजरात की ओर बह कर जाने वाली उस जलधारा को अपने क्षेत्र की ओर मोड़ने का दढ़ निश्चय कर लिया। वे उसी दिन से पहाड़ को काटने में लग गए। रात-दिन उस काम में तब तक लगे रहे, जब तक उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लिया।
तीतरी प्रॉडक्शन के बैनर तले बन रही राजस्थान की इस बाहुबली में मुख्य किरदार मंझे हुए कलाकार अमिताभ तिवारी निभा रहे हैं। उनके अलावा अन्य प्रमुख भूमिकाओं में पा़रूल, शिवराज गुर्जर, नमिता आदि हैं। फिल्म के निदेशक विपिन तिवारी ने न्यूज चक्र को खास मुलाकात में बताया कि उस क्षे़त्र की तलहटी में रामकुंडा शिव मंदिर भी है। ये पर्वत शृंखलाएं प्राकृतिक सौंदर्य के खजाने से भरपूर हैं। बारिश के मौसम में तो ये स्विट्जरलैंड जैसी अनुभूति देती हैं। विहंगम पहाड़ी क्षेत्र होने के बावजूूद इसी सौंदर्य का आकर्षण यहां विदेशी सैलानियों तक को खींच लाता है। संत ने गुजरात की ओर जा रही जलधारा को अपने क्षेत्र में मोड़ने के लिए वर्षों तक मेहनत की थी। अब उसका पानी खेतों में सिंचाई के काम भी आ रहा है। इसके लिए पहाड़ों पर उगे हुए नारियल के पेड़ों को काट कर देसी तरीके से ऊंचाई पर पानी चढ़ा नीचे तलहटी के खेतों में सिंचाई की जाती है। तिवारी कहते हैं कि आधुनिक युग में भी पूर्वजों द्वारा स्थापित परम्पराओं में बंधे आदिवासियों की जीवन शैली पर शोध के बाद फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। क्षेत्र में 10 मार्च से शूटिंग का पहला शेड्यूल शुरू हुआ था, वह अब समाप्त हो चुका है। इसका दूसरा शेड्यूल बारिश के दौरान अगस्त-सितम्बर महीने में प्रारम्भ होगा। उस समय यह क्षेत्र कुदरत की अपूर्व मेहरबानी से सराबोर हो रहता है। फिल्म मूें भील राणा पूंजा के पैनोरमा व राजस्थानी कलाकारों के साथ बॉलीवुड कलाकारों का संगम भी देखने को मिलेगा।