राजनीति में भूचाल लाने वाले दारासिंह एनकाउंटर केस में आया बड़ा फैसला

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न्यूज चक्र @ जयपुर
राज्य के बहुचर्चित दारा सिंह उर्फ दारिया फर्जी एनकाउंटर केस में मंगलवार को एडीजे-14 कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। प्रदेश की राजनीति और पुलिस में भूचाल लाने वाले इस मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश जोशी ने फैसला सुनाते हुए सभी 14 आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें एक आईपीएस सहित 13 अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। इस मामले में 15 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा भाजपा नेता एवं मंत्री राजेन्द्र राठौड़ सहित 16 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था।  इससे पहले 23 फरवरी को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।
गौरतलब है कि एसओजी ने 23 अक्टूबर, 2006 को जयपुर में दारासिंह का एनकाउंटर किया था। दारासिंह की पत्नी सुशीला देवी ने इसे फर्जी बताते हुए हत्या करार दिया था। सुशीला देवी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। इस पर 23 अप्रैल 2010 को सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की‌।
करीब साढ़े 11 साल 7 महीने पहले मानसरोवर के कमला नेहरू नगर में दारा सिंह एनकाउंटर हुआ था। मामले में मंत्री एवं प्रमुख भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़, तत्कालीन एडीजी एके जैन सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद सीबीआई ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश की। इस मामले में 2011 में आईपीसी अधिकारी अरविंद कुमार जैन व ए.पोनूच्चामी सहित 14 पुलिसवालों को गिरफ्तार किया। पूरे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने 194 गवाह, 705 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया।
इन सभी आरोपियों को किया बरी
एडीजी ए.पोनूच्चामी, एडिशनल एसपी अरशद अली, इंस्पेक्टर राजेश चौधरी, सुभाष गोदारा, निसार खान, नरेश शर्मा, सत्यनारायण गोदारा, सब इंस्पेक्टर जुल्फिकार, अरविंद भारद्वाज व सुरेन्द्र सिंह सहित पुलिसकर्मी सरदार सिंह, बद्रीप्रसाद, जगराम व मुंशीलाल शामिल हैं।
राजेन्द्र राठौड़ 51 दिन रहे थे जेल
सीबीआई ने जांच के बाद भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ के कहने पर दारासिंह को फर्जी मुठभेड़ में मरवाने का आरोप लगाया था। इसके बाद अप्रैल 2012 में सीबीआई ने राजेन्द्र राठौड़ को भी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन करीब 51 दिन जेल में रहने के बाद अदालत ने उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। फरवरी 2015 में एडीजी एके जैन को भी हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त किया। वहीं फरारी के दौरान एक आरोपी विजय चौधरी की मौत हो गई थी।
हाईकोर्ट ने फिर राठौड़ को सरेंडर करने के आदेश दिए
जिला कोर्ट की ओर से राजेन्द्र राठौड़ को आरोप मुक्त करने के बाद सीबीआई और सुशीला देवी ने राजस्थान हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ याचिका लगाई। इस याचिका के बाद हाईकोर्ट ने आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द कर दिया था और ट्रायल कोर्ट को उनके खिलाफ आरोप लगाकर ट्रायल करने तथा राठौड़ को सरेंडर करने के निर्देश दिए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
सरेंडर के करने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राजेन्द्र राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 2012 से ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा रखी है और यह अपील सुप्रीम कोर्ट में लम्बित चल रही है।
कांग्रेस ने इस प्रकरण को भाजपा के खिलाफ बड़ा हथियार बना रखा था। वहीं भाजपा कहती आ रही थी कि सीबीआई कांग्रेस सरकार (तत्कालीन) के दबाव में काम कर रही थी। जज ने भी अपने फैसले में साफ कहा है कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाई, जिससे अपराध प्रमाणित होता हो। इस प्रकार यह फैसला भाजपा को बड़ी राहत देने वाला भी है।