झुंझुनू में पीएम मोदी देंगे इन जिलों को राष्ट्रीय सम्मान, ‘बेटी बचाओ’ अभियान के लिए हुआ चयन

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पीएम नरेन्द्र मोदी (फाइल फोटो)

न्यूज चक्र @ सीकर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 मार्च को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के लिए सीकर और झुंझुनू जिलों को राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित करेंगे। इन दोनों जिलों के जिला कलेक्टर को यह सम्मान झुंझुनू में होने वाले समारोह में दिया जाएगा।
सीकर जिला कलक्टर नरेश ठकराल ने बताया कि ‘‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’’ अभियान में लगे सभी लोगों की मेहनत का ही फल है कि सीकर जिले ने इस अभियान के तहत यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
लिंगानुपात की स्थिति बेहद खराब थी
गौरतलब है कि इस अभियान के शुरू होने के पहले सीकर जिले में लिंगानुपात की स्थिति बेहद खराब थी। यहां वर्ष 2011 में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या गिर कर मात्र 848 रह गई थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस अभियान की शुरुआत किए जाने के बाद सीकर जिला प्रशासन ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के तहत जिले में कई नवाचारों के जरिये इस अभियान को शुरू किया। इससे जिले के लिंगानुपात की स्थिति में सुधार हो पाया और 2018 में लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों पर 930 के लगभग हो गया।
17 राज्यों में लिंग अनुपात का आंकड़ा गिरा
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 17 राज्यों में लिंग अनुपात का आंकड़ा गिरा है। लिंग अनुपात में सबसे ज्यादा गिरावट गुजरात में हुई है। गुजरात में 53 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। गुजरात में 1000 लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 854 है। पहले यह संख्या 907 थी। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक  हरियाणा में 35, महाराष्ट्र में 18, हिमाचल प्रदेश में 14, छत्तीसगढ़ में 12, राजस्थान में 32, उत्तराखंड में 27 और कर्नाटक में 11 अंकों की गिरावट हुई है।
पंजाब में लिंग अनुपात 19 अंकों से बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में लिंग अनुपात में सबसे ज्यादा 19 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में 10 और बिहार में 9 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीपीएनडीटी एक्ट, 1994 को गम्भीरता से लागू करने के जरूरत है। सरकार को कन्या भ्रूण हत्या और लड़कियों के महत्व को लेकर कैम्पेन करने की जरूरत है, जिससे लिंग अनुपात में सुधार हो सके।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को धक्का
नीति आयोग की इस रिपोर्ट से पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को गहरा धक्का पहुंचा है। लिंग अनुपात पर अगर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो आने वाले समय में इसके गम्भीर परिणाम हो सकते हैं। इस रिपोर्ट को लेकर समाज शास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक परिस्थितियों के चलते ग्रामीण इलाके में भी अब एक बच्चे पर जोर दिया जाने लगा है, अगर पहली संतान बेटा हो। ऐसे में घटते लिंग अनुपात पर नियंत्रण रखने के लिए गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम की जरूरत
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि घट रहे लिंग अनुपात से साफ पता चलता है कि कड़े कानून के बावजूद कन्या भ्रूण हत्या लगातार बढ़ती जा रही है। बता दें कि हरियाणा में गर्भपात कराने के मामले में 50 से ज्यादा डॉक्टर सलाखों के पीछे हैं। गुजरात में भी ऐसे दर्जनों मामले दर्ज हैं, लेकिन किसी भी डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।