सरकार को किसानों से ज्यादा उद्योगपतियों की चिंता- अन्ना हजारे

 चार मुद्दे: बुजुर्ग किसानों को 5 हजार रुपए पेंशन देने, बून्द-बून्द सिंचाई पर 18 फीसदी जीएसटी वापस लेने, व्यक्तिगत बीमा लागू करने व किसान मूल्य आयोग को स्वायत्त बनाने की मांग

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न्यूज चक्र @ कोटा
प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि पिछले 22 वर्षों में देश में 12 लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं। फिर भी सरकारें चुप रहीं। इजराइल में जमीन उपजाऊ नहीं, सिंचाई का पानी कम है, फिर भी वे एग्रीकल्चर में हमसे आगे हैं। उनसे सीख लेकर सरकार कृषि नीति में चार बातों पर सुधार करे। आज भी किसान को पैदावार पर खर्च आधारित दाम नहीं मिल रहे हैं, इससे किसान चिंतित हैं।
स्थानीय प्रेस क्लब में शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अन्ना हजारे ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में कृषि मूल्य आयोग है। वहां की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी सभी जिंसों के कृषि मूल्य निकालकर सरकार को भेज देती हैं,लेकिन कृषि आयोग में किसानों की भागीदारी नहीं होने से आज दाम 50 प्रतिशत तक गिर गए। इसलिए पहले तो राज्यों में कृषि मूल्य आयोग को स्वायत्तता दी जानी चाहिए। किसान प्रतिनिधियों को उसमें शामिल किया जाए। इसके बाद किसानों को फसलों के निर्धारित दाम नहीं मिलने पर सरकार उनकी भरपाई करे।
दूसरा, किसानों का सामूहिक बीमा किया जाता है, जबकि बाढ़, भूकम्प या आपदा आने पर किसानों को व्यक्तिगत बीमा का लाभ दिया जाए, ताकि वह फिर से खड़ा हो सके। तीसरा, सरकार ने बून्द-बून्द सिंचाई सिस्टम पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू कर किसानों की नींद उड़ा दी। सिंचाई की नई तकनीक अपनाने पर कर को बोझ क्यों थोपा गया, इसे तत्काल हटाया जाए। सरकार ने नीति आयोग तो बना दिया, लेकिन सही नीति स्पष्ट नहीं की।
चौथा, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसान, जिनके परिवार की कोई आय न हो, बच्चों की सर्विस न हो, उन्हें 5 हजार रुपए पेंशन दी जाए। प्रेस क्लब अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास, सचिव जितेन्द्र शर्मा सहित अन्य प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने अन्ना को मानपत्र भेंट कर सम्मानित किया। संचालन प्रतापसिंह तोमर ने किया।
भ्रष्टाचार विरोधी जनअभियान समिति के विजय पालीवाल ने बताया कि इससे पहले सुबह सीएडी सर्किल पर अन्ना चौक पर अन्ना हजारे का भव्य स्वागत किया गया। बाद में वह एलन कॅरिअर इंस्टीट्यूट गए। वहां उन्होंने स्टूडेंट्स को सम्बोधित करते हुए कहा कि यहां युवा भारत दिखता है। मुझे देश बदलना है, यह सोचकर हर कार्य करो। जो वोट लेकर भी कोई सुधार नहीं कर रहे उनको उखाड़ फेंको। दोपहर में उन्होंने किसानों को सम्बोधित किया।
एक सत्र में 40 विधेयकों में संशोधन कर दिए
अन्ना ने कहा कि सरकार किसानों की चिंता दूर करने की बजाय उद्योगपतियों के हित साधने में जुटी है। मोदी सरकार ने संसद के एक सत्र में 40 विधेयकों में चौंकाने वाले संशोधन कर दिए। एक विधेयक में प्रावधान था कि कम्पनियां अपनी आय से 7.5 प्रतिशत धन किसी राजनीतिक दल को दान कर सकती थी, उसमें संशोधन कर दिया कि कम्पनियां कितना भी धन पार्टियों को दान में दे सकती हैं। पिछले 5 माह में बड़ी कम्पनियों ने राजनीतिक दलों को 90 हजार करोड़ रुपए की राशि का दान दिया।
लोकपाल कानून की धाराओं को कमजोर किया
अन्ना ने कहा कि लोकपाल कानून की मांग को लेकर 2011 में हुए जनआंदोलन से देश खड़ा हुआ। उसमें तीन मुख्य प्रावधान थे, क्लास-1,2 व 3 के अफसर लोकपाल के दायरे में हों, प्रत्येक राज्य में लोकायुक्त हों और तीसरा, संशोधन के लिए उसमें जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। मनमोहन सिंह सरकार ने धारा-63 में संशोधन कर तीनों मुद्दों को पारित कर दिया। अभी राज्यों में जो लोकायुक्त हैं, वे लोकपाल कानून के अनुसार प्रभावी नहीं हैं। फिर मोदी सरकार ने संसद में एक बिल पारित किया, जिसके अनुसार, अधिकारी, उनकी पत्नी व बच्चों के नाम जो सम्पत्ति है, उसे 31 मार्च तक घोषित कर दें। इससे सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने की बजाय उसे खुला करने का रास्ता खोल दिया। एक अच्छे कानून को संशोधित कर उसे कमजोर कर दिया। 27 से 29 जुलाई,17 तक सरकार ने संसद में बिना कोई चर्चा किए मात्र तीन दिन में एक कानून बना दिया। नीति और नीयत में फर्क होने से इन दिनों नए घोटाले सामने आ रहे हैं। वित्त विधेयकों में संशोधनों पर सदन में चर्चा क्यों नहीं कराई जाती। ये हुकुमशाही लोकतंत्र के लिए खतरा है।
‘करेंगे या मरेंगे’ अनशन 23 मार्च को
एक सवाल के जवाब में अन्ना ने कहा कि मैंने कांग्रेस सरकार को 82 पत्र भेजे, जवाब न मिलने पर देशव्यापी जनआंदोलन खड़ा किया। इस सरकार को विभिन्न मुद्दों पर 22 पत्र लिखे, आज तक एक का भी जवाब नहीं मिला, इसलिए 23 मार्च को ‘करेंगे या मरेंगे’ आव्हान पर अनशन करेंगे। मैं 80 वर्ष की उम्र में 22 राज्यों में 30 सभाएं कर चुका हूं। जब उनसे पूछा कि दिल्ली में जो हो रहा है, उस पर खामोश क्यों हैं। अन्ना ने कहा कि मेरे दिल में जो है, वह मुझे पता है। लेकिन केजरीवाल के दिल में क्या है, यह वही जानें।