राजस्थान: पद्मावत की रिलीज को हरी झंडी, भंसाली के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फिल्म को राजस्थान व देश का सम्मान बढ़ाने वाला बताया, करणी सेना के सारे आरोप निराधार साबित

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न्यूज चक्र @ जोधपुर/सेन्ट्रल डेस्क
राजस्थान हाईकोर्ट से मंगलवार को विवादित फिल्म पद्मावत के निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली को बड़ी राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने पद्मावत के निर्माण के दौरान गत वर्ष फरवरी में डीडवाना में वीरेन्द्र सिंह व एक अन्य की ओर से भंसाली सहित अभिनेत्री दीपिका पादुकोण व अभिनेता रणवीर सिंह के खिलाफ इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने व धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में दर्ज कराई एफआईआर निरस्त कर दी। साथ ही अपने आदेश में कहा कि राजस्थान में कोई इस फिल्म को प्रदर्शित करना चाहे तो कर सकता है। सुरक्षा मुहैया करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। फिल्म को राजस्थान सहित देश का सम्मान बढ़ाने वाली भी बताया।
गौरतलब है कि भंसाली की ओर से हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत विविध आपराधिक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में एफआईआर को गलत बताते हुए उसे खारिज करने की गुहार लगाई गई थी। याचिका की आरम्भिक सुनवाई में ही कोर्ट ने एफआईआर के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। इसकी अंतिम सुनवाई के लिए कोर्ट ने भंसाली के अधिवक्ताओं से फिल्म की स्क्रीनिंग के निर्देश दिए। इस पर जस्टिस संदीप मेहता को सोमवार रात भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच आईनॉक्स थियेटर में फिल्म दिखाई गई। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मेहता काफी भावुक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि फिल्म में राजस्थान के ऐतिहासिक शौर्य और शान को ही प्रदर्शित किया गया है। इसे सेंसर बोर्ड भी हरी झंडी दे चुका है। राजस्थान में सिनेमाघरों में कोई इसे प्रदर्शित करना चाहे तो कर सकता है। सरकार इसे प्रोटेक्ट करे। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
उल्लेखनीय है कि फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान करीब छह घंटे तक दो सौ से अधिक पुलिस के जवानों ने मॉल को घेरे रखा था। जस्टिस मेहता के साथ कोर्ट मास्टर रामनिवास सोनी, पीएस टीकम दैया, तरुण गौड़ व अर्दली मांगीलाल सहित गनमैन तथा भंसाली के वकील भी इस स्क्रीनिंग में शामिल रहे थे।
करणी सेना ने देशभर में मचाया था बवाल
उल्लेखनीय है कि इस फिल्म में महारानी पद्मिनी का किरदार निभा रही दीपिका पादुकोण व अलाउद्दीन खिलजी बने रणवीर सिंह के बीच आपत्तिजनक दृश्य होने का आरोप लगाते हुए राजपूत समाज के संगठन करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने देश के बड़े भाग में भारी बवाल मचाया था। करणी सेना व इसके समर्थकों का आरोप था कि यह फिल्म राजस्थान व राजपूतों की संस्कृति, परम्पराओं व गौरव को अपमानित करने वाली है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई भारी तोड़फोड़ व आगजनी में करोड़ों की निजी व सरकारी सरकारी सम्पत्ति का नुक़सान हुआ था। हालांकि बाद में करणी सेना के सारे आरोप निराधार साबित हुए। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी है।