अलवर: बीजेपी की हार का कारण बने मुसलमान!

गत दस माह तक अलवर गाय सम्बन्धित हिंसा का केंद्र रहा है। यहां पहलू खान, उमर मोहम्मद और तालिम हुसैन गौ तस्करी के नाम पर मारे गए

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क / अलवर 

राजस्थान की अलवर लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में की मतगणना में भी कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. करण सिंह यादव ने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. जसवंत सिंह यादव पर जीत तय कर ली है। इसकी औपचारिक घोषणा होना बाकी है। इसका कारण है कि कांग्रेस प्रत्याशी को 5 लाख 20 हजार 434 वहीं, बीजेपी प्रत्याशी को 3 लाख 75 हजार 520 वोट मिले हैं। इस प्रकार कांग्रेस को 1 लाख 44 हजार 914 वोटों की बढ़त मिली है। यह सीट भी अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा सीट की तरह बीजेपी की थी।

माना जा रहा है कि अलवर में बीजेपी की हार के लिए गाय से सम्बन्धित हिंसा का भी बड़ा हाथ है। इस वजह से मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हुआ। दूसरा बड़ा कारण खुद जसवंत सिंह के उस कथित वीडियो को बताया जा रहा है, जिसमें वो कहते नजर आ रहे हैं कि “हिन्दू हो तो वोट मुझे देना, मुस्लिम हो तो कांग्रेस प्रत्याशी कर्ण सिंह को वोट देना।” इसने भी उनके खिलाफ माहौल बनाया और मुस्लिम वोट एकतरफा पड़े। गौरतलब है कि यहां कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से दो मुस्लिम इब्राहीम खान और जमालुद्दीन भी निर्दलीय चुनाव लड़े। मगर इब्राहीम खान को सिर्फ 769 और जमालुद्दीन को 1454 वोट ही मिले। इस प्रकार स्पष्ट है कि यहां अधिकतर मुस्लिम मतदाता ने बटने की बजाय कांग्रेस को ही वोट डाले।
मेव पंचायत के संरक्षक शेर मोहम्मद की स्वीकारोक्ति से इस बात को पूरा बल मिलता है। वह कहते हैं, “अलवर में गायों के नाम पर मुस्लिमों को लगातार टारगेट किया गया। इस वजह से मुस्लिम वोट एकतरफा कांग्रेस को पड़ा है। दो मुस्लिम प्रत्याशियों को भी समाज ने वोट नहीं दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि वोट बंटा तो बीजेपी जीत जाएगी। यहां करीब 3.65 लाख मुस्लिम वोटर हैं।”
अलवर लाेकसभा सीट बीजेपी के महंत चांदनाथ के निधन से खाली हुई थी। यहां बीजेपी ने वसुंधरा सरकार में श्रम एवं नियोजन मंत्री डॉ. जसवंत यादव को उम्मीदवार बनाया था। डॉ. जसवंत अपनी हार पर कह रहे हैं कि कांग्रेस ने महंत चांदनाथ के उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में कम आने को लेकर मतदाताओं को भ्रमित किया, जबकि वे अपनी बीमारी के कारण यहां नहीं आ पा रहे थे। दूसरा कारण वे बताते हैं कि युवाओं में भी गलतफहमी फैलाई गई कि बेरोजगारों को यह सरकार नौकरी नहीं दे रही है। उनके अनुसार उनकी उम्मीदवारी की घोषणा देरी से होना भी हार का तीसरा बड़ा कारण बना ।