ई-वे बिल पर सेमिनार : ट्रांसपोर्टर्स की जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों ने ऐसे कि‌या समाधान

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न्यूज चक्र @ कोटा
ट्रांसपोर्ट कम्पनीज एसोसिएशन की ओर से बुधवार को पुरुषार्थ भवन में ई-वे बिल पर आयोजित सेमिनार में उपायुक्त राज्य कर विभाग अवधेश पराशर व हेल्प डेस्क कर अधिकारी उमंग नंदवाना ने ट्रांसपोर्टर्स की जिज्ञासाओं व समस्याओं का समाधान किया। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष जेपी शर्मा व सचिव चन्द्रशेखर रामचंदानी ने ई-वे बिल पर एसोसिशन कार्यालय में एक सहायता केन्द्र खोलने का आश्वासन दिया। हेल्प डेस्क कर अधिकारी नंदवाना ने व्यपारियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से भी ई-वे बिल से जुड़ी आवश्यक जानकारियां दीं।
सेमिनार में कर उपायुक्त अवधेश पराशर ने बताया कि जीएसटी काउंसिल द्वारा 16 जनवरी से प्रयोगिक तौर पर तथा 1 फरवरी 2018 से अनिवार्य रूप से इंटर स्टेट ई-वे बिल लागू किया जा रहा है। इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 1 जून 2018 से लागू किया जाएगा। अब राज्य के बाहर माल भेजने व मंगवाने के लिए बिल, बिल्टी और अन्य दस्तावेजों के साथ ई-वे बिल फार्म भी लगाना जरूरी होगा। जीएसटी व्यवस्था में ई-वे बिल की शुरुआत टेक्स चोरी रोकने के लिए की गई है। इंटर स्टेट ट्रांजेक्शन जो 50 हजार रुपए से अधिक हो, उसकी ब्रिकी पर ई-वे बिल क्रेता, विक्रेता या ट्रांसपोर्ट द्वारा बनाना अनिवार्य होगा, अन्यथा माल का गमन (स्टोक मूविंग) प्रारम्भ नहीं होगी।
सेमिनार में एसोसिशन के अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कम्पनीज एसोसिएशन हमेशा ही ट्रांसपोर्ट की मदद के लिए आगे बढ़कर कार्य करती आई है। ट्रांसपोर्ट व्यापारियों की सुविधा के लिए एसोसिएशन में एक सुविधा केन्द्र भी जल्द बनवाया जाएगा। इसमें ई- वे बिल बनाने में कोई भी समस्या आने पर ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की समस्या के समाधान की सुविधा उपलब्ध होगी। कर उपायुक्त, कोटा अवधेश पराशर ने भी विभाग की ओर से सुविधा केन्द्र को हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया। सचिव रामचंदानी ने बताया कि सेमिनार के उपारांत 15 से 20 ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों ने अपनी ई वे बिल आईडी बनवाई। इसमें विभाग के अधिकारी सहित 150 से अधिक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी मौजूद रहे।
50 हजार रुपए से अधिक मूल्य के सामान पर लागू होगा ई-वे बिल
हेल्प डेस्क एवं राज्य कर अधिकारी उमंग ने बताया कि ई-वे बिल व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा मूल्य का सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने से पहले उसका ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। सरकार का मानना है कि इसके लागू हो जाने से टेक्स चोरी पर लगाम लगाना आसान हो जाएगा। गौरतलब है कि राज्य के अंदर ही वस्तुओं को ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा, जबकि एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने या मंगाने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा। ई-वे बिल रजिस्टर सप्लायर, बायर और ट्रांसपोर्टर्स जनरेट करेगा। ई-वे बिल एसएमएस या एनरॉइड फोन के माध्यम से बनाया और केंसिल कराया जा सकता है। अनरजिस्टर डीलर होने की स्थिति में आधर कार्ड व पेन कार्डके माध्यम से भी ई-वे बिल बनाया जा सकता है।

सरकार को फायदा

ई-वे बिल (इलेक्ट्रॉनिक बिल) माल ढुलाई पर लागू होगा। इसकी वैधता दूरी के हिसाब से तय होगी। ई-वे बिल में माल पर लगने वाले जीएसटी की पूरी जानकारी होगी। इस बिल से पता लगेगा कि सामान का जीएसटी चुकाया गया है या नहीं? ई-वे बिल से टेक्स वसूली में भारी गिरावट रुकेगी और टैक्स चोरी के मामलों पर लगाम लगेगी। ई-वे बिल के जरिये एक राज्य से दूसरे राज्य में माल ढुलाई में दिक्कतें कम होंगी।
कितने समय के लिए वैध
हेल्प डेस्क एवं राज्य कर उपायुक्त अवधेश पराशर ने बताया कि100 किमी तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा। 101 से 300 किलोमीटर की दूरी के लिए 3 दिन का ई-वे बिल बनेगा। 301 से 500 किमी तक के लिए बना ई-वे बिल 5 दिन के लिए, 501 से 1000 किमी के लिए बना ई-वे बिल 10 दिन के लिए और 1000 किलोमीटर से ज्यादा के लिए बना ई-वे बिल 20 दिन के लिए वैध होगा। इसका मतलब है कि ई-वे विल बनने के बाद तय समय पर माल की ढुलाई करनी होगी। ऐसा नहीं होने पर फिर से ई-वे बिल बनाना होगा।
क्या है ई-वे बिल?
ई-वे बिल की व्यवस्था के तहत अगर किसी वस्तु का एक राज्य से दूसरे राज्य या फिर राज्य के भीतर मूवमेंट होता है तो सप्लायर को ई-वे बिल जनरेट करना होगा। नई व्यवस्था में 50 हजार रुपए से अधिक मूल्य के सामान लाने और ले जाने के लिए ई-वे बिल की जरूरत होगी। किसी एक राज्य के भीतर 10 किलोमीटर के दायरे में माल भेजने पर आपूर्तिकर्ता को जीएसटी पोर्टल पर उसका ब्योरा डालने की जरूरत नहीं होगी।
ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन आवश्यक
-ई-वे बिल जारी करने के लिए प्रत्येक व्यवहारी को ई-वे बिल जारी करना अनिवार्य होगा। इसमें एक एनरोलमेंट की सुविधा प्रदान करने के पश्चात व्यवहारी/ट्रांसपोर्ट ई-वे बिल जारी कर सकेगा।
-जीएटी में पंजीकृत व्यवहारी अपने जीएसटी नम्बर से पोर्टल पर पंजीकृत होगा, वहीं अपंजीकृत ट्रांसपोर्ट पैन एवं आधार कार्ड के माध्यम ई-वे बिल जारी कर सकता है।
– पंजीकरण की प्रक्रिया मात्र एक बार ही करना होगा। इसके उपरान्त प्राप्त आईडी से उपयोगकर्ता समस्त व्यवहार कर सकता है।
– इस आईडी पर उपयोगकर्ता को सब-आईडी बनने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिसे यूजर मैनेजमेंट द्वारा कन्ट्रोल किया जा सकेगा। सब-यूजर को सभी अधिकार होंगे जो मैन यूजर के होते हैं। जब तक मैन यूजर अधिकारों में कोई कटौती ना करे, जैसे बिल केंसिल, बिल रिजेक्ट आदि।
– इस सुविधा का प्रयोग एनरॉइड फोन अथवा एसएमएस से भी किया जा सकता है, जिसे वेबसाइट पर पूर्व निर्धारित करना होगा।
– इसमें एक समरी शीट का ऑप्शन भी दिया गया है, जो दिन भर के ट्रांजेक्शनों का रिकॉर्ड व्यवहारी को उपलब्ध करवाएगा। कलेक्टेड ई वे बिल के माध्यम से एक से अधिक बिल व सामान का एक ई वे बिल भी जनरेट किया जा सकता है।
– ई-वे बिल व्हीकल नम्बर डालते ही जनरेट हो जाएगा। इसे केंसिल व रिजेक्ट करने के लिए क्रमशः 24 एवं 72 घण्टे का समय रहेगा।
– ई-वे बिल में अपडेट व्हीकल नम्बर का ऑप्शन भी उपलब्ध होगा, जो ब्रेक डाउन एवं ट्रांसपोर्ट चेंज होने के स्थिति में काम में लिया जाएगा।