टू जी केस: ए राजा व कनिमोझी सहित सभी 35 आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा: सबूत रहे नाकाफी

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/ सेन्ट्रल डेस्क
टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व मंत्री ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी सहित सभी 35 आरोपियों और कई कम्पनियों को बरी कर दिया। इनमें से दो मामले सीबीआई के थे तो एक मामला एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने दायर किया था। जज ने अपने फैसले में कहा, “प्रॉसिक्यूशन कोई भी आरोप साबित करने में नाकाम रहा। लिहाजा सभी को बरी किया जाता है।” एक लाख 76 हजार करोड़ के इस घोटाले में यूपीए सरकार में टेलीकॉम मिनिस्टर रहे ए. राजा और डीएमके नेता कनिमोझी मुख्य आरोपी थे। 2010 में कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) रहे विनोद राय की रिपोर्ट में घोटाले का खुलासा हुआ था।

इस मामले में बरी होने वाली कम्पनियों में शामिल स्वान टेलीकॉम के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन आरोप साबित करने में नाकाम रहा है। सीबीआई ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। लॉस दिखाया गया था, लेकिन असल में कोई नुकसान हुआ ही नहीं। लिहाजा सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
वहीं पूर्व मंत्री राजा के वकील मनु शर्मा ने कहा, “किसी भी बड़े मुकदमे में वक्त लगता है, लेकिन सच्चाई सामने आ गई।”
मेरी बात सही साबित, देश से माफी मांगे
इस फैसले पर कपिल सिब्बल ने कहा, “मेरी जीरो लॉस वाली बात सही साबित हुई। मैं कभी अपने बयान से नहीं पलटता। हम बेबुनियाद बातें नहीं करते। ये सब बीजेपी करती है। तब विपक्ष ने देश को गलत जानकारी दी। काफी हंगामा किया। आरोप लगाने वालों (विनोद राय) को देश से माफी मांगनी चाहिए।” चिदंबरम ने कहा, “कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि हमारी सरकार पर जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे साबित हुए।
यह था पूरा मामला, इस तरह चला घटनाक्रम
2010 में कैग रहे विनोद राय की रिपोर्ट से यह टू जी घोटाला सामने आया था। इसका ट्रायल 6 साल पहले 2011 में शुरू हुआ था। कोर्ट ने 17 आरोपियों पर चार्ज तय किए थे।

कैग (CAG) की रिपोर्ट में क्या था?
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि टू जी स्पेक्ट्रम के अलॉटमेंट के लिए नीलामी नहीं की गई। इससे देश का नुकसान हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?
सुप्रीम कोर्ट ने टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन में पद के दुरुपयोग की बात कही। फरवरी, 2012 में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए।

सीबीआई कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
आज 21 दिसम्बर को सीबीआई कोर्ट ने टू जी केस में राजा-कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

इन तीन मामलों पर हुई सुनवाई
सीबीआई ने पहला केस राजा, कनिमोझी, पूर्व टेलीकॉम सेक्रेटरी सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के प्राइवेट सेक्रेटरी आरके चंदोलिया, स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर्स शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक के एमडी संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप के गौतम दोषी, सुरेंद्र पीपरा और हरि नायर पर दायर किया था। सीबीआई ने कूसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल प्रा. लि. के डायरेक्टर्स आसिफ बलवा-राजी अग्रवाल, कलाइगनार टीवी के डायरेक्टर शरद कुमार और बॉलीवुड प्रोड्यूसर करीम मोरानी को भी आरोपी बनाया था। इसमें सीबीआई ने 3 फर्म्स स्वान टेलीकॉम प्रा. लि., रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और यूनिकॉम वायरलेस (तमिलनाडु) लि. को भी केस में आरोपी बनाया।
सीबीआई के दूसरे मामले में एस्सार ग्रुप के प्रमोटर रवि-अंशुमान रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रमोटर किरण खेतान, उनके पति आईपी खेतान और एस्सार ग्रुप के डायरेक्टर विकास श्राफ शामिल हैं। चार्जशीट में लूप टेलीकॉम लिमिटेड, लूप इंडिया मोबाइल लिमिटेड और एस्सार टेली होल्डिंग लिमिटेड कंपनियां भी आरोपी थीं।
तीसरे मामले में ईडी ने अप्रैल 2014 में ए राजा, कनिमोझी, शाहिद बलवा, आसिफ बलवा, राजीव अग्रवाल, विनोद गोयनका, करीम मोरानी और शरद कुमार समेत 19 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
ईडी ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्मल को भी इस मामले में शामिल किया था। आरोप था कि स्वान टेलीकॉम से 200 करोड़ डीएमक के कलाइगनार टीवी को दिए गए। ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।

अक्टूबर 2011 में तय किए गए चार्ज
30 अप्रैल 2011 को सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में राजा और अन्य पर 30 हजार 984 करोड़ के नुकसान का आरोप लगाया था। इसमें 2जी स्पैक्ट्रम के लिए 122 लाइसेंस दिए गए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी, 2012 को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अक्टूबर 2011 में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत फेक फर्जी डॉक्युमेंट्स से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, अपने पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने का चार्ज लगाया।

क्या है टू जी घोटाला?
2010 में आई कैग की रिपोर्ट में 2008 में बांटे गए स्पेक्ट्रम पर सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी के बजाए ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर इसका अलॉटमेंट किया गया था। बताया गया कि इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ये भी बताया गया था कि नीलामी के आधार पर लाइसेंस बांटे जाते तो यह रकम सरकार के खजाने में जाती। दिसम्बर 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। 2011 में पहली बार स्पेक्ट्रम घोटाला सामने आने के बाद अदालत ने इसमें 17 आरोपियों को शुरुआती दोषी मानकर 6 महीने की सजा सुनाई थी।