डैमेज कंट्रोल की कोशिश: कांग्रेस ने मणिशंकर अय्यर को पार्टी से निलम्बित किया

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मणिशंकर अय्यर ने एक बार फिर अपने बयान से कांग्रेस को मुसीबत में डाल दिया। इस पर भारी बवाल होना ही था। राहुल गांधी का आदेश मिला तो अय्यर ने माफी मांग ली। मगर बात बड़ी है, इसलिए विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस को नुकसान तो हो ही चुका है। माफी मांगना काफी नहीं लगा तो कांग्रेस ने गुजरात चुनाव में सम्भावित नुकसान से बचने की रणनीति के तहत रात को अय्यर के खिलाफ नोटिस जारी करने के साथ ही उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित कर दिया।क्या मोदी भी ऐसा साहस दिखाएंगे: कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसके बाद ट्वीट कर कहा “यही है कांग्रेस का गांधीवादी नेतृत्व व विरोधी के प्रति सम्मान की भावना। कांग्रेस पार्टी ने श्री मणिशंकर अय्यर को कारण बताओ नोटिस जारी कर प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित कर दिया है।क्या मोदी जी कभी यह साहस दिखाएंगे?”

यह था मामला

विवाद की जड़ बनी पीएम नरेन्द्र मोदी की तरफ से राहुल गांधी के बारे में दिए गए बयान पर मणिशंकर अय्यर के द्वारा दिया गया जवाब। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया। अय्यर ने कहा, ‘‘मुझको ये आदमी बहुत नीच किस्म का लगता है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है।’’ जब इस बयान पर विवाद बढ़ा तो राहुल गांधी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट हुआ। इसमें कहा गया कि हम उम्मीद करते हैं कि अय्यर इस भाषा के लिए माफी मांगेंगे। इसके बाद अय्यर एक बार फिर मीडिया के सामने आए। कहा- ‘‘मैं हिंदी भाषी नहीं हूं। अगर नीच शब्द का कोई दूसरा अर्थ निकलता है तो मैं माफी चाहता हूं।’’

मोदी ने राहुल के लिए यह कहा था

पीएम मोदी ने आज गुरुवार को अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के उद्घाटन समारोह में कहा- “हमें स्वीकारना होगा कि हम बाबा साहब के सपनों को पूरा नहीं कर पाए। आज की पीढ़ी में वो क्षमता है जो सामाजिक बुराइयों को खत्म कर सकती है। ये देश जाति के नाम पर बंटकर वैसा आगे नहीं बढ़ पाएगा, जैसा उसे बढ़ना चाहिए।” इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस के साथ राहुल गांधी के मंदिर जाने पर भी तंज कसा। राहुल का नाम लिए बगैर कहा कि जो राजनीतिक दल बाबा साहब का नाम लेकर राजनीति करते हैं, उन्हें अब बाबा साहब नहीं, बाबा भोले ज्यादा याद आ रहे हैं।”

अय्यर ने यह दिया जवाब

मोदी के इस तंज पर मणिशंकर अय्यर ने कहा, “जो अम्बेडकरजी की सबसे बड़ी ख्वाहिश थी, उसे साकार करने में एक व्यक्ति का सबसे बड़ा योगदान था। उनका नाम था जवाहर लाल नेहरू। अब इस परिवार के बारे में ऐसी गंदी बातें करें, वो भी ऐसे मौके पर जब अम्बेडकरजी की याद में बहुत बड़ी इमारत का उद्घाटन किया गया। मुझे लगता है कि ये आदमी बहुत नीच किस्म का है, इसमें कोई सभ्यता नहीं है। ऐसे मौके पर इस प्रकार की गंदी राजनीति की क्या आवश्यकता है।”

मोदी ने यह दिया प्रत्युत्तर

अय्यर का बयान सामने आने के कुछ ही देर बाद सूरत के लिम्बायत में मोदी की रैली हुई। इसमें उन्होंने कहा, ‘‘श्रीमान मणिशंकर अय्यर ने आज कहा कि मोदी नीच है। मोदी नीच जाति का है। क्या यही भारत की महान परम्परा है? ये गुजरात का अपमान है। मुझे तो मौत का सौदागर तक कहा जा चुका है। गुजरात की संतानें प्रधानमंत्री के अपमान का जवाब देंगी। वे इस तरह की भाषा का तब जवाब देंगी, जब चुनाव के दौरान कमल का बटन दबेगा। मुझे भले ही नीच कहा है। लेकिन आप लोग अपनी गरिमा मत छोड़िएगा।’’

राहुल गांधी ने ऐसे की डैमेज कंट्रोल की कोशिश

इस विवाद पर राहुल गांधी के ऑफिशियल हैंडल @OfficeOfRG से ट्वीट किया गया, ”बीजेपी और प्रधानमंत्री कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाने के लिए लगातार खराब भाषा का इस्तेमाल करते हैं। कांग्रेस का कल्चर और हेरिटेज अलग है। मैं प्रधानमंत्री के बारे में मणिशंकर अय्यर की तरफ से इस्तेमाल की गई भाषा और लहजे को मंजूर नहीं करता। कांग्रेस और मैं यह उम्मीद करते हैं कि अय्यर ने जो कहा है, उसके लिए वे माफी मांगें।”

अय्यर ने खुद का बचाव करते हुए ऐसे मांगी माफी

मीडिया के सामने आए अय्यर ने कहा- मैं हिन्दी भाषी नहीं हूं। मैं अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करता हूं। मैंने Low का तर्जुमा नीच के रूप में किया। अगर नीच का कोई दूसरा अर्थ निकलता है तो मैं माफी चाहता हूं। मुझे हिन्दी का उतना ज्ञान नहीं है। जैसे लायक और नालायक को मैं विरोधाभासी शब्द मानता था। मैंने एक बार वाजपेयीजी के बारे में कहा था कि वाजपेयी लायक व्यक्ति हैं लेकिन नालायक प्रधानमंत्री हैं। इस पर विवाद हुआ तो मुझे बताया गया कि ये विरोधीभासी शब्द नहीं हैं। इनके अलग-अलग मतलब हैं।

अय्यर ने ही 2014 में चायवाला का विवाद शुरू किया था

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान अय्यर ने नरेन्द्र मोदी के खिलाफ बयान दिया था। उन्होंने पीएम कैंडिडेट ( मोदी ) को चायवाला बताकर मजाक उड़ाया था। उन्होंने कहा था, “21वीं सदी में नरेन्द्र मोदी कभी भी देश के प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे, नहीं बनेंगे, नहीं बनेंगे। यहां आकर चाय बांटना चाहें तो हम उनके लिए जगह दे सकते हैं।”
-अय्यर के इस बयान के बाद बीजेपी के इलेक्शन कैंपेन की दिशा बदल गई थी। नरेन्द्र मोदी ने भी अपनी रैलियों में खुद के चायवाला होने का मुद्दा खूब भुनाया था।

नीच शब्द को लेकर पहले भी गर्मा चुकी है राजनीति 

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी ने एक बार अमेठी में रैली की थी। इसके बाद प्रियंका गांधी ने प्रचार के दौरान कहा था कि अमेठी में मेरे शहीद पिता का अपमान हुआ है। ऐसी नीच राजनीति करने वालों को अमेठी का हर बूथ जवाब देगा। प्रियंका के इस बयान पर मोदी ने कहा था- नीच जाति में पैदा होना गुनाह है क्या?

नीच शब्द का क्या असर हुआ?

मोदी-प्रियंका के इस बयान से पैदा हुए विवाद के बाद उत्तर प्रदेश की 80 में से 33 और बिहार की 40 में से 8 लोकसभा सीटों पर वोटिंग हुई थी। बीजेपी ने ‘नीच राजनीति’ और ‘नीच जाति’ को चुनाव प्रचार में ऐसा मुद्दा बनाया कि उत्तर प्रदेश की 33 में से 22 और बिहार की 8 में से 6 सीटें जीत लीं।