भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे लोकेश ठाकुर पर नगर परिषद की गाज

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न्यूज चक्र @ बून्दी
भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों को हमेशा भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्तियों की प्रशंसा करने वाले तो बहुत से हो सकते हैं, मगर साथ देने के नाम पर पीछे हो जाते हैं। ऐसा ही वाकया पेश आया है नगर परिषद बून्दी में प्रतिपक्ष नेता लोकेश ठाकुर के साथ। खोजागेट चौराहे पर किराये के भवन में संचालित उनकी पैथोलॉजी लैब को सारी नियम कायदे ताक पर रख परिषद ने सील कर दिया। हालत यह है कि इस कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए परिषद के अधिकारियों के लचर जवाब सामने आ रहे हैं।
जानिये क्या है पूरा मामला-
युवा पार्षद एवं कांग्रेस नेता लोकेश ठाकुर अपनी पार्टी के एक बड़े स्थानीय गुट की नीतियों के खिलाफ जाकर भी परिषद में सामने आ रहे भ्रष्टाचारों व मनमाने फैसलों की खिलाफत करते रहे हैं। इसी के चलते राज्य सरकार को कुछ समय पूर्व ही परिषद के एक बड़े फैसले को निरस्त तक करना पड़ा था। हाल ही में ठाकुर के एक इस्तगासे पर पुलिस ने परिषद के सभापति महावीर मोदी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। इसी बीच शुक्रवार सुबह परिषद के छोटे स्तर के अधिकारी ठाकुर की लैब पर पहुंचे और उसे सील कर दिया। कारण बताया गया कि एक वर्ष से भवन का यूडी टैक्स बकाया है।
यह है वास्तविकता-
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 120 के तहत किसी भी प्रकार का टैक्स सम्पत्ति के मालिक से ही वसूल किया जा सकता है। भवन मालिक ने एक साल पूर्व यूडी टैक्स के 76 हजार रुपए जमा कराए थे। इसके अलावा इस भवन में ही दस अन्य दुकानें किराये पर दी हुई हैं। परिषद ने उन्हें छेड़ा तक नहीं, सिर्फ ठाकुर की लैब को ही सीज किया गया। अगर कोई कर बकाया भी हो तो पहले नगर पालिका अधिनियम की धारा 121 व 122 के तहत 30 दिन के अंदर राशि जमा करने का नोटिस दिया जाता है। सम्पत्ति का मालिक अगर मांगी गई राशि से सहमत नहीं हो तो वह जिला कलक्टर या राज्य सरकार के अन्य अधिकृत अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है। मगर वह 30 दिन के भीतर न तो अपील करता है, ना ही राशि जमा कराता है तब धारा 130 के तहत मांग का नोटिस दिया जाता है। इसके भी 15 दिन के अंदर राशि जमा नहीं हो तब परिषद के द्वारा धारा 131 के तहत सील करने की कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर तहसीलदार या परिषद के प्रमुख अधिकारी को मौजूद रहना होता है। मगर इस कार्रवाई को राजस्व अधिकारी द्वितीय रूही तरन्नुम व कनिष्ठ अभियंता जोधराज मीणा ने ही अंजाम दिया। इस प्रकार स्पष्ट है कि लोकेश ठाकुर की लैब को सील करने के लिए की गई कार्रवाई में परिषद की ओर से इनमें से किसी भी नियम की पालना नहीं की गई।
ठाकुर ने यह प्रमुख मुद्दे उठाए और यह परिणाम निकला-
परिषद ने शहर के ऐतिहासिक नवल सागर पर कुछ दुकानें बनाने की योजना घोषित कर कुछ की नीलामी भी कर दी थी। मगर कुछ युवाओं ने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए आंदोलन शुुरू किया। ठाकुर भी इसमें एक प्रमुख आवाज बने, आंदोलन को नेतृत्व दिया। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। दबाव में आई राज्य सरकार ने  सितम्बर माह में यहां मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए परिषद के फैसले को खारिज कर दिया। परिणाम यह हुआ कि नीलामी दाताओं ने जो 25 प्रतिशत राशि जमा करा दी थी, उसे लौटाना पड़ा। इसके अलावा परिषद के द्वारा एक पट्टा अवैध रूप से जारी कर देने का मामला भी ठाकुर ने उजागर कर इसके खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा किया। पुलिस को इस पर नगर परिषद के सभापति सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज करना पड़ा। ताजा मामले में नगर परिषद द्वारा करवाए जा रहे अवैध निर्माणों के टैंडर जारी करने का भी विरोध किया।
एक दिन पूर्व से डाला जा रहा था समझौते का दबाव
इस मामले में यह भी सामने आया है कि लोकेश ठाकुर को कार्रवाई से एक दिन पूर्व गुरुवार को ही इसके संकेत दे दिए गए थे। साथ ही मामले को सुलझाने के लिए सभापति से बात करने को कहा गया था। मगर ठाकुर ने उनसे सम्पर्क करने की जगह राहत पाने के लिए सिविल न्यायालय में वाद दायर कर दिया। इस पर न्यायालय ने परिषद को नोटिस जारी कर शनिवार को सुनवाई की तारीख तय ही है।
जिम्मेदारों ने ये कहा-
मकान मालिक अगर समय पर यूडी टैक्स जमा नहीं कराता है तो सम्बन्धित सम्पत्ति पर कार्रवाई होती है। मगर यूडी टैक्स जमा होने के बावजूूद भी अगर नियमों के विरुद्ध सील किया गया है तो शिकायत आने पर सम्बन्धित अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
मंजीत सिंह, प्रमुख शासन सचिव, स्वायत्त शासन एवं नगरीय विकास विभाग

नगर परिषद आयुक्त के आदेश पर ही यह कार्रवाई की गई है। वे ही इस सम्बन्ध में जानकारी दे सकते हैं।

-रूही तरन्नुम, राजस्व अधिकारी, नगर परिषद बून्दी

(आयुक्त अवकाश पर हैं।)
मैं लम्बे समय से नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचारों के खिलाफ आवाज उठाता आ रहा हूं। इसी कारण परिषद ने मुझे व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाने की नीयत से अवैध रूप से मेरी पैथोलॉजी लैब को सील कर दिया। मगर मैं ऐसी कार्रवाइयों से कतई नहीं डरूंगा। आगे भी जनहित भी परिषद के भ्रष्ट कार्याें की पोल खोलता रहूंगा व इनके खिलाफ लडूंगा।
-लोकेश ठाकुर
यह नगर परिषद व लोकेश ठाकुर का आपसी विवाद है। गत वर्ष ही यूडी टैक्स के पहले तो 76 हजार रुपए व छह माह बाद ही फिर 6 हजार रुपए और जमा करवाए गए थे। इसके बाद अभी इस टैक्स के लिए कोई नोटिस नहीं मिला। नोटिस मिलेगा तो टैक्स जमा करवा देंगे।
-दलबीर यादव, मकान मालिक

यह रुटीन कार्रवाई है। कृषि भूमि पर बिना लैंड कन्वर्जन के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित थीं। मकान मालिक ने कॉमर्शियल कन्वर्जन के लिए फाइल लगा रखी है। इसके अलावा दुकानें रोड तक निकली होने के मामले में नगर परिषद की ओर से वर्ष‌ 2014 से तोड़े जाने के नोटिस भी दिए जा रहे थे। यूडी टैक्स बकाया चल रहा है। कुछ दिन पहले दस-बारह लोगों ने लैब के कारण रोड जाम होने की शिकायत भी की थी। जांच में शिकायत सही मिली। जवाब नहीं मिलने पर तीन दिन पहले सीज के नोटिस चस्पा कर दिए थे।

-महावीर मोदी, सभापति, नगर परिषद