गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित

0
417

न्यूज चक्र @ नई दिल्ली/सेन्ट्रल डेस्क
चुनाव आयोग ने बुधवार को गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी । चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का चुनाव 9 दिसम्बर, वहीं दूसरे चरण का चुनाव 14 दिसम्बर को होगा। गुजरात और हिमाचल प्रदेश, दोनों जगह वोटों की गिनती 18 दिसम्बर को होगी। गुजरात चुनावों में इस बार 50,128 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। गोवा के बाद हिमाचल और गुजरात ऐसे राज्य होंगे जहां चुनावों में शत-प्रतिशत वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।

पिछले 22 साल से गुजरात की सत्ता पर काबिज भाजपा एक बार फिर जनादेश लेने के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनता के सामने जाएगी, वहीं अभी तक हाशिये पर चल रही काग्रेस सत्ता हासिल करने के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में बिगुल फूंक चुकी है। 2012 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को 115 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि कांग्रेस को 61 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। इसी प्रकार 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को बड़ा फायदा मिला। उसने गुजरात की सभी 26 सीटों पर कब्ज़ा कर लिया, अर्थात कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।

इस तरह सम्पन्न होंगे चुनाव

*182 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण में 89 सीटों पर चुनाव होगा। 14 नवम्बर से नामांकन होगा।
*वोटर के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किए जाएंगे। चुनाव आयोग मोबाइल ऐप की शुरुआत होगी। वाहनों और कर्मचारियों को ई-पेमेंट से भुगतान किया जाएगा।
*102 बूथों पर महिला स्टाफ तैनात होगा। टीवी, सिनेमाघर और एफएम पर विज्ञापन पर भी नजर रखी जाएगी।
*कुछ पोलिंग स्टेशन पर वेबकास्टिंग की जाएगी। बॉर्डर चेक पोस्ट्स और कुछ जगहों पर सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
*उम्मीदवारों को अलग अकाउंट खुलवाना होगा जिससे वह चुनाव में खर्च कर सकता है।
*गुजरात चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा 28 लाख होगी।
*गुजरात में आदर्श आचार संहिता लागूः चुनाव आयोग
चुनाव के दौरान विडियॉग्रफी भी की जाएगी। नामांकन, मतगणना, ईवीएम स्टोरेज, कैंपेन के समय वीडियोग्राफी होगी। सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे।
*गुजराती भाषा में भी गाइड मौजूद रहेगी। वीवीपैट का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
*गुजरात में 4.3 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर हैं। 50 हजार 128 पोलिंग स्टेशनों पर मतदान होगा।
*गुजरात में 50 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे।
*गुजरात में 182 सीटों पर चुनाव होना है। इस बार पोलिंग बूथों की संख्या बढ़ाई गई है।

ऐसा रहा है वोट शेयर
वोट शेयर की अगर बात करें तो 2012 में भाजपा को 48 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस को केवल 39 फीसदी वोट ही मिल सके। वहीं 2014 में भाजपा को 45 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस को केवल 35 फीसदी वोट मिले। 2002 के बाद ये पहला मौका होगा जब नरेन्द्र मोदी भाजपा की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार नहीं होंगे। मोदी के नेतृत्व में भाजपा लगातार तीन बार से चुनाव जीत रही थी।

चुनाव से पहले प्रोजेक्ट

वडोदरा को 3600 करोड़ का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट।
घोघा-दहेज के बीच 600 करोड़ की रो-रो फेरी सर्विस।
अहमदाबाद-गांधीनगर फेज 2 मेट्रो प्रोजेक्ट को मंजूरी।
अहमदाबाद में 275 करोड़ की रोबोटिक्स-एक्वाटिक गैलरी। भावनगर में फ्लाइओवर, अंबारदी लायन सफारी।
भाजपा के लिए सबसे बड़ी और पहली चुनौती यही है कि नरेन्द्र मोदी इस बार यहां सीएम का चेहरा नहीं हैं।
दूसरा अब तक एक मुश्त वोट देते आ रहे पाटीदारों के तेवर तीखे हैं। तीसरा कई जगह पिटाई की घटनाओं से दलित सामाज भी नाराज़ हैं। चौथी चुनौती है तीन साल में तीन सीएम की। पहले मोदी फिर आनंदी बेन पटेल और अब विजय रूपाणी। पांचवीं चुनौती है, पिछले 22 साल का एंटी इनकंबेंसी फैक्टर। इसके साथ-साथ पटेल, दलित और अल्पसंख्यक अगर एकजुट हो जाते हैं तो चुनौती और बढ़ जाएगी। सबसे बड़ी चुनौती जीएसटी की है जिससे व्यापारी वर्ग नाराज़ है।

भाजपा की इन चुनौतियों को और कड़ा करने में राहुल गांधी भी लगे हुए हैं। राहुल लगातार गुजरात का दौरा कर नए लोगों को पार्टी में जोड़ रहे हैं, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में कमज़ोर संगठन की है। दूसरी चुनौती ये है कि कांग्रेस के पास सीएम उम्मीदवार का चेहरा नहीं है। पाटीदारों पर ज्यादा भरोसा भी कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है। कांग्रेस के अंदर गुटबाज़ी और भीतरघात चल ही रहा है। शंकर सिंह वाघेला भी पार्टी छोड़ कर चुनौती दे रहे हैं। इन चुनौतियों के बावजूद राहुल आक्रामक तेवर अपनाएं हुए हैं। वहीं पीएम मोदी भी एक के बाद एक दनादन दौरे करके चुनावी मैदान में ताल ठोंक चुके हैं।

Source: India TV News Desk