कायस्थ समाज ने सामूहिक रूप से किया भगवान श्री चित्रगुप्त व कलम-दवात का पूजन

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न्यूज चक्र @ कोटा
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से शनिवार को यम द्वितीया के अवसर पर खेड़ली फाटक स्थित जिन्दबाबा मंदिर में भगवान श्री चित्रगुप्त व कलम-दवात की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप माथुर व सम्भागीय महामंत्री पंडित सुनिल भटनागर ने यह जिम्मेदारी निभाई।
महासभा के युवा जिलाध्यक्ष मयूर सक्सेना ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जो जीवात्मा कर्म बंधन में पाप कर्म से दूषित हो जाता है, उन्हे यमलोक जाना पड़ता है। काल में इन्हे अपने साथ ले जाने के लिए यमलोक से यमदूत आते हैं।भगवान को चित्रगुप्त के नाम से पहचाने जाने के पीछे भी पुराणों में कई कथाओं का उल्लेख मिलता है। एक कथा में बताया गया है कि महाप्रलय के पश्चात सृष्टि की पुनर्रचना की जानी थी। भगवान ब्रह्मा जी तपस्या में लीन थे। हजारों वर्षों की तपस्या के दौरान उनके स्मृति पटल पर एक चित्र अंकित हुआ और गुप्त हो गया। भगवान के मुख से निकल पड़ा चित्रगुप्त कायस्थ। अर्थात जो चित्र गुप्त हो और काया (शरीर) में स्थित हो। इसके पश्चात जब उनकी तंद्रा टूटी तो सामने एक दिव्य पुरुष खडे़ थे। इन्हें ही चित्रगुप्त नाम दिया गया। ब्रह्मा जी ने दिव्य पुरुष को महाकाल नगरी में जाकर तपस्या करने को कहा। ये दिव्य पुरुष उज्जैन आए और घोर तप किया। जिसके प्रभाव से सृष्टि के प्रत्येक प्राणी के कर्मों का लेखा-जोखा रखने की शक्ति चित्रगुप्त को प्राप्त हो पाई। इन्होंने मानव कल्याण के लिए शक्तियां भी अर्जित कीं।
भगवान का विशेष पूजन कब-कब
चित्रगुप्त भगवान का पूजन विशेषतौर पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया व चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की द्वितीया को किया जाता है। दीपावली के पश्चात द्वितीया तिथि पर मनाई जाने वाली भाईदूज पर भी इसका महत्व होता है। मान्यता के अनुसार इस दिन धर्मराज अपनी बहन से मिलने उसके घर पहुंचते हैं। इस दिन चित्रगुप्त वंशजों ने भगवान श्री चित्रगुप्त का विधि-विधान से पूजन किया।
यम द्वितीया के इस पूजन समारोह में महासभा के चित्रांश किशोर माथुर, चित्राश एसपी माथुर, महासभा के जिला महामंत्री चित्रांश नीरज कुलश्रेष्ठ, चित्रांश संतोष श्रीवास्तव, चित्रांश ओपी माथुर, चित्रांश आशीष सक्सेना, चित्रांश अखिलेश सक्सेना, चित्रांश एके श्रीवास्तव, चित्रांश नितिन भटनागर, चित्रांश डॉ. अजय श्रीवास्तव, चित्रांश सुदर्शन माथुर, चित्रांश विशाल सक्सेना आदि चित्रांश बन्धु मौजूद थे।