सुप्रीम कोर्ट : ‘निजता’ मौलिक अधिकार, आधार कार्ड पर अभी फैसला नहीं

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न्यूज चक्र @ नई दिल्ली

राइट टू प्राइवेसी यानी निजता के अधिकार को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आर्टिकल 21 के तहत मौलिक अर्थात फंडामेंटल अधिकार घोषित कर दिया। हालांकि इसकी कुछ सीमाएं रहेंगी। नौ जजों की बैंच ने सर्वसम्मति से दिए अपने इस फैसले में 1952 व 1954 को दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को ही पलट दिया। तब एमपी शर्मा और खड़ग सिंह केस में निजता को मौलिक अधिकार नहीं माना गया था। मगर कोर्ट ने आधार कार्ड के सम्बन्ध में टिप्पणी किए बिना इसका फैसला अलग बैंच के लिए छोड़ दिया। दरअसल आधार कार्ड को चुनौती दिए जाने पर ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की थी। इस फैसले को केन्द्र सरकार के लिए झटका माना जा रहा है। आधार कार्ड पर भी इसका असर सम्भावित है।
सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर वाली संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया। हालांकि देश में सम्मान से जीने के अधिकार के तहत नागरिकों को निजता का अधिकार भी मिला हुआ था। मगर अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे अलग से परिभाषित करते हुए कानूनी रूप दे दिया। अर्थात अब अगर किसी नागरिक को किसी सरकारी कार्रवाई या योजना में अपनी किसी गोपनीय जानकारी के सार्वजनिक होने का खतरा लगे तो वह उसे कोर्ट में चुनौती दे सकेगा।

फैसले का इन पर होगा असर-

  • निजता का अधिकार
  • आधार कार्ड की वैधता
  • व्हाट्स एप की निजता नीति
  • डिजिटल इंडिया
  • आधार लिंक्ड पेमेंट एप
  • डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर

उल्लेखनीय है कि मौलिक अधिकार यानी फंडामेंटल राइट्स पहले से ही संविधान में हर नागरिक को मिला बुनियादी अधिकार था। इन अधिकारों का हनन होने पर कोई भी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की शरण ले सकता है। आधार कार्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं अदालत में लंबित हैं। इन याचिकाओं में सबसे अहम दलील दी गई है कि आधार कार्ड से प्राइवेसी यानी निजता का हनन होता है ।
वहीं सरकार की दलील है कि राइट टू प्राइवेसी का अधिकार अपने आप में मौलिक अधिकार नहीं है।
व्हाट्स एप पर ऐसे होगा असर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सोशल नेटवर्क व्हाट्स एप की नई निजता नीति पर भी असर पड़ेगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 सितंबर, 2016 को दिए अपने आदेश में व्हाट्स एप को नई निजता नीति लागू करने की इजाजत दी थी, हालांकि अदालत ने व्हाट्सएप को 25 सितंबर, 2016 तक इकट्ठा किए गए अपने यूजर्स का डेटा एक अन्य सोशल नेटवर्किंग कम्पनी फेसबुक या किसी अन्य कम्पनी को देने पर पाबंदी लगा दी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।