बून्दी: रजत गृह कॉलोनी में सुबह से लेकर रात पौने ग्यारह बजे तक 22 बार से भी अधिक गई लाइट, इसके बाद भी सिलसिला जारी

0
238

न्यूज चक्र @ बून्दी

शहर की सबसे पहली सुव्यवस्थित बसी, सबसे बड़ी और सम्भवतया एकमात्र सहकारी कॉलोनी रजत गृह कई महीनों से भारी विद्युत अव्यवस्था का शिकार है। सुबह होने के साथ ही बिजली के आने-जाने का खेल शुरू हो जाता है, जो देर रात तक लोगों को परेशान रखता है। आज बुधवार को ही रात 10.48 बजे तक 20-22 बार से अधिक बिजली बंद हो चुकी है। समाचार अपडेट किए जाने के अंतिम दस मिनट में ही 4 बार लाइट गई। इस क्रम को देखते हुए आशंका है कि यह सिलसिला रातभर जारी रहेगा।

उमस भरे मौसम मेंं बिजली की इस तगड़़ी मार ने    क्षेत्रवासियों को और अधिक बेहाल कर रखा है। विद्युत निगम से इस बारे में रटे-रटाये जवाब मिलते हैं। इनमें या तो शटडाउन की बात कही जाती है या फॉल्ट की। सवाल यह है कि हर बार शटडाउन के लिए इस क्षेत्र को ही क्यों चुना जाता है, शहर के अन्य भागों को क्यों नहीं? इस क्षेत्र में ही अगर दिनभर में दसियों बार फॉल्ट होने से बिजली बंद होती है तो पिछले करीब दो महीनों में विद्युत मरम्मत के नाम पर चार-पांच बार चार-चार घंटे बंद रखी गई बिजली सप्लाई क्या मजाक थी? इसके अलावा अभी भी दिन में कई बार एक-एक घंटे बंद रहने वाली बिजली का कारण मरम्मत को बताया जाता है, तो उस पर भी बार-बार फॉल्ट क्यों हो रहे हैं? और अभी भी बार-बार फॉल्ट हो रहा है तो इसके लिए दोषी कौन है ? विद्युत कर्मचारी फॉल्ट करने के लिए हैं या फॉल्ट ठीक करने के लिए?

कुछ साल पहले तक जब इनवर्टर का प्रचलन आम नहीं था तो छोटे-मोटे नेता तक दो-तीन बार बिजली बंद हो जाने पर ही निगम के दफ्तरों, ग्रिड स्टेशनों में पहुंच कर हंगामा और तोड़फोड़ कर दिया करते थे। यहां तक कि विधायक अशोक डोगरा तक एसई को घेरने पहुंच जाते थे। मगर अब सब खामोश हैं। नैनवां रोड पर कुछ लोग तो यह आशंका जताते भी सुने गए कि कुछ निचले स्तर के नेता इनवर्टर बेचने वालों से मिले हुए हैं। इनकी मिली भगत लाइनमैनों से भी है, इसलिए उनके लिए विद्युत अव्यवस्था फायदे का जरिया है।

मंत्री की सख्ती में भी दम नहीं

कुछ दिन पूर्व जिला प्रभारी मंत्री बाबूलाल वर्मा ने यहां अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें शहर में विद्युत व्यवस्था सही रखे जाने की सख्त हिदायत दी थी। इससे पहले भी वो ऐसा कर चुके हैं। मगर उनकी इस सख्ती का बिलकुल भी असर होता नहीं दिख रहा। शहरवासियों में यह चर्चा आम है कि स्थानीय स्तर पर भाजपा और कांग्रेस की अभूतपूर्व जुगलबंदी के कारण कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अव्यवस्थाओं का विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं। बस नेताओं को दर्द और तकलीफ नजर आती है तो अवैध बस्ती वालों की, क्योंकि वहीं उन्हें अपना राजनीतिक स्वार्थ अधिक सिद्ध होता नजर आता है।