घुटने के मरीजों को मोदी का तोहफा, सर्जरी की कीमत 65 प्रतिशत कम हुई

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

केन्द्र सरकार ने घुटने की सर्जरी की कीमतों पर सीलिंग लगा दी है। इससे इनकी सर्जरी की कीमत 65 प्रतिशत कम हो जाएगी। 16 अगस्त से लागू हुए इस आदेश में खास बात यह है कि पहले हो चुके घुटने के ऑपरेशन के बिल भी अगर 16 अगस्त को बनते हैं तो उन्हें भी इस आदेश का लाभ मिलेगा।
सरकारी संस्था एनपीपीए के मुताबिक इस व्यापार में डिस्ट्रीब्यूटर और अस्पताल दोनों अनैतिक तरीके से पैसा बनाने मे लग गए थे। केन्द्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने पीएम मोदी का संकेत पाते ही फैसला तो ले लिया, लेकिन ऐलान होने के पहले तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। मंत्रालय को डर था कि पहले ही यह खबर लीक हो गई तो एक बड़ा तबका इस फैसले को रुकवाने में लग जाएगा, क्योंकि इससे बड़ा झटका उस वर्ग को लगने वाला था जो अनैतिक तरीके से इस धंधे को चला रहा था।
वहीं इस फैसले से उन रोगियों को भारी राहत की मिलेगी, जिनके लिए महंगी सर्जरी करवाना नामुमकिन था।
कीमतों में इस तरह आएगी कमी
सरकार के ताजा फैसले के मुताबिक सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला घुटने का इम्प्लांट कोबाल्ट क्रोमियम, जिसकी एमआरपी पहले 1लाख 58 हजार 324 रुपए आती थी, उसकी कीमत 65 फीसदी क हो गई है। अब एमआरपी पर सीलिंग लगाते हुए सरकार ने इसकी कीमत 54 हजार 720 रुपए+जीएसटी कर दी है। स्पेशल मेट जैसे टाइटेनियम और ऑक्सीडाइज्ड जीरकोनिम की कीमत 2.5 लाख से 4.5 लाख रुपए थी, उसकी कीमत में 69 फीसदी की कमी हुई है। अब इसकी कीमत 76 हजार 600 रुपए+जीएसटी रहेगी।

इसी तरह हाई फ्लेक्सिबिलिटी इम्प्लांट की कीमत 1लाख 81 हजार 728 रुपए थी, अब यह 69 फीसदी की कमी के साथ 56 हजार 490+जीएसटी हो गई है। दूसरी सर्जरी के लिए रीविजन इम्प्लांट की कीमत 2लाख 76हजार 869 रुपए थी, यह 59 फीसदी कम होकर 1लाख 13हजार 950 रुपए +जीएसटी हो गई है। कैंसर और ट्यूमर के लिए विशेष इम्प्लांट की कीमत 9 लाख तक थी। एनपीपीए कम्पनियों से बात कर इसकी कीमत तय करेगा, लेकिन तब तक इसकी कीमत 1लाख 13950 रुपए रहेगी।

उल्लेखनीय है कि भारत में हर साल एक से डेढ़ लाख लोग घुटने की सर्जरी करवाते हैं। सरकारी आंकड़ों की माने तो इससे भारत में घुटनों की सर्जरी करवाने वाले लोगों को 1500 करोड़ रुपए की बचत होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक 2020 तक ऑस्टियोआर्थ्राइटिस दुनिया भर की आबादी एक बड़े हिस्से के चलने-फिरने पर असर डालने वाला चौथा सबसे बड़ा कारण बनेगा।

भारत में 80 से 90 फीसदी इम्प्लांट का बाजार विदेशों से आयात पर ही टिका है। इसके चलते भारत का उद्योग जगत बड़ी विदेशी कम्पनियों के मुकाबले टिक नहीं पाता है सरकार भी मानती है कि कीमतों पर सीलिंग लगाने से देशी बाजार सुधरने के आसार हैं।
चेतावनी भी दी
केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार ने इस आदेश के बावजूद ज्यादा कीमत वसुल करने वालों से न सिर्फ 18 फीसदी ब्याज दर से पैसा वसूलने वालों के खिलाफ ही नहीं, डिस्ट्रीब्यूटर्स और अस्पतालों के खिलाफ भी आपराधिक कार्यवाही की चेतावनी दी है।