40 साल के जिन्ना को अंकल कहती थी 16 की रूटी, फिर हो गया प्रेम

    0
    389

    न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

    पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की यह वो लव स्टोरी है, जिससे उस समय पूरे भारत में भारी बवाल और नाराजगी फैल गई थी। परम्परागत भारतीय समाज उनके इस बेमेल सम्बन्ध और दोस्त को दिए धोखे को सहन नहीं कर पाया था। जी हां, जिन्ना ने अपने से 24 साल छोटी अपने दोस्त और क्लाइंट की 16 वर्षीय पुत्री रूटी से मुम्बई में कोर्ट मैरिज की थी।

    रूटी मुम्बई के करोड़पति पारसी सर दिनशॉ पेतित की इकलौती वारिस थीं। वह फैशनेबल, बला की हसीन, शोख और प्रखर दिमाग वाली किशोरी थीं। वहीं 40 वर्षीय जिन्‍ना लंदन रिटर्न बैरिस्टर। मुम्बई में राजनीतिक क्षेत्र में भी उभर रहे थे। रूटी मुम्बई की अभिजात्य वर्ग की पार्टियों की शान थींं, जो जिन्ना के स्वभाव के एकदम  उलट था। जिन्ना अक्सर क्लब जाया करते थे। दिनशॉ उनके मुवक्किल थे। क्लब में मुलाकातें होती थीं। इस दौरान दिनशॉ का सपरिवार दार्जिलिंग घूमने जाने का प्रोग्राम बना तो उन्होंने मित्र बन चुके मोहम्मद अली जिन्ना को भी साथ चलने के लिए बोल दिया।

    बेहद गम्भीर और रुखे स्वभाव के थे जिन्ना

    उस समय जिन्ना मुम्बई के क्लब में और अभिजात्य सर्कल में नियमित मौजूद जरूर रहते थे, लेकिन उनकी पहचान कम बोलने वाले और महिलाओं से दूर रहने वाले शख्स के रूप में थी। आत्मकेन्द्रित और कुछ हद तक रुखे स्वभाव के माने जाते थे। मगर ऐसे वकील, जो अपना मुकदमा नहीं हारता था। जिन्ना के पिता का व्यापार विदेशों तक फैला हुआ था।

    पत्नी की मौत, दूसरी शादी नहीं करना चाहते थे

    16 साल की उम्र में 14 साल की एमिबाई से जिन्ना का विवाह हुआ था। इसके कुछ महीनों बाद ही उन्हें लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई करने भेज दिया गया। वहीं पर उन्हें अपनी बीवी की मौत की जानकारी मिली। माना गया कि उनकी मौत जिन्ना से वियोग के गम में बीमार रहने से हुई। इसके बाद जिन्ना ने दूसरी  शादी नहीं करने का फैसला कर लिया था। उनकी छोटी बहन फातिमा ने कई बार इसके लिए मनाने की कोशिश की, मगर वे नहीं माने।

    फिर ऐसे रोमांटिक हो गए जिन्ना

    ऐसे रुखे जिन्ना भी जब दार्जिलिंग की हसीन वादियों में रूटी के साथ घूमे तो दोनों में न जाने कैसे प्रेम के अंकुर फूट पड़ेेे। रूटी परम्पराओं के खिलाफ चलने वाली थीं। वह भी जिन्ना के प्रति आकर्षित हुईं। हालांकि वो उन्हें अंकल कहती थीं।

    जिन्ना की बात सुन गुस्से से फट पड़े थे दिनशॉ

    इस दौरान दार्जिलिंग में ही एक बार रात के खाने के बाद जिन्ना ने सर दिनशॉ से पूछा कि दो धर्मों के बीच शादी के बारे में आप की क्या राय है ? इस पर रूटी के पिता ने तुरंत जवाब दिया कि इससे राष्ट्रीय एकता कायम करने में मदद मिलेगी। इस पर जिन्ना ने तपाक से कहा कि वह उनकी बेटी से शादी करना चाहते हैं। यह सुनते ही दिनशॉ गुस्से से पागल हो गए। उन्होंने जिन्ना से उसी वक्त वहां से निकल जाने के लिए कहा। जिन्ना ने उन्हें खूब समझाने की कोशिश की, लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए।

    पत्रकार से लेखिका बनीं शीला रेड्डी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘मिस्टर एंड मिसेज जिन्नाः द मैरिज देट शॉक इंडिया’ में जिन्ना और रूटी के विवाह और फिर दोनों में आई दूरियों के बारे में विस्तार से लिखा है। जिन्ना की पेशकश के बाद दिनशॉ ने बेटी के उनसे मिलने पर पाबंदी लगा दी। लेकिन बेटी भी कम जिद्दी नहीं थी। वह जिन्ना के अलावा किसी और से शादी नहीं करने पर अड़ गईं। इस पर उनके पिता ने रूटी पर कई और पाबंदियां लगा दीं। तब रूटी ने खुद के 18 साल का होने के लिए दो साल और इंतजार किया। जिन्ना भी खामोशी से इंतजार करते रहे।

    विवाह के कुछ साल बाद ही बदल गए हालात
    20 फ़रवरी, 1918 को रूटी 18 साल की हुईं तो उन्होंने पिता का घर छोड़ दिया। जिन्ना रूटी को मुम्बई की जामिया मस्जिद ले गए। वहां वे इस्लाम कबूल कर  मरियम बाई बन गईं। इसके बाद 19 अप्रैल, 1918 को जिन्ना और रूटी ने निकाह कर लिया। इसके कुछ सालों तक तो दोनों एक दूसरे में डूबे रहे, लेकिन फिर जिन्ना की व्यस्तता और उम्र का फासला उनके बीच फासला बढ़ाने लगा। जिन्ना रूटी पर पाबंदियां लगाने की कोशिश करते, मगर वे उन्हें बिलकुल नहीं स्वीकारतीं।

    अवसाद में डूब करने लगीं नशा, हो गई मौत
    इन हालात के चलते रूटी बहुत ज्यादा नशा करने लगीं। इससे उनकी तबीयत बुुुरी तरह बिगड़ी तो इलाज के लिए लंदन शिफ्ट करना पड़ा।  इलाज कराकर वापस लौटीं रूटी ताज होटल में रहने लगीं। 20 फरवरी 1929 को रूटी का 30वां जन्मदिन था। इसी दिन शाम को उनकी मौत हो गई।

    रूटी का यह आक्रामक रूप भी आया सामने
    रूटी के विद्रोही स्वाभाव के कई किस्से मशहूर हैं। शीला रेड्डी की किताब में जिक्र है कि रूटी पांच महीने की गर्भवती थीं। जिन्ना उन्हें घर पर ही रहने की हिदायत देकर मुम्बई के टाउन हाल चले गए। मगर रूटी नहीं मानीं और किसी तरह टाउन हाल की बालकनी तक पहुंच गईं। वहाां बाम्बे के पुलिस कमिश्नर विंसेंट की सभा चल रही थी। रूटी बालकनी से उन पर अंग्रेजी में चीखने लगीं।अंग्रेजी में दिए उनके भाषण से हर कोई प्रभावित हो गया। उन्होंने कहा, हम गुलाम नहीं हैं। वह पुलिस कमिश्नर की ओर मुखातिब होकर बोलीं-मिस्टर विंसेंट, आपको कोई अधिकार नहीं है कि मुझको लेक्चर देने से रोकें, क्योंकि बम्बई का नागरिक होने के नाते मुझे भी बोलने का अधिकार है। आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन मैं यहां से हिलने वाली नहीं हूं। रूटी के भाषण को लोग जैसे मंत्रमुग्ध हो सुन रहे थे। फिर वह आराम से टाउनहाल की सीढ़ियों पर बैठकर सिगरेट के कश लगाने लगींं। इससे जिन्ना का चेहरा तनाव से भिंच गया।

    बेटी ने भी की जिन्ना से बगावत

    धीरे-धीरे जिन्ना ने अपनी खूबसूरत, जवान बीवी में दिलचस्पी लेना बिल्कुल बंद कर दिया। रूटी से उन्हें एक बेटी हुई। मगर उसकी शुरू से ही अपने पिता से नहीं बनी। उसने कभी जिन्ना को पसंद नहीं किया। बड़ी होने पर उसने भी बगावत कर पारसी व्यक्ति ( नुस्ली वाडिया के पिता) से शादी कर ली। बटवारे के बाद वो मुम्बई में ही रह गईं। जिन्ना की मौत पर ही केवल एक बार पाकिस्तान गईं।

    Courtsey: Sanjay Srivastava | News18Hindi