सांस के लिए तड़प रहे बच्चों के लिए फरिश्ता बने डॉ. कफील अहमद

    बीआरडी मेडिकल कॉलेज त्रासदी-इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील ने अपने दोस्तों से ऑक्सीजन सिलेंडर मांगकर लाने के साथ अपने पैसों से खरीद भी की

    0
    291

    न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

    गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार रात जब ऑक्सीजन की कमी से बच्चे तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे थे, एक डॉक्टर कुछ बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आया। ये डॉक्‍टर थे डॉ. कफील अहमद। इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील की सोशल मीडिया से लेकर हर कहीं खूब सराहना हो रही है।

    गुरुवार रात करीब दो बजे डॉ. कफील को अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की सूचना मिली। इस पर वे तुरंत   हालात की गम्भीरता को समझ गए। उन्हें महसूस हो गया कि एकदम कुछ नहीं किया तो स्थिति भयावह हो जाएगी।

    आनन-फानन में वे अपने एक डॉक्टर मित्र के पास पहुंचे । उनसे ऑक्सीजन के तीन सिलेंडर अपनी गाड़ी में लेकर शुक्रवार रात तीन बजे सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे। इन तीन सिलेंडरों से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकी।

    रात भर किसी तरह से काम चल पाया, लेकिन सुबह सात बजे ऑक्सीजन खत्म होते ही एक बार फिर स्थिति बिगड़ गई। इस पर उन्होंने शहर के गैस सप्लायर से फोन पर बात की। बड़े अधिकारियों को भी फोन लगाया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।

    डॉ. कफील अहमद एक बार फिर अपने डॉक्टर मित्रों के पास मदद के लिए पहुंचे और करीब एक दर्जन ऑक्सीजन सिलेंडर का जुगाड़ किया। इस बीच उन्होंने शहर के करीब 6 ऑक्सीजन सप्लॉयर को फोन लगाया। सभी ने कैश पेमेंट की बात कही। इसके बाद डॉ. कफील  ने बिना देर किए अपने कर्मचारी को खुद का एटीएम कार्ड दिया और पैसे निकालकर ऑक्सीजन सिलेंडर लाने को कहा।

    इस बीच उन्होंने एम्बु पम्प से बच्चों को बचाने की कोशिश भी की। डॉ. कफील के इस प्रयास की हर तरफ खासी प्रशंसा हो रही है। कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा में भी डॉ. कफील की तरह अपनी जिम्मेदारी का अहसास और उसे निभाने की तलब होती तो इतनी अधिक संख्या में मासूमों की बेवजह मौत नहीं होती। उनके इस डिवोशन के बारे में उनके ड्राइवर सूरज ने भी काफी जानकारियां दीं।