मेडिकल कॉलेज में आॅक्सीजन सप्लाई ठप होने से 30 बच्चों की मौत

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुआ ये बड़ा हादसा

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न्यूज चक्र @ गोरखपुर/सेन्ट्रल डेस्क

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आॅक्सीजन सप्लाई ठप हो जाने से 30 बच्चों की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से वार्डों में कोहराम मच गया। हर तरफ चीख-पुकार व अफरातफरी का माहौल है। मेडिकल कॉलेज में इंसेफ़लाइटिस के मरीजों के लिए बने सौ बेड के आइसीयू सहित दूसरे आइसीयू व वार्डों में देर रात से आक्सीजन सप्लाई ठप होना शुरू हुुुई। इससे मासूमों व अन्य मरीजों ने तड़पकर दम तोड़ना शुरू कर दिया। रात करीब साढ़े ग्यारह  बजे से शुरू हुआ यह सिलसिला  सुबह नौ बजे तक जारी रहा।

पता चला है कि मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्‍पताल में ऑक्सीजन सप्‍लाई करने वाली फर्म का 69 लाख रुपए का भुगतान बकाया था। इसके चलते फर्म ने गुरुवार शाम अस्‍पताल में लिक्विड ऑक्‍सीजन की आपूर्ति ठप कर दी। गुरुवार से ही मेडिकल कालेज में जम्‍बो सिलेंडरों से गैस की आपूर्ति की जा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो साल पहले लिक्विड आक्‍सीजन का प्‍लांट लगाया गया था। इसके जरिये इंसेफेलाइटिस वार्ड सहित करीब तीन सौ मरीजों को पाइप के जरिए आक्‍सीजन दी जाती है। पहली बार रात आठ बजे इंसेफलाइटिस वार्ड में आक्सीजन सिलेंडर से की जा रही सप्लाई ठप हो गई। इसके बाद वार्ड को लिक्वड आक्सीजन से जोड़ा गया। यह भी रात साढ़े ग्यारह बजे खत्म हो गया। यह देख वहां तैनात आॅपरेटर के होश उड़ गए। उसने जिम्मेदार अधिकारियों को फोन मिलाना शुरू किया, लेकिन किसी से जवाब नहीं दिया। इस बीच रात डेढ़ बजे तक सप्लाई ठप रही। वार्ड में भर्ती 50 से अधिक मरीज बेहोशी की हालत में पहुंच गए। डॉक्टर व अन्य चिकित्सा स्टाफ घबराहट में आ गए। सभी के चेहरों पर खासा तनाव था।

इस बीच रात डेढ़ बजे सिलेंडर आक्सीजन से लदी गाड़ी आई और आनन फानन में उसको आक्सीजन से जोड़ा गया। अभी डॉक्टरों ने राहत की सांस ली ही थी कि सुबह सात बजे दोबारा आक्सीजन खत्म हो गया। कुछ आक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम किया गया है लेकिन वह पूरी तरह नाकाफी है। मरीजों को अंबू बैग से ऑक्सीजन दिया जा रहा था। मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

 

दो दिन पहले ही सीएम योगी ने किया था दौरा

उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले नौ अगस्त की शाम को ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था। इसमें उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। 

डीएम ने सुध ली न कमिश्नर ने

ताज्जुब है कि इतनी बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा। जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते तो क्राइसिस मैनेजमेंट आसान हो जाता।

लापरवाही से बढ़ता गया बकाया

बीआरडी मेडिकल कॉलेेज में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया था। इसके जरिये इंसेफेलाइटिस वार्ड समेत तीन सौ मरीजों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। इसकी सप्लाई पुष्पा सेल्स करती है। कम्पनी के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने प्राचार्य को पत्र लिखकर बताया था कि कॉलेज पर 68 लाख 58 हजार 596 रुपए बकाया हैं। बकाया रकम की अधिकतम तय राशि 10 लाख रुपए है। बकाया की रकम तय सीमा से अधिक होने के कारण देहरादून के आईनॉक्स कम्पनी की एलएमओ गैस प्लांट ने गैस सप्लाई देने से इनकार कर दिया।

इतनी मौतों के बाद आखिर शुरू हुई सप्लाई

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गुरुवार की शाम से ही बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था। एक-एक कर बच्चों की हो रही मौत से परेशान डॉक्टरों ने पुष्पा सेल्स के अधिकारियों को फोन कर मनुहार की। उधर कॉलेज प्रशासन ने 22 लाख रुपए बकाया के भुगतान की कवायद शुरू की। इसके बाद पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर को भेजने का फैसला किया। हालांकि ये टैंकर भी शनिवार शाम या रविवार तक ही मेडिकल कॉलेज पहुंचेगा।

पहले भी फर्म ठप कर चुकी है सप्लाई
बीते वर्ष अप्रैल में भी फर्म का बकाया करीब 50 लाख रुपए हो गया था। फर्म ने कई बार बकाया भुगतान के लिए पत्र लिखा। आरोप है कि भुगतान न मिलने पर फर्म ने आपूर्ति ठप कर दी थी। इसके बाद भी जमकर हंगामा हुआ था।

ये वार्ड हुए प्रभावित
ट्रॉमा सेंटर
100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड
नियोनेटल यूनिट
इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14
मेडिसिन आईसीयू
एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12
बालरोग वार्ड 6
वार्ड नंबर 2
एनेस्थिसिया आईसीयू
लेबर रूम
जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी ओटी

प्रशासन ने नजर फेरी, सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) ने की मदद
बीआरडी में ऑक्सीजन के संकट ने पूरे अस्पताल प्रशासन को घुटनों के बल ला दिया। डॉक्टरों ने प्रशासनिक अधिकारियों को संकट की जानकारी दी, मदद भी मांगी। मगर जिले के आला अधिकारी बेपरवाह रहे। ऐसे में मदद को आगे आया एसएसबी व कुछ प्राइवेट अस्पताल। सशस्त्र सीमा बल के अस्पताल से 10 जंबो सिलेंडर दिए गए। ऑक्सीजन खत्म होने की खबर कर्मचारियों ने रात दो बजे ही वार्ड 100 बेड के प्रभारी डॉ. कफील खान को दी। इस पर वे तड़के तीन बजे से ही वार्ड में आकर ऑक्सीजन सिलेंडरों के इंतजाम में लगे रहे। सुबह सात बजे जब किसी बड़े अधिकारी व गैस सप्लायर ने फोन नहीं उठाया तो डॉ. कफील ने डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगी। अपनी गाड़ी से ऑक्सीजन के करीब एक दर्जन सिलेंडरों को ढोया।

एसएसबी ने दिए 10 सिलेंडर
मासूमों को तड़पता देखकर डॉ. कफील ने एसएसबी से मदद मांगने का फैसला किया। वह एक कर्मचारी को लेकर बाइक से ही एसएसबी के डीआईजी के पास गए। डीआईजी एसएसबी ने तत्काल 10 ऑक्सीजन सिलेंडर दिए। इतना ही नहीं एक ट्रक भी भेजा, जिससे कॉलेज प्रशासन दूसरी जगहों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवा सके।