लालू यादव के लिए इस बार फिर मुसीबत बने राकेश अस्थाना

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न्यूज़ चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना इस बार फिर लालू प्रसाद यादव के लिए बड़ी मुसीबत बन कर आए हैं। लालू पर उनके खौफ से उनके समर्थक तक पहले से ही अच्छी तरह वाकिफ़ हैं। अस्थाना इससे पहले भी देशभर में चर्चित रहे चारा घोटाले की प्रारम्भिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्हीं के चलते सीबीआई लालू पर इस घोटाले में शिकंजा कस सकी थी। मगर इस बार अस्थाना लालू के साथ उनके परिवार के लिए भी जो मुसीबत लेकर आए हैं वो पहले से कहीं अधिक बड़ी लगती है।

राकेश अस्थाना के हाथ इस बार लालू और उनके परिवार की बेनामी संपत्ति और साल 2005 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे के दो होटलों की नीलामी में गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी है। सीबीआई के अनुसार, प्रारम्भिक जांच में ही होटल आवंटन में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। लालू ने रेलवे मंत्री रहते ये होटल लीज पर देने के बदले बेशकीमती जमीन ली । 32 करोड़ की जमीन 65 लाख में खरीदना दिखाई गई है। इसी के चलते उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में आईपीसी की धारा 420 और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शर्तों में ढील देकर किया गड़बड़झाला
सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर अस्थाना ने बताया कि लालू ने जमीन के लिए होटल देने की शर्तों में ढील दी। जब लालू रेलमंत्री थे तब रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया गया था। इनकी देखभाल करने के लिए टेंडर इश्यू किए गए थे। बाद में यह पाया गया कि ये टेंडर बांटने में भी गड़बड़ियां हुईं।

पहली बार अस्थाना का यह रहा था अनुभव
बात है लालू यादव के 1995 में मुख्यमंत्री बनने के बाद की। सीबीआई चारा घोटाले की जांच शुरू कर चुकी थी। राकेश अस्थाना धनबाद में थे और जांच उनके हवाले थी। तब झारखंड अलग राज्य नहीं था। जांच के सिलसिले में अस्थाना और उनके साथी अफसर पटना में लालू से पूछताछ करने पहुंचे। मगर लालू यादव से पूछताछ करने की बात तो दूर मुलाकात तक नहीं हो पा रही थी। अस्थाना पर तरह-तरह के दबाव पड़ने लगे, हथकंडे अपनाए गए। अस्थाना कोलकाता में बैठे संयुक्त निदेशक यूएन विश्वास के चहेते थे। विश्वास ने जांच की लगभग पूरी धारा लालू की संलिप्तता की ओर मोड़ दी। किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि बात क्या है? लालू इस कदर क्यों सामने नहीं आने पर अड़े हुए हैं। पूरा मामला तब साफ हुआ जब किसी नेता के कहने पर बिहार सरकार के एक अफसर ने अस्थाना के एक साथी अफसर से किसी बहाने मुलाकात की। इसमें बड़ा दिलचस्प कारण सामने आया।
पजामे के अंदर चूहा छोड़े जाने का था डर
दरअसल बिहार सरकार के इस अफसर से पता चला कि लालू यादव को उनके कुछ समर्थक सीबीआई से मिलने से रोक रहे हैं। लालू के नजदीकी कुछ राष्ट्रीय जनता दल नेता बेहद डरे हुए थे। उन्होंने सुन रखा था कि पूछताछ के दौरान अस्थाना पीटते हैं। इतना ही नहीं नेताओं ने जाने कहां से यह भी सुन रखा था कि सीबीआई के अफसर पजामे के अंदर चूहा छोड़ देते हैं।
इसके अलावा खूब मिर्च वाला खाना खिला कर पीने के लिए पानी नहीं देते हैं।
भरोसा दिलाया, तब जांच आगे बढ़ी
सीबीआई के अफसर ने इन बातों को खारिज करते हुए बिहार के अफसर को ऐसा कुछ भी नहीं होने का भरोसा दिलाया। राजद नेताओं को भी भरोसा दिलाया गया कि अस्थाना चाहे जितने भी सख्त अफसर हों,मगर वे किसी मुख्यमंत्री के साथ तो ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते। इसके बाद मुलाकात और जांच में अस्थाना चाहे लालू से कितनी भी इज्जत से पेश आए हों , लेकिन आखिर लालू को चारा घोटाले में जेल जाना ही पड़ा। इस चारा घोटाले से बिहार की राजनीति तो हमेशा के लिए बदली ही, देश में भी यह अनोखा मामला बन गया।

पीएम मोदी के विश्वस्त हैं राकेश अस्थाना
अस्थाना 1984 के बैच के गुजरात कैडर के अफसर हैं.। साथ ही वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विश्वास पात्र भी माने जाते हैं। वाजपेयी सरकार आने के बाद अस्थाना गुजरात कैडर में वापस चले गए थे। मनमोहन सिंह सरकार आने के बाद लालू यादव को अस्थाना से पीछा छूट जाने का भरोसा हो गया था। मगर मोदी सरकार ने फिर अस्थाना को ही उनके काले कारनामे सामने ला शिकंजा कसने की जिम्मेदारी दे दी।

लालू पर फेंके गए थे बर्फ के टुकड़े

लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान सूरत के पास एक रेल दुर्घटना हुई थी। तब लालू वहां मुआयना करने पहुंचे। लालू को यह बात पता नहीं थी कि अस्थाना वहां पुलिस कमिश्नर हैं। अचानक अस्थाना को वहां देख कर लालू का पारा चढ़ गया और वे अपनी चिरपरिचित शैली में चिल्लाने लगे। इसी बीच कुछ नवयुवकों ने लालू के ऊपर पत्थर की तरह के से बर्फ के टुकड़े फेंके। इसका कारण यह था कि बर्फ को तो पिघलना ही था। इससे वहां कोई सबूत नहीं बचना था। इस घटना से लालू यादव और घबरा गए और घटनास्थल से भागे। दिल्ली लौट कर उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी उनकी हत्या कराना चाहते हैं।

अस्थाना के हाथ फिर आया केस
यूपीए सरकार के दौरान लालू ने हरसम्भव कोशिश की कि वे चारा केस से बरी हो जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कई सालों का वनवास काटने के बाद पिछले चुनाव में लालू का समय सुधरता लगने लगा ही था कि अस्थाना फिर उनके सामने हाजिर हो गए। उल्लेखनीय है कि चारा घोटाले की जांच अभी भी चल रही है । इसके अलावा अब मोदी की सरकार भी है। अस्थाना दिल्ली में अतिरिक्त निदेशक के पद पर काबिज हो गए हैं। मोदी से नजदीकी के चलते सीबीआई में उनकी खासी धाक है ही।
कई अन्य राजनेताओं के जांच की जिम्मेदारी भी
राकेश अस्थाना के जिम्मे कई अन्य राजनेताओं की जांच की जिम्मेदारी भी है। इनमें मुलायम सिंह यादव, मायावती, ममता बनर्जी सरीखे नाम शामिल हैं। अस्थाना को इस बार लालू के अलावा उनकी पत्नी और बेटे तक की जांच करनी है। इनके अलावा गुजरात कैडर के इन आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना के पास कई अहम केसों में अगस्टा वेस्टलैंड डील और विजय माल्या केस भी शामिल हैं।

नियुक्ति पर हुआ था बवाल
वर्ष 2015 में ही मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना को सीबीआई का एडिशनल डायरेक्टर बना दिया था। सीबीआई के पूर्व निदेशक अनिल सिन्हा के पिछले साल 2 दिसम्बर को रिटायर होने से ठीक पहले अस्थाना को सीबीआई का इंचार्ज डायरेक्टर बना दिया गया था। मोदी सरकार ने 1 दिसम्बर 2016 की रात को चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए सीबीआई में दूसरे स्थान पर रहे स्पेशल डायरेक्टर रूपक कुमार दत्ता का गृह मंत्रालय में स्थानांतरण कर सीबीआई में एडिशनल डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे नम्बर तीन के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को इन्चार्च डायरेक्टर बना दिया था। सरकार के इस निर्णय पर काफी बवाल हुआ था।

सोर्स: फर्स्ट पोस्ट