भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को लगातार रक्त उपलब्ध करवा रहे युवा

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न्यूज चक्र @ कोटा
शहर के ब्लड बैंको में ए बी पॉजिटिव और ओ नेगेटिव ग्रुप के रक्त की लगातार कमी व बढ़ती मांग को देखते हुए रक्तदाता ग्रुप के सदस्य एक सप्ताह से लगातार जरूरतमंंदों को रक्त उपलब्ध  करवा रहे हैं। समय पर रक्त नहीं मिलने से किसी की जान नहीं जानी चाहिए, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कोटा के ये कुछ युवा दिन-रात सजग रहते हैं।

स्टूडेंट्स हेल्प सोसायटी से जुड़ी हुई इस रक्तदाता टीम के सदस्य राजस्थान के सभी 33 जिलों में सक्रिय हैं ।  संगठन का दावा है कि उसके प्रयासों से तीन हजार  से अधिक जरूरतमंदों को सहायता दी जा चुकी है।  स्टूडेंट्स हेल्प सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष रक्तवीर सुरेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि जब हर इंसान रक्तदान करने के लिए तैयार होगा, हम तभी सही मायने में इंसान कहलाने के लायक होंगे। मदद करने के लिए केवल धन की जरूरत नहीं होती है, उसके लिए अच्छे मन की जरूरत होती है। अग्रवाल के अनुसार  पिछले सात दिनों में एबी पॉजिटिव के 17 केस आए, जिन्हें युवा टीम ने रक्त उपलब्ध करवाया । सुबह 5 बजे ही एक केस आया। इसमें बी पॉजिटिव फ्रेश रक्त की जरूरत बताने पर तुरंत चार डोनर घनिस्ट जिंदल, अजय राय, मुकेश पहलवान व मनीष धींगड़ा ब्लड बैंक आ गए । इन्होंने तुरंत रक्तदान के पश्चात मरीज के ऑपरेशन में भी मदद कर उसकी जान बचाई। इसी प्रकार मेडिकल काँलेज में भर्ती बाली देवी को 6 यूनिट रक्त की जरूरत थी। उनके लिए भी सोनल गुप्ता व सीए पंकज शर्मा के सहयोग से पूरे 6 यूनिट रक्त की व्यवस्था की गई।

रक्तदाताओं को प्रेरित करते हुुए सुरेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि ब्लड डोनेट कर दूसरे शख्स की जान बचाई जा सकती है। ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है। देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। मगर सिर्फ 5 लाख यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है। हमारे शरीर में कुल वजन का 7 प्रतिशत हिस्सा खून होता है। आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है। ब्लड डोनेशन से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डॉक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो कि हृदय के लिए अच्छा होता है। अग्रवाल ने बताया कि  एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ​ बाहर निकल जाते हैं। ब्लड डोनेट करने के बाद बोनमैरो नए रेड सेल्स बनाता है। इससे शरीर को नए ब्लड सेल्स मिलने के अलावा तंदुरुस्ती भी मिलती है।
ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परंपरा है। इसमें जितना खून लिया जाता है, वह 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वॉल्यूम तो शरीर 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है।
ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है, जिसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन लिया जाता है।ब्लड डोनेट करने के बाद इसमें हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया आदि की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर का ब्लड न लेकर उसे तुरंत सूचित किया जाता है।रक्तक्रान्ति के सोशल मीडिया के प्रेरक राजेन्द्र माहेश्वरी के अनुसार ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरूकता का अभाव है।18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं।ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में ब्लड की कमी दूर हो सकती है। ऐसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए।ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले ड्रिंक नहीं करनी चाहिए।ब्लड डोनेट करने के बाद आप पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं। इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती।इस अवसर पर राजस्थान के विभिन्न जिलों से युवा रक्तवीरो की एक टीम इस तराह की मदद कर रही है