तेज गर्मी में भी रक्तदाताओं ने दिखाया जोश, 30 यूनिट रक्तदान हुआ

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न्यूज चक्र @ कोटा

रक्तदान महादान ग्रुप कोटा-बून्दी व जेसीआई एलीगेन्स के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को नयापुरा स्थित आईएमए हाॅल में आयोजित रक्तदान शिविर में भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में रक्दाता महिला-पुरुष रक्तदान करने के लिए आए। इसके चलते इसमें 30 यूनिट रक्तदान हुआ।

शिविर संयोजक सुरेन्द्र अग्रवाल अौर सीपी मीणा (चन्दू) ने बताया कि इस अवसर पर उप जिला प्रमुख बून्दी सत्येन्द्र मीणा, भाजपा जिला मंत्री शहर कोटा मुकेश विजय, अग्रवाल समाज के प्रदेश महामंत्री गोविन्द नारायण अग्रवाल, स्टूडेंट्स हेल्प सोसायटी के प्रदेश महासचिव नितेश मालव ,जेसीआई एलीगेन्स की संस्थापक डाॅ. मेघना शेखावत व समाजसेवी नीलम विजय अतिथि के रूप में मौजूद थे। उप जिला प्रमुख मीणा ने रक्तदाताअों को प्रेरित करते हुए कहा कि ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है। ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता अौर न ही इसका कोई विकल्प है। देश में हर साल करीब 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। मगर सिर्फ 5 लाख यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है। हमारे शरीर में कुल वजन का सातवां हिस्सा खून होता है। मीणा ने कहा कि आंकड़ों  के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में किसी न किसी कारण से खून की जरूरत पड़ती है। वहीं ब्लड डोनेशन करने वालों को हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है। डाॅक्टर्स का मानना है कि डोनेशन से खून पतला होता है, जो  दिल की सेहत के लिए अच्छा होता है। भाजपा शहर जिला मंत्री विजय ने कहा कि एक नई रिसर्च के मुताबिक नियमित ब्लड डोनेट करने से कैंसर व दूसरी बीमारियों के होने का खतरा भी कम हो जाता है। क्योंकि इससे शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। ब्लड डोनेट करने के बाद शरीर में नए रेड सेल्स बनते हैं। इससे तंदरुस्ती भी बढ़ती है।

21 दिन में ही वापस बन जाता है खून

अग्रवाल समाज के प्रदेश महामंत्री गोविन्द नारायण अग्रवाल ने कहा कि ब्लड डोनेशन सुरक्षित व स्वस्थ परम्परा है। इसमें जितना खून लिया जाता है, उतना खून 21 दिन में शरीर फिर से बना लेता है। ब्लड का वाॅल्यूम तो शरीर में 24 से 72 घंटे में ही पूरा बन जाता है। स्टूडेन्ट हेल्प सोसायटी के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि ब्लड देने से पहले मिनी ब्लड टेस्ट होता है। इसमें हीमोग्लोबिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर व वजन की जांच की जाती है। जेसीआई एलीगेन्स की संस्थापक डाॅ. मेघना शेखावत ने कहा कि ब्लड लेने के बाद इसकी हेपेटाइटिस बी, सी, एचआईवी, सिफलिस अौर मलेरिया की जांच की जाती है। इन बीमारियों के लक्षण पाए जाने पर डोनर के ब्लड का कहीं उपयोग नहीं कर उसे तुरंत सूचित किया जाता है। समाजसेवी नीलम विजय का कहना था कि ब्लड की कमी का एकमात्र कारण जागरुकता का अभाव है। 18 साल से अधिक उम्र के स्त्री-पुरुष, जिनका वजन 50 किलोग्राम या इससे अधिक हो, वर्ष में तीन-चार बार ब्लड डोनेट कर सकते हैं। ब्लड डोनेट करने योग्य लोगों में से अगर मात्र 3 प्रतिशत भी खून दें तो देश में इसकी कमी दूर हो सकती है। एेसा करने से असमय होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। ब्लड डोनेट करने से पहले व कुछ घंटे बाद तक धूम्रपान से परहेज करना चाहिए। ब्लड डोनेट करने वाले शख्स को रक्तदान के 24 से 48 घंटे पहले तक ड्रिंक नहीं करनी चाहिए। ब्लड डोनेट करने के बाद पहले की तरह ही कामकाज कर सकते हैं। इससे शरीर में किसी भी तरह की कमी नहीं होती है। कार्यक्रम में रक्तदाताअों  को अतिथियों ने सम्मानित भी किया। इस अवसर पर नीरज सुमन, मनोज जैन, पूर्व छात्रसंघ महासचिव नितेश मालव, लोकेश मीणा, दीपक मीणा, मयंक, घनिस्ट जिंदल, पूर्वी स्वर्णकार आदि कार्यकर्ता भी मौजूद थे।