जाधव मसला: भारत को राहत, पाकिस्तान ने कहा-और सबूत देंगे

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न्यूज चक्र @ सेन्ट्रल डेस्क

नीदरलैंड की राजधानी हैग में स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने गुरुवार को कुलभूषण जाधव केस पर सुनवाई करते हुए पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पाकिस्तान की दलीलों को साफतौर पर खारिज करते हुए जाधव को काउंसलर एक्सेस दिए जाने के पाकिस्तान को निर्देश दिए हैं । 15 मई को हुई सुनवाई में भारत और पाकिस्तान ने अपनी दलीलें पेश की थींं। वहीं पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को राष्ट्रहित में मानने से इनकार करते हुए इंटरनेशनल कोर्ट में अपनी तरफ से सबूत पेश करने करने की बात कही है।

भारत ने इस मसले पर इंटरनेशनल कोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान ने जाधव पर जासूस होने का आरोप लगाते हुए डिप्लोमेटिक पहुंच न देकर वियना संधि का वॉयलेशन किया है। वहीं, पाकिस्तान ने इसे नेशनल सिक्युरिटी का मुद्दा बताते हुए अन्तरराष्ट्रीय कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए थे।उल्लेखनीय है कि पिछले महीने पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने इंडियन नेवी के पूर्व अफसर जाधव को जासूस बताते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसी के खिलाफ भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट में अपील की थी। 18 साल बाद दोनों देश इंटरनेशनल कोर्ट में आमने-सामने हुए हैं। पहले पाकिस्तान खुद भारत के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट में गया था। तब भी पाकिस्तान को ही हार मिली थी।

कोर्ट के फैसले के अहम प्वॉइंट्स
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के चीफ जस्टिस रोनी अब्राहम और बाकी 10 जज 3.24 मिनट (भारतीय वक्त के मुताबिक) कोर्ट रूम में पहुंचे। भारत और पाकिस्तान की टीमें भी कोर्ट रूम में मौजूद थीं। मगर भारत के चीफ लॉयर हरीश साल्वे मौजूद नहीं थे।
सबसे पहले जज ने जाधव पर पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोप पढ़कर सुनाए। इसमें यह भी बताया कि जाधव को पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। भारत ने उस पर वियना कन्वेंशन के वॉयलेशन का आरोप लगाया है। जज ने कहा- मैं पूरा केस पढ़कर नहीं सुनाउंगा। सिर्फ इसकी समरी बताऊंगा। इसके  बाद उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने  जाधव को 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया था। भारत को इसकी जानकारी 25 मार्च को दी गई। भारत ने तब पाकिस्तान से काउंसलर एक्सेस मांगा और कई बार इसे दोहराया। 23 जनवरी 2017 को पाकिस्तान ने भारत को कुछ सबूत दिए। 4 अप्रैल 2017 को पाकिस्तान के फॉरेन कोर्ट ने प्रेस रिलीज में बताया कि जाधव को वहां की मिलिट्री कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। भारत ने इसका विरोध किया। जाधव को पाकिस्तानी कानून के मुताबिक 40 दिन में सजा के खिलाफ अपील करनी थी, लेकिन ये हुआ या नहीं,  कोर्ट को इसकी जानकारी नहीं है।
अब्राहम के मुताबिक- जाधव की गिरफ्तारी को लेकर डिस्प्यूट हैं। इसे ध्यान में रखना होगा। भारत और पाकिस्तान दोनों वियना कन्वेंशन का हिस्सा हैं। कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान के ऑब्जेशंस पुख्ता नहीं हैं, लिहाजा इन पर विचार नहीं किया जा सकता। लेकिन ये भी ध्यान रखना होगा कि इस मामले में दोनों देशों के बीच म्युचुअल ट्रीटी (आपसी समझौता) है। इसे 2008 में रिव्यू भी किया जा चुका है। वियना कन्वेंशन के मुताबिक यह जरूरी है कि सभी सदस्य देश एक-दूसरे नागरिकों को हर हाल में काउंसलर एक्सेस मुहैया कराएं।

पाकिस्तान ने नकारा फैसला

इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले से पाकिस्तान में खलबली मच गई। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने फैसले को राष्ट्र हित के कारण नहीं मानने की घोषणा की। साथ ही कहा कि वह कोर्ट में जाधव के खिलाफ और ठोस सबूत पेश करेगा। वहीं इससे इस आशंका को भी बल मिल रहा है कि कहीं पाकिस्तान ने जाधव को पहले ही न मार डाला हो।